• #बतकहीबाज या #बातूनी_Warrior ही क्यों, आइए आज इसी को मथते हैं, तो गुरु कहानी कुछ ऐसी है कि…

    मुफ्त की सलाह। हर जगह टांग घुसेड़ देने की आदत। जुबान पैर छूता है। अरे मेरा नहीं भाई, मेरे एक ‘बालसखा’ हैं, उनका। अखबारी नौकरी के दौरान घूम-फिर करके ऐसा वक्त आया कि हम लोग दो बार सिटी डेक्स पर साथ काम किए। मेरे लाख मना करने के बावजूद भी मेरे ‘बालसखा’ मानने को तैयार नहीं हुए हैं, अब भी। जुबान उनकी रोज हदों से गुजरता ही चला जा रही है। मतलब जो मशवरा, जिसे नहीं देना चाहिए, वह भी मेरे ये वाले साथी आराम से उसे सेल देने में नहीं चूकते, अब भी और मुझे उम्मीद ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि यह आगे भी चलता रहेगा। कई मसलों पर इनकी ‘लंबी जुबान’ इनके साथ-साथ कई लोगों को फंसाने के मुहाने तक पहुंचा चुकी है। वह तो ऊपर वाले का शुक्र है की हर जगह कहीं ना कहीं से घूम फिर करके मेरा आना संभव हो गया है। मेरा आना संभव से आशय मेरा यह है कि ‘आदमी होत न बलवान’। मेरे इसी सखा के कारण इस नई वाली पारी में ‘बड़ीबोल’ और ‘बतकहीबात’ को अस्तित्व में लाना पड़ा। ब्लॉग लिखता था पहले से, ‘बातूनी Warrior’। लिखने पढ़ने की आदत है, कलम से लगायत कंप्यूटर के कीबोर्ड तक का सफर तय किया है। खरी-खरी लिखने की आदत है तो ‘पिछली नौकरी’ के दौरान एक कॉलम शुरू किया था ‘खरीबात’। साथियों की मंशा थी कि ‘खरीबात’ यहां भी बंद नहीं होनी चाहिए। लेकिन अपनी आदत रही है जिसे छोड़ दिया, उसे बिसार गए। इन्हीं सब चीजों पर मन-मंशाराम बना ही रहे थे कि मेरे को ‘वही साथी’ सामने पड़ गए। दुआ-सलाम होने के बाद बात शुरू हुई मुद्दे की, दरअसल उनकी निगाह भी तेज है। समझते, समझते, समझते, वह भांप गए कि किसी गंभीर मसले पर हम लोग माथापच्ची कर रहे हैं। करीब पौना घंटा तक उन्होंने व्यंग वाली कैटेगरी के लिए कई नाम सुझाए, लेकिन गुरु इस बार वाले भी परम मशवरा उन्होंने दिया। सारी बात सुनने समझने के बाद उन्होंने ही नाम दिया ‘बतकहीबाज’, ‘बड़ीबोल’। तो इस तरह से ‘खरीबात’ के जरिए मुझे पढ़ने वाले अब पढ़ते हैं ‘बतकहीबाज’ और ‘बड़ीबोल’ में। मेरे ब्लॉग का नाम ‘बातूनी Warrior’ अर्थात ‘बातों का योद्धा’, ‘बतकहीबाज’ ‘बड़ीबोल’ यह तीनों नाम मेरे ‘बालसखा’ के चरित्र चित्रण को ध्यान में रखकर के ही किया गया है, इस नाते कि मैं ‘दोस्त’ की बात नहीं काट पाता।

    नोट-मेरे साथी का नाम मुझसे कोई नहीं पूछेगा। नहीं तो बात बिगड़ जाएगी। मेरा यह 'सखा' कलम', 'हाथ-पैर' से कम जुबान से ज्यादा बात करता है। लिहाजा नाम खुलने पर जीना मुहाल कर देगा मेरा।
    मेरे ब्लॉग बातूनी Warrior से।
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