• #बतकहीबाज! पैन और आधार कार्ड दिखाने पर घर में इंट्री

    Vinay Kumar Pandey
    व्यंग्य

    भाइयों-बहनों बात दरअसल ऐसी है, ज्यादातर वही लोग फेसबुक पर पेज एडमिन बन कर क्रांति की ध्वजा पताका पहरा रहे हैं जो क्लासरूम में मुर्गा बना करते थे। कई पेजेस की पोस्ट्स तो ‘सुरेश-रमेश’ से भी मिलती-जुलती है। अरे भाई आप ‘सुरेश-रमेश’ को नहीं जानते? अपने फाइव स्टार वाले बंदे, याद आया? कई जानकर लोगों का ये भी मानना हैं, इन सभी पेजेस को मिलाकर एक किताब बना दिया जाए तो उसका नाम ‘केवल कॉपी-पेस्ट’ रखा जा सकता है।

    2020 तक सिर्फ अरविंद

    फेसबुक पर कई तरह के पेजेस बनते हैं। लेकिन, किंतु, परंतु जिस गति से पब्लिक फिगर वाले पेज बन रहे हैं उसे देखकर लगता है, 2020 तक सिर्फ अरविंद केजरीवाल ही देश में आम आदमी बचेंगे। इन लोगों को समझना चाहिए की अपना पब्लिक फिगर वाला पेज बनाना इतना बड़ा नैतिक अपराध नहीं हैं जितना की पब्लिक फिगर होते हुए भी (खुद को समझते हुए भी) दूसरो को पेज लाइक करने के लिए इनवाइट करना। अगर ऐसे लोग भी पब्लिक फिगर वाला पेज बनायें जिन्हें अपने घर में इंट्री पैन और आधार कार्ड दिखाने के बाद मिलती हो, उनके लिए आप क्या कहेंगे?

    भरोसा उठ जाता है

    अपने आपको पॉलिटिशियन मानने वाले भी इससे पीछे नहीं हैं। पॉलिटिशियन वाले पेजेस को देखकर लगता है, आजकल राजनेता बनने के लिए किसी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता लेना उतना जरूरी नहीं है जितना फेसबुक पर पॉलिटिशियन वाला पेज बनाना। …और तो सब तो ठीक हैं लेकिन, अगर वो लोग भी पॉलिटिशियन बन रहे हों जिनका खुद का नाम वोटिंग लिस्ट में न हो तो इंसानियत के साथ-साथ टेक्नोलॉजी पर से भी भरोसा उठ जाता है। क्यों, सही है?

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