• #वक्त_की_बात… शिक्षण संस्थानों में विवाद व हिंसा, वजहें क्या हो सकती हैं!

    देश के कई बड़े और चर्चित विश्वविद्यालय बीते कुछ वर्षों से ग़ैरशिक्षण वजहों से समाचार की सुर्खियां बने हुए हैं। उन संस्थानों में शिक्षा का स्थान हिंसा व अन्य विवाद लेते जा रहै हैं। ऐसे शिक्षण संस्थानों में दिल्ली स्थित जेएनयू, अलीगढ़ का एएमयू और वाराणसी का बीएचयू प्रमुख हैं। जेएनयू में तत्कालीन छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार से जुड़ा विवाद और वहां परिसर में कथित देश विरोधी नारेबाजी पूरे देश में चर्चा का विषय बने रहे। जबकि बीते कुछ माह पूर्व अलीगढ़ के एएमयू में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर विवाद सतह पर रहा। जेएनयू और एएमयू से अलग बीएचयू में छात्र गुटों का आपसी टकराव व तत्कालीन उपकुलपति जीसी त्रिपाठी की जिद तनाव व विवाद कारण बना रहा।
    वक्त की बात मेरे साथ
    @SunilTripathi

    अभी कुछ दिनों पहले ही वहां मेस में खाना खाने के लिए बैठने के नाम पर हुए विवाद में तनाव बढ़ गया था। नतीजतन दो अलग-अलग छात्रावासों के छात्रों के बीच गुरिल्ला युद्ध वाली स्थिति बन गयी थी। बाद में प्रशासन ने बीएचयू परिसर को जब पुलिस छावनी बना दिया तब धीरे-धीरे स्थिति शांत हुई। हालांकि सब कुछ सामान्य है का दावा आज भी नहीं किया जा सकता। बीएचयू की घटनाएं वहां सक्रिय कुछ अदृश्य व ग़ैरछात्रों की भूमिका का संकेत देती रही हैं। तो भी स्थानीय स्तर पर घटनाओं को छुपाने व लीपापोती करने की प्रवृत्ति काम करती रही। अब पुनः जेएनयू में चुनाव के तुरंत बाद हुई हिंसा का कारण क्या हो सकता है, उसकी मूल व मुख्य वजह क्या है, जानना ज़रुरी हो गया है। महत्वपूर्ण यह है कि सरकार इस मामले में क्या सोचती और चाहती है। यहां गौरतलब है कि सरकार की सोच व उसकी चाहत का समस्याओं के समाधान से गहरा व गुणात्मक नाता होता है।

    जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनावों के बाद दो पक्षों में मारपीट हो गयी। आपस में भिड़े दोनों पक्षों, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और वाम संगठन के कई छात्रों को चोटें आयी हैं। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमला करने का अारोप लगाया है। मारपीट की घटना के बाद थाने पहुंचे जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्‍यक्ष एन साई बालाजी ने एबीवीपी के खिलाफ शिकायत किया है। पुलिस को कहा बताया कि एबीवीपी के छात्र लाठी-डंडों और बाउंसर्स के साथ पुलिस स्‍टेशन के बाहर हैं। उन्होंने एबीवीपी के सौरभ शर्मा पर खुद को खत्‍म करने की धमकी देने का आरोप लगाया है। कहा, अगर मैं बाहर जाता हूं तो मेरी जान के लिए खतरा है।

    वहीं दूसरी ओर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रतिनिधि सौरभ शर्मा का कहना है कि लेफ्ट के लोगों ने शनिवार को भी एबीवीपी के समर्थकों से मारपीट की थी। चुनाव जीतने के बाद इनका हौसला बढ़ गया है तो इन्‍होंने दल-बल के साथ सोमवार सुबह 3 से 5 बजे के बीच हॉस्‍टलों में घुसकर मारपीट की। उन्‍होंने छात्रों को धमकी दी है कि अब वे जीत गए हैं तो एबीवीपी को बाहर कर देंगे। विवाद के इस मामले में डीसीपी साउथ वेस्ट देवेंद्र आर्य ने प्रशासनिक लहजे का उपयोग करते हुए घटना के बाद की स्थिति को नियंत्रित बताया है। प्रशासनिक परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए सुरक्षा के कड़े एहतियाती उपाय किये जाने की जानकारी भी दिया है। उनके अनुसार रविवार-सोमवार की दरमियानी रात करीब 3 बजे जेएनयू छात्रों के बीच झड़प की सूचना पीसीआर को मिली। उन्होंने कहा कि मामले की सूचना मिलते ही उन्होंने विश्वविद्यालय प्रबंधन, छात्रों और प्रोफेसर्स से इस संबंध में चर्चा की। घटना की सूचना मिलने के बाद से ही पुलिस प्रशासन मुस्तैदी से अपना काम कर रहा है।

    यहां गौरतलब है कि छात्रसंघ चुनाव की वोटिंग के पहले से ही लेफ्ट अौर एबीवीपी के बीच तनातनी चल रही थी। प्रेसिडेंशियल डिबेट में लेफ्ट ने राइट विंग के उम्‍मीदवार को नहीं बोलने दिया था। वहीं राइट ने बाद में लेफ्ट के उम्‍मीदवार को बोलने नहीं दिया था। इस दौरान दोनों पक्षों में कई बार झडपें भी हुईं। वोटों की गिनती के दिन भी दोनों पक्ष कई बार एक दूसरे से भिड़े। तो क्या अब मान लिया जाय कि जेएनयू सहित अन्य शिक्षण संस्थानों में हुए विवाद और हिंसा की घटनाएं महज इत्तिफाक रहीं या फिर उनकी जड़ में कोई साजिश या राजनीतिक एजेंडा छुपा हुआ है। जांच और कार्रवाई सिर्फ हिंसक घटनाओं और विवाद केंद्रित होंगी या फिर इनके पीछे छिपे कारणों की भी तलाश की जाएगी। कोई पुलिस वाला तो यह तथ्य खोलेगा नहीं, कुछ बोलेगा नहीं। तो सरकार आप ही कुछ बोलिए, मुंह खोलिए!

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