Exclusive Varanasi एडिटोरियल 

दास्तान-ए-लाचारी : चोटिल तो यहां हर परिंदा है, फिर से उड़ सका वही जो जिंदा है

Dastan-e-Lachari: Injured is here every bird, could fly again only the one who is alive, Engineer Pradeep Lachari, who rides the animation movie, is doing wages under MNREGA

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Exclusive Lucknow Varanasi उत्तर प्रदेश 

@aajexpressdgtl #Exclusive : बात रह गई अधूरी, डिप्टी एसपी बनकर बनारस आने की आस नहीं हुई पूरी

aajexpressdgtl Exclusive: The matter remained incomplete, there was no hope of coming to Benaras as Deputy SP

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Exclusive एडिटोरियल बड़ी बोल 

Mother’s Day 2020 : कौन समझाए! मां को शुक्रिया कहने का कोई दिन नहीं होता बंधु, नहीं भी कहोगे तो वो खफा नहीं होंगी

Mother s Day 2020 Who should explain There is no day to say thank you to the mother, brothers, even if you say they will not be upset

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Exclusive Varanasi उत्तर प्रदेश 

#Covid_19 : आप को सुरक्षित रखने के लिए पुलिसवाले भूल गए हैं अपना मर्म, पुलिस टीम पर हमला होने के बाद पढ़िए लोगों ने क्या कहा

Covid 19 Policemen have forgotten their heart to keep you safe, read what people said after the attack on the police team

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बड़ी बोल 

#बतकहीबाज : हाल के साथ चाल पूछा, बताया गुटखे में Calcium है

व्यंग्य हां, आप वाजिब सोच रहे हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में गुटखा बैन कर दिया है। बावजूद इसके, गाढ़े-सकेते कहीं न कहीं गुटखा मिल ही जा रहा है। दरअसल, बनारस के गोलघर वाली अड़ी पर दो गुटखाबाज आपस में टकरा गए। बात निकली तो बहुत दूर तलक चली गई। हाल के साथ चाल पूछने से शुरू हुई औपचारिकता ‘गुटखा खाने के फायदे’ नामक रिसर्च को पूरी करने के बाद खत्म हुई। पता नहीं आपको मालूम है या…

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एडिटोरियल 

हमारी जिम्मेदारी खत्म नहीं होती

महाराष्ट्र में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 71 से बढ़कर 89 होने के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सभी शहरों में कर्फ्यू लगाने का ऐलान कर दिया है। भारत में महाराष्ट्र वो प्रदेश है जहां पर कोरोना वायरस का प्रभाव सबसे ज्यादा देखा जा रहा है।

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बड़ी बोल 

#बतकहीबाज : वह आज के दौर में अज्ञानी कहलाता है, नहीं?

व्यंग्य हमेशा की तरह इस दफा भी बात थोड़ी खर्री है। हो सकता है मेरे कई अपने खफा हो जाएं! विश्वास करिए, इस व्यंग्य का आप से कोई सरोकार नहीं है! याद होगा! अपने पिछले व्यंग्य की कड़ी में मैंने लिखा था ‘मिस्ड कॉल! भूत, भविष्य, वर्तमान तीनों काल दोनों भूल जाते थे’। स्पष्ट किया था, एक सज्जन मेरे परिचित हैं, उनको दोस्त नहीं कहूंगा, बस मेरे जानने वाले हैं। पढ़ा होगा आपने! इस दफा आपको अपना मित्र बता रहा हूं। मेरा मित्र होने का मतलब बुझा रहा है न?…

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