• नारी सशक्तिकरण : रोटी बनाने वाले हाथों में बंदूक, रौशन हो रहा बनारस का नाम

    10 मीटर एयर पिस्टल चलाती हैं सुप्रिया
    
    सटीक निशाना लगाकर नेशनल के लिए कर चुकी हैं क्वालीफाई
    
    तीन साल से सक्रिय तौर पर निशानेबाजी का कर रही हैं अभ्यास

    वाराणसी। उगाओ चांद सब्र से, सूरज लपक लो अब्र से, उठो उठाओ ताज को, संभालो राज काज को। नारी सशक्तिकरण को समर्पित ये चार लाइन शहर की एक गृहणी पर सटीक बैठती है। इस गृहणी ने वो कर दिखाया है जिसके लिए शायद ही कोई गृहणी कभी विचार कर सकती है। बनारस कि इस गृहणी ने अपने पति और घर वालों के साथ ही साथ शहर का नाम भी रौशन किया है। दरअसल महिलाओं के शूटिंग की न्यूज पढ़कर काशी की बेटी और काशी की ही बहू जब रायफल क्लब स्थित शूटिंग रेंज पहुंची तो उनके सपने पंख लगाकर उड़ना शुरू हो गये थे। इसी बीच पढ़ाई और उनके शादी की वजह से वो शूटींग रेंज से दूर हो गयीं। फिर एक मां बनने के बाद उनका सपना कहीं दिल में दब गया पर शूटर पति से जब उसने अपने दिल की बात बताई तो उन्होंने उनका पूरा साथ दिया। आज काशी कि बेटी उस मुकाम पर हैं जहां पहुंचना सबका सपना होता है। शहर के घौसाबाद इलाके की बहू और हुकुलगंज की बेटी सुप्रिया सिंह ने हाल ही में देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित नॉर्थ जोन प्रतियोगिता में सटीक निशाना लगाकर नेशनल के लिए क्वालीफाई कर अपना और काशी का मान बढाया है। सुप्रिया ने बताया कि आठ साल पहले घर में यूहीं अखबार में पढ़ा था निशानेबाज लड़कियों के बारे में। अपने अंदर भी इच्छा जागी और फिर जिले के शूटिंग रेंज पर पहुंच गयी। सुप्रिया 10 मीटर एयर पिस्टल चलाती हैं। तकरीबन तीन साल से सक्रिय तौर पर निशानेबाजी का अभ्यास कर रही हैं।

    पति ने घर में बनवाया शूटिंग रेंज

    सुप्रिया ने बताया कि उस वक्त मैं हाईस्कूल में थी।  हाईस्कूल से इंटर तक मैं बराबर राईफल क्लब जाकर अभ्यास करती रही। स्नातक की पढ़ाई के लिए मैंने काशी हिंदू विश्वविध्यालय में एडमिशन लिया। मैथ से बीएससी करने लगी। जिसकी वजह से मुझे शूटिंग रेंज जाने का वक्त नहीं मिला। मेरी प्रैक्टिस खत्म हो गयी। मैं पूरी अरह से पढ़ाई में लग गयी। बताया, घर के कामकाज और बच्चे की जिम्मेदारी के चलते शूटिंग रेंज पर जाकर प्रैक्टिस करने का समय नहीं मिलता था तो घर के ऊपर के हिस्से में पति ने प्रैक्टिस करने के लिए शूटिंग रेंज तैयार किया। जहां वे घर के सभी कामकाज निबटाने के बाद प्रैक्टिस में लग जाती हैं। सुप्रिया का कहना है कि मेरे पति ने मेरे अंदर के शूटर को वापस से शूटिंग रेंज पहुंचाया है। सुप्रिया ने बताया कि हमारी बच्ची अभी छोटी है इसलिए मैं शूटिंग के बारे में सोच नहीं सकती थी लेकिन मेरे पति को जब मेरी इच्छा का पता चला तो उन्होंने मेरे लिए घर के अंदर ही शूटिंग रेंज का निर्माण करवा दिया।  जिसपर मैंने शूटिंग का अभ्यास उनकी ही देख-रेख में शुरू किया।

    भूपेंद्र सिंह खुद हैं नेशनल लेवल के शूटर

    सुप्रिया के निशानेबाज पति भूपेंद्र सिंह ने बताया कि मैं खुद एक नेशनल लेवल का निशानेबाज हूं। इसलिए अपनी पत्नी की प्रतिभा को देखते हुए उनके प्रैक्टिस के लिए छत पर रेंज बनवाया और पारिवारिक सपोर्ट के साथ उन्हें निशानेबाजी के खेल में साथ दे रहा हूं। आज सुप्रिया ने अपनी कड़ी मेहनत से पूरे घर का और खासकर के मेरा सम्मान बढ़ाया है। हम सब को इनपर नाज है।सुप्रिया के ससुर मकसूदन प्रताप सिंह ने बताया कि सुप्रिया हमारी बहू नहीं बेटी है। हमारे परिवार में बहू को बेटी का दर्जा है। बहार के लोग क्या कहते हैं और क्या बोलते हैं इस बात से फर्क नहीं पड़ता है। हमारे घर में सिर्फ बेटे थे। बहुओं ने आकर बेटी की कमी पूरी की। सुप्रिया ने जब शूटीं की इच्छा जताई तो हमने सहर्ष स्वीकार करते हुए उन्हें अनुमति दी। आज हमें उनकी सफलता पर गर्व है।

    इच्छाशक्ति से हर चुनौती पर विजय

    बनारस में महिला खिलाड़ियों की संख्या पहले ही कम है। शादी के बाद तो महिलाएं पूरी तरह से घर-गृहस्थी में रम जाती हैं। ऐसे में सुप्रिया की कड़ी मेहनत और नेशनल के लिए क्वालीफाई करना दूसरी महिलाओं को न सिर्फ रास्ता दिखाया बल्कि यह संदेश दिया है कि इच्छाशक्ति से हर चुनौती पर विजय प्राप्त की जा सकती है। जनपद के निशानेबाज लंबे अर्से से जिला राइफल क्लब के रेंज को आधुनिक बनाने के लिए प्रशासन से मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर रेंज को आधुनिक बना दिया जाए तो यहां के कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज सामने आएंगे।

    Print Friendly, PDF & Email

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    error: Content is protected !!