• #बतकहीबाज : Mathematics! लग रहा है किसी रक्षक ने भक्षक बनने की बात को दिल पर ले लिया

    Vinay Kumar Pandey

    व्यंग्य

    माजरा थोड़ा पुराना है। पुराना होने का मतलब इस तरह का पुराना नहीं कि लोगों के जेहन से Quiet कर जाए। अपने उत्तर प्रदेश का एक पड़ोसी राज्य ऐसा है जहां के लोग चारा खाते हैं और चूहे Wine गटक जाते हैं। जल गई होगी दिमाग की बत्ती? जी हां, बिल्कुल सही समझा आपने। बात पड़ोसी प्रांत वाले मामले की ही हो रही है। पड़ोसी राज्य के चूहे ऐसे हैं कि लीटर के हिसाब से Wine पीते हैं। याद होगा, वहां के चूहों ने लाखों लीटर Wine गले से नीचे उतार लिया था। इंसान चारा कैसे खाता है, इस मसले पर हम अगली कड़ी में बात करेंगे। आज नशा सम्राट चूहों के प्रकरण को मथते हैं।

    बात हजम नहीं हुई

    जिज्ञासु प्रजाति के लोगों के विषय में मैंने अपने व्यंग्य की कड़ी ‘लोलेबाजी! बातों के चरखे से सवालों का सूत काटने वाला एक अदद बंदा’ के जरिए बताने की कोशिश किया था कि इस तरह के लोगों का आईक्यू लेवल कितना हैवी होता है। कुछ दारूबाज भी जिज्ञासु बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं। लाखों लीटर शराब चूहों के गटकने ने की बात जिज्ञासु बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले दारूबाजों को हजम नहीं हुई। सूर्यास्त के बाद शुरू हुए दौर-ए-जाम के वक्त तीन जिज्ञासु दारूबाजों के बीच चूहों के Wine गटकने के मसले पर बतकहीबाजी शुरू हुई।

    रोज टुन्न हो जाते होंगे

    पहले वाले सुरा प्रेमी ने कहा इससे तो अच्छा होता है कि माल की रखवाली करने की जिम्मेदारी हम लोगों को दे दी गई होती। हम लोग खपाते भी तो इतना नहीं पीते। दूसरे वाले दारूबाज ने कहा कि लग रहा है किसी रक्षक ने भक्षक बनने की बात को दिल पर लेते हुए उसे अमल में ला दिया। तीसरा वाला दारूबाज थोड़ा सयाना था। उसने दोनों को समझाया, कहा Mathematics के हिसाबन चूहे पांच से सात मिलीलीटर दारू पीने के बाद रोज टुन्न हो जाते होंगे। नशा चढ़ने के बाद भले मानुष की तरह हट-बढ़ लेते होंगे। माल खत्म होने के बाद हो हल्ला होना लाजमी था। चूहों के Whiskey पीने के मसले की बात करते-करते भरी बोतल के साथ बातों का सिलसिला खत्म हुआ।

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