• भैरव अष्टमी : जो मन भाया, बाबा भैरवनाथ को भोग लगाया, प्रकाट्योत्सव पर काटा गया 651 किलो का केक

    वाराणसी। भैरव अष्टमी पर मंगलवार को बाबा के प्रकाट्योत्सव की धूम रही। शहर के सभी भैरव मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए भीड़ थी। विविध अनुष्ठान हुए। बाबा कालभैरव मंदिर में देर रात तक दर्शन के लिए कतार लगी थी। भक्तों ने मंगलयान डिजाइन का 651 किलो का केक काटा। बाबा के मूल विग्रह का दर्शन किया। उधर, बटुक भैरव मंदिर में भी भक्तों की भीड़ उमड़ी थी। कुछ भक्तों ने व्रत रखा। नकाश स्थित भूत भैरव मंदिर के साथ छोटी पियरी स्थित बाबा काल भैरव के मंदिर में भी देर रात तक पूजन अनुष्ठान चलता रहा। छोटी पियरी स्थित बाबा काल भैरव के मंदिर में बुधवार को भंडारे का आयोजन किया गया है। जूना अखाड़े के महंत राजेश्वरानंद सरस्वती ने बताया कि बुधवार को छोटी पियरी स्थित बाबा काल भैरव के मंदिर में भक्तों के बीच प्रसाद वितरण किया जाएगा।

    भोर से दर्शनार्थियों की लगी थी भीड़

    भगवान शिव के दूसरे स्वरूप भैरव की उत्पत्ति मार्गशीर्ष माह के अष्टमी तिथि को हुई थी। इस तिथि को भैरव अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। मंगलवार को कालभैरव मंदिर में भोर से ही दर्शन के लिए लाइन लगी रही। भोर में बाबा का 101 लीटर दूध से अभिषेक हुआ। सवा किलो सिंदूर से लेपन के बाद बाबा को सुनहरा वस्त्र धारण कराया गया। मंगला आरती के बाद दर्शन के लिए मंदिर का पट खोल दिया गया। दिनभर दर्शन-पूजन का क्रम चला। मंगलयान डिजाइन का 651 किलो का केट काटा गया। केक पंचमेवा व ब्रेड का बना था। भक्तों में वितरित किया गया। भंडारा में भी सैकड़ों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। रात में 12 बजे से 1:30 बजे तक बाबा के मूल विग्रह का भक्तों ने दर्शन किया। यह दर्शन वर्ष में भैरव अष्टमी तिथि को ही सुलभ होता है। इसके बाद रमेश उपाध्याय ने सवा लाख बत्तियों से महाआरती की।

    देर रात तक भक्तों ने किया दर्शन

    कमच्छा स्थित बटुक भैरव मंदिर में भी दर्शन के लिए लाइन लगी थी। सुबह से रात तक भक्तों ने दर्शन किया। सुबह मंगला आरती के बाद 11 बटुकों ने रुद्राभिषेक किया। इसके बाद विशेष स्नान कराकर बाबा का शृंगार हुआ। उनको ऊनी वस्त्र धारण कराया गया। दोपहर 108 बटुकों को भोजन कराने के बाद भंडारा हुआ। शाम को बाबा का रुद्राक्ष व अन्नकूट का शृंगार हुआ। हवन-पूजन के बाद रात में 1008 बत्तियों से महाआरती हुई। पंचमकार पूजन से पूर्णाहुति हुई।

    शृंगार कर बाबा का विधिवत पूजन

    कज्जाकपुरा स्थित श्रीलाट भैरव मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालु पहुंचे। शृंगार कर बाबा का विधिवत पूजन हुआ। बाबा दरबार में संकल्प के साथ अष्टभैरव प्रदक्षिणा यात्रा प्रारंभ हुई। भैरव भक्त नंगे पांव चल रहे थे। वह डमरु व शंखनाद के साथ हर हर महादेव व भैरव के जयकारे लगा रहे थे। यात्रा महामृत्यून्जय महादेव मन्दिर प्रांगण में स्थित श्री असितांग भैरव, त्रिलोचन घाट के श्री संहार भैरव, नक्खाश के श्री भीषण भैरव, बटुक भैरव मंदिर मे स्थित श्री उन्मत भैरव, कमच्छा मंदिर में श्री क्रोधन भैरव, दुर्गाकुण्ड स्थित दुर्गा मंदिर में श्री चण्ड भैरव, हनुमान घाट स्थित श्री रुरु भैरव में दर्शन पूजन के बाद प्रदक्षिणा यात्रा समाप्त हुई।

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