• दास्तान-ए-वर्चुअल वर्ल्ड : 2019 चुनाव, नेता-वोटर और #Social_Media

    बतकहीबाज

    इस दफा व्यंग नहीं ज्ञानार्जन की बात। ऐसा लग रहा है जैसे 2019 का चुनाव सोशल मीडिया पर ही लड़ा जाएगा। हर पॉलिटिकल पार्टी सोशल मीडिया को अपना हथियार बनाए हुए है। वोटर भी सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं। आरोप-प्रत्यारोप का दौर अभी से शुरु हो चुका है। लिहाजा इस बार हम कोशिश कर रहे हैं वर्चुअल वर्ल्ड और असल जिंदगी के बीच का अंतर बताने की। बात को ज्यादा न फेंटते हुए होते हुए आते हैं सीधे मुद्दे पर।

    सोशल मीडिया पारस्परिक संबंध के लिए अंतर्जाल या अन्य माध्यमों द्वारा निर्मित आभासी समूहों को संदर्भित करता है। यह व्यक्तियों और समुदायों के साझा, सहभागी बनाने का माध्यम है। इसका उपयोग सामाजिक संबंध के अलावा उपयोगकर्ता सामग्री के संशोधन के लिए उच्च पारस्परिक मंच बनाने के लिए मोबाइल और वेब आधारित प्रौद्योगिकियों के प्रयोग के रूप में भी देखा जा सकता है।

    सोशल मीडिया के कई रूप हैं जिनमें कि इंटरनेट फोरम, वेबलॉग, सामाजिक ब्लॉग, माइक्रोब्लागिंग, विकीज, सोशल नेटवर्क, पॉडकास्ट, फोटोग्राफ, चित्र, चलचित्र आदि सभी आते हैं। अपनी सेवाओं के अनुसार सोशल मीडिया के लिए कई संचार प्रौद्योगिकी उपलब्ध हैं।

    उदाहरण
    फेसबूक- विश्व का सर्वाधिक लोकप्रिय सोशल साइट।
    
    सहयोगी परियोजना-उदाहरण के लिए विकिपीडिया।
    
    ब्लॉग और माइक्रोब्लॉग- उदाहरण के लिए ट्विटर।
    
    सोशल खबर ​​नेटवर्किंग साइट्स- उदाहरण के लिए डिग और लेकरनेट।
    
    सामग्री समुदाय- उदाहरण के लिए यूट्यूब और डेली मोशन।
    
    सामाजिक नेटवर्किंग साइट- उदाहरण के लिए फेसबुक।
    
    आभासी खेल दुनिया- जैसे, वर्ल्ड ऑफ वॉरक्राफ्ट।
    
    आभासी सामाजिक दुनिया- जैसे सेकंड लाइफ।

    सोशल मीडिया अन्य पारंपरिक तथा सामाजिक तरीकों से कई प्रकार से एकदम अलग है। इसमें पहुंच, आवृत्ति, प्रयोज्य, ताजगी और स्थायित्व आदि तत्व शामिल हैं। इंटरनेट के प्रयोग से कई प्रकार के प्रभाव होते हैं। निएलसन के अनुसार ‘इंटरनेट प्रयोक्ता अन्य साइट्स की अपेक्षा सामाजिक मीडिया साइट्स पर ज्यादा समय व्यतीत करते हैं’।

    दुनिया में दो तरह की सिविलाइजेशन का दौर शुरू हो चुका है, वर्चुअल और फिजीकल सिविलाइजेशन। आने वाले वक्त में जल्द ही दुनिया की आबादी से दो-तीन गुना अधिक आबादी अंतर्जाल पर होगी। दरअसल, अंतर्जाल एक ऐसी टेक्नोलाजी के रूप में हमारे सामने आया है, जो उपयोग के लिए सबको उपलब्ध है और सर्वहिताय है। सोशल नेटवर्किंग साइट्स संचार व सूचना का सशक्त जरिया हैं, जिनके माध्यम से लोग अपनी बात बिना किसी रोक-टोक के रख पाते हैं। यही से सामाजिक मीडिया का स्वरूप विकसित हुआ है।

    जन सामान्य तक पहुंच होने के कारण सामाजिक मीडिया को लोगों तक विज्ञापन पहुंचाने के सबसे अच्छा जरिया समझा जाता है। हाल ही के कुछ एक सालो में इंडस्ट्री में ऐसी क्रांति देखी जा रही है। फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उपभोक्ताओं का वर्गीकरण विभिन्न मानकों के अनुसार किया जाता है जिसमें उनकी आयु, रूचि, लिंग, गतिविधियों आदि को ध्यान में रखते हुए उसके अनुरूप विज्ञापन दिखाए जाते हैं। इस विज्ञापन के सकारात्मक परिणाम भी प्राप्त हो रहे हैं साथ ही साथ आलोचना भी की जा रही है। सोशल मीडिया से आप कई प्रकार से अपने कारोबार का विज्ञापन दे कर उसे आगे ले जा सकते हैं।

    सोशल मीडिया की समालोचना विभिन्न प्लेटफार्म के अनुप्रयोग में आसानी, उनकी क्षमता, उपलब्ध जानकारी की विश्वसनीयता के आधार पर होती रही है। हालांकि कुछ प्लेटफॉर्म्स अपने उपभोक्ताओं को एक प्लेटफॉर्म्स से दूसरे प्लेटफॉर्म्स के बीच संवाद करने की सुविधा प्रदान करते हैं पर कई प्लेटफॉर्म्स अपने उपभोक्ताओं को ऐसी सुविधा प्रदान नहीं करते हैं जिससे की वे आलोचना का केंद्र बिंदु बनते रहे हैं। वहीं बढती जा रही सामाजिक मीडिया साइट्स के कई सारे नुकसान भी हैं। ये साइट्स ऑनलाइन शोषण का साधन भी बनती जा रही हैं। ऐसे कई केस दर्ज किए गए हैं जिनमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का प्रयोग लोगों को सामाजिक रूप से हानी पहुंचाने, उनकी खिचाई करने तथा अन्य गलत प्रवृत्तियों से किया गया।

    नोट- विभिन्न स्रोतों से जुटाई गई जानकारी के आधार पर यह लेख है। हो सकता है जानकारी में त्रुटियां रह गई हों। हमें विश्वास है कि पूर्व की भांति इस लेख को भी हमारे रीडर्स नापसंद नहीं करेंगे। आप अपना अमूल्य सुझाव editor@aajexpress.com पर ईमेल कर दे सकते हैं।
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