• #EVM_रुदाली : अगर ऐसा हुआ तो सभी चुप, वरना उनके हार की जिम्मेदारी EVM और BJP के सेटिंग को जाएगी

    Vinay Maurya Sinner

    देश में हुए अंतिम चरण के चुनाव के बाद नतीजों को लेकर चिल्ल पों मची हुई है, किसको कितनी सीटें मिल रही है या कौन सी पार्टी सरकार बना रही है, तमाम टीवी चैनलों पर इस बात पर बहस हो रही है। एक्जिट पोल आने वाले चुनाव परिणाम को बीजेपी के पक्ष में दिखा रहे हैं।

    लिहाजा पांच साल केन्द्रीय सत्ता पर काबिज रही बीजेपी पर विपक्षी पार्टियों की उंगली उठने लगी। हालांकि यह नई बात नही है, क्योंकि देखा गया है जब कोई पार्टी हारती है तो वह सत्ता पर काबिज रही पार्टी पर चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाती रही है, मगर जब से चुनाव में ईवीएम का प्रयोग होने लगा तब से यह चलन हो चुका है कि अपने हार का ठीकरा ईवीएम के सिर पर फोड़ते हुए विपक्ष सरकार पर सेटिंग हैंकिंग का आरोप लगाती रही।

    अभी अंतिम चरण का मतदान खत्म होते ही, ईवीएम स्ट्रांगरूम में रखे जाने लगे, इसके बाद अचानक से चंदौली, गाजीपुर सहित कई जगहों पर ईवीएम बदलने का हल्ला सुनाई देने लगा, सपा-बसपा गठबंधन के नेता बीजेपी पर यह आरोप लगाने लगे कि ईवीएम बदली जा रही है, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह ईवीएम रिजर्व ईवीएम था जो कार्यरत ईवीएम के खराब होने पर बदला जाना था। मगर प्रशासन के इस बात से विपक्षी दलों के नेता संतुष्ट नहीं दिखे, लिहाजा वहीं रखवाली के लिए बैठ गए। आश्चर्य इस बात का है कि अब तक बीजेपी पर ईवीएम हैंकिंग की आशंका जाहिर कर रहे लोग ईवीएम स्वेपिंग का आरोप लगाने लगे, ट जाहिर सी बात है, जो हैकिंग कर सकता है वो स्वेपिंग क्यों करेगा, यानी यह आरोप बेबुनियाद ही प्रतीत होता है। दूसरी बात की अगर ईवीएम से भरे वाहन जो प्रशासन रिजर्व ईवीएम बता रहा है, के मसले पर विपक्षी दलों के नेताओं को चाहिए कि पकड़े गए ईवीएम की जांच के लिए प्रशासन और चुनाव आयोग से अड़ जाना चाहिए था कि इस ईवीएम में वोट तो नहीं फीड करके आया है, जांच से स्पष्ट भी हो जाता और निष्पक्षता पर संदेह भी खत्म हो जाता, मगर विपक्षी दल के नेता ऐसा कियें नहीं, क्योंकि अगर वो जांच पर अड़ जाते तो, कल काउंटिंग के बाद आरोप लगाने को कुछ बचता नहीं, क्योंकि एक्जिट पोल की वजह से उनकी जान सांसत में है, अभी कह देंगे तो कल क्या परिणाम आ जाये, इसलिए कल तक के लिए चुप हैं, अगर 2007 विधानसभा चुनाव की तरह परिणाम आया तो बहिन जी चुप,2012 विधानसभा जैसा या गोरखपुर, फूलपुर उपचुनाव की तरह परिणाम आया तो अखिलेश चुप, 2015 दिल्ली विधानसभा की तरह परिणाम आया तो अरविंद केजरीवाल चुप, और छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश व राजस्थान विधानसभा चुनाव की तरह परिणाम आया तो राहुल गांधी चुप, वरना उनके हार का जिम्मेदारी ईवीएम और बीजेपी के सेटिंग को जाएगी।

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