• #बतकहीबाज : रिसर्च! हाल के साथ चाल पूछा, बताया गुटखे में कैल्शियम है

    Vinay Kumar Pandey
    व्यंग्य

    बनारस के गोलघर वाली अड़ी पर दो गुटखाबाज आपस में टकरा गए। बात निकली तो बहुत दूर तलक चली गई। हाल के साथ चाल पूछने से शुरू हुई औपचारिकता ‘गुटखा खाने के फायदे’ नामक रिसर्च को पूरी करने के बाद खत्म हुई। पता नहीं आपको मालूम है या नहीं, एक खराब लत से मैं भी परेशान हूं, वारदात स्थल पर तुरंत पहुंच जाने की आदत है, लिहाजा अड़ी पर भी तुरंते पहुंच गया। …और पहुंचने के बाद मुझे पता चला, ‘गुटखा खाने से होने वाले फायदे’ पर किस तरीके से शोध करते हैं।

    कदमों में रहेगी दुनिया

    रिसर्च कुछ इस तरह है, दो गुटखाबाज आपस में बात कर रहे थे। पहले ने गुटखा फाड़ कर मुंह में डालते हुए कहा केसर वाला गुटखा न बना होता तो मिडिल क्लास इंसान रोज केसर के स्वाद का मजा नहीं ले पाता। दूसरे बंदे ने बताया, आपको नहीं पता। एक गुटखा ऐसा है जिसे खाने के बाद दुनिया आपके कदमों में रहेगी। बात अलग है, उत्तराखंड स्थित चमोली की खाद्य सुरक्षा अदालत ने नवंबर 2017 के शुरुआती दिनों में इस गुटखे का प्रोडक्शन करने वाली कंपनी पर चार लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया था। अदालत का कहना था कि यह अनसेफ ब्रांड खाने लायक नहीं है।

    सुबह भर आप देखेंगे

    दूसरे बंदे ने पहले वाले को समझाया कि आपने देखा होगा, गुटखा खाने के बाद लोगों की शक्ल कैसी हो जाती है? बकबका रहे बंदे का दवा था, ऐसा इस वजह से होता है क्योंकि गुटखे में कैल्शियम (वह मैग्नीशियम कार्बोनेट बताना चाह रहे थे) होता है। मैग्नीशियम कार्बोनेट हृदय रोग, कैंसर सहित तमाम गंभीर बीमारियों का जनक है। खैर, उन्होंने कहा एक गिलास पानी लीजिए, उसमें वो जो है… अरे भाई दाढ़ी बनाने वाला ब्लेड डाल दीजिए और गुटखे को भी उसी में छोड़ दीजिए। ऐसा आपको रात में करना है। सुबह भर आप देखेंगे ब्लेड में जंग लग चुका होगा। जब्बर वाला ज्ञान देने के बाद उन्होंने भी गुटखे का पैकेट फाड़ा और कदमों में दुनिया करने के लिए गुटखा मुंह में दबाते हुए आगे बढ़ गए।

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