• परे भूमि नहि उठत उठाए, बल करि कृपा सिंधु उर लाए

    काशी के लक्खा मेलें में शुमार नाटी इमली का भरत मिलाप देखने को उमड़ा भक्तों का सैलाब
    
    काशी नरेश ने निभाई परंपरा, चारों भाइयों का मिलन देख छलक उठे आंसू

    वाराणसी। कण-कण भगवान शंकर की छवि निरखने वाली धर्ममना नगरी काशी बुधवार को त्रेता में पहुंचने का अहसास पाई। आस्था के भावों से सहज ही वह ठांव तब उभर आया, जब 14 वर्ष के वनवास बाद प्रभु श्रीराम अवध पहुंच भाई भरत को गले लगाए। विजया दशमी के दूसरे दिन नाटी इमली इलाके में गोधूलि बेला में सूर्यास्त के पहले होने वाला विश्व विख्यात ‘भरत मिलाप’ का मंचन बुधवार की शाम किया गया। 476 साल पुरानी परंपरा का निर्वहन हुआ।

    काशी के लक्खा मेलें में शुमार नाटी इमली का भरत मिलाप के पांच मिनट के इस लीला को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु लीला स्थल दोपहर से ही लीला स्थल पर पहुंच चुके थे। निर्धारित समयानुसार काशी नरेश अनंत नारायण सिंह भी शाम तक लीला स्थल पहुचे और जनता का अभिवादन स्वीकार किया। चारों भाइयों भाइयों का मिलाप होने के बाद काशी नरेश ने भगवान की परिक्रमा की। सोने की गिन्नी देकर प्रसाद ग्रहण किया।

    एक झलक पाने को बेताब काशीवासी

    मर्यादा का पाठ पढ़ाने वाली पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की लीला में अवध-चित्रकूट की सीमा का मान पाकर नाटी इमली का मैदान निहाल हो उठा। श्रीराम भक्तों से नाटी इमली का कोना-कोना, छत-बरामदों से लगायत हर स्थान ठंसा-ठस भर गया था। बुजुर्ग, युवा या बालमन सभी ने पलकों में प्रभु की मूरत बसाए, लीला मंच पर नजरें गड़ाए एक झलक पा लेने का दूसरे पहर से ही जतन में लगे थे।

    हनुमान ने दिया खबर

    हनुमान से भाई के आगमन की खबर खबर और संदेश पाकर अयोध्या (बड़ा गणेश) से नंगे पांव दौड़ते चले आए भरत-शत्रुघ्न प्रभु चरणों में साष्टांग दंडवत किया। गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई ‘परे भूमि नहि उठत उठाए, बल करि कृपा सिंधु उर लाए। श्यामल गात रोम भये ठाढ़े, नव राजीवनयन जल बाढ़े’ गूंज के बीच प्रभु श्रीराम श्रीभरत को उठा कर गले से लगाए। चारों भाई बारी-बारी से गले मिलें। हर हर महादेव और भगवान राम की जयकार से मैदान गूंज उठा। घूम-घूम कर चारों भाईयों भक्तों को दर्शन दिया।

    विमान को कंधे से लगाये यादव कुमार अघाए

    लक्खा मेला के नाम से देश दुनिया में विख्यात श्रीराम-भरत मिलाप की झांकी दर्शन के लिए दोपहर से ही हर राह नाटी इमली की ओर मुड़ी और लीला मैदान से जा जुड़ी। मिलन झांकी के बाद पुष्पक विमान पर सवार चारों भाई, माता सीता और पवनसुत अवध के लिए रवाना हुए। विमान को कंधे से लगाए यादव कुमार अघाए तो निहाल हो गए। बड़ागणेश लीला स्थल पर देर रात तक लोग प्रभु दरबार की झांकी का दर्शन करते रहेंगे।

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