• #बतकहीबाज : रूटीन! कतार में लगा इंसान फुरसतिया होता है

    Vinay Kumar Pandey
    व्यंग्य

    कतार मतलब क्यू नाम की व्यवस्था इंसान को टेंशन देने के लिए बनाई गई है। ऐसा मेरा मानना नहीं, क्यू की कहर से व्याकुल मेरे जानने वाले एक सज्जन यह बात बताते हैं। उनका कहना है, कतार की मार झेल रहा इंसान वक्त बचाने के लिए न चाहते हुए भी लेडीज लाइन में लग कर किसी तरीके से अपना समय बचाता है। वह बताते हैं, धार्मिक स्थलों को देखिए। कितनी लंबी कतार लगी होती है? कॉमन पर्सन लाइन में लग कर धर्म-कर्म करता है। धनशाली, बलशाली और प्रभावशाली लोग कतार लगाने के पचड़े में नहीं फंसते। ये लोग विशेष टाइप के द्वार जिसको वीआईपी गेट कहते हैं से दर्शन-पूजन कर आराम से निकल जाते हैं। मतलब साफ है, इस टाइप के लोगों के पास वक्त नहीं होता, कतार में लगा इंसान फुरसतिया होता है।

    डायलॉग फर्जी

    बताया, एक फिल्म का डायलॉग हमेशा खटकता है, जहां से हम खड़े होते हैं वहीं से लाइन लगना शुरू होती है। उनका दावा था, ये डायलॉग बिल्कुले फर्जी है। इस डायलॉग में दम-दिलासा नहीं, स्क्रिप्ट लिखने वाले ने न जाने क्या सोचकर इस डायलॉग को लिख दिया था। कहा, सच इसके ठीक उलट है। हमारे रूटीन के काम में गड़बड़ी होना कतार की ही देन है।

    बचना नामुमकिन

    कहने लगे, लाइन में लगकर जांच-इलाज कराइए। रोजगार दफ्तर में बेरोजगारों की कतार, लोन लेने के लिए कतार, सिनेमा हॉल में टिकट के कतार, रेस्टोरंट में खाने के लिए कतार, ट्रेन की टिकट खरीदने में कतार, आरटीओ कार्यालय में कतार, पासपोर्ट दफ्तर में कतार, बैंक-पोस्टऑफिस में कतार, नौकरी के इंटरव्यू में कतार, लाइट, टेलीफोन बिल, बीमा ऑफिस में किश्त भरने में कतार, गैस सिलेंडर लेने के लिए कॉल करो, हर वक्त लाइन बिजी। कहा, कतार के कहर से बचना नामुमकिन लगता है। सही बात है क्या?

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