एडिटोरियल 

Guest column : यह जो समय है, चला जाएगा घबराएं नहीं

यह जो समय है, कहते हैं चला जाएगा घबराएँ नहीं,
जीवन चक्र है यह बदलता है, बदल ही जाएगा।
इस बीच क्या से क्या तक हो जाएगा यह तो समय ही बताएगा।

धन दौलत, शान-ओ-शौकत घर, गाड़ी, ऐश-ओ-आराम की चाहत में नींद, चैन, सुकून, सब खोए जा रहें हैं,

स्वार्थ सिद्ध करने की कोशिशों में कुदरती नियमों को नित नव चुनौती दिए जा रहे हैं,

फिर क्या हम, समय से भी आगे हुऐ जा रहे हैं पर कभी समय भी तो अपना चक्र चलाएगा, फिर क्या से क्या तक हो जाएगा, यह तो समय ही बताएगा।

एकदम से ठहर सी गई है जिंदगी जो जहाँ थे वहीं रहने को हो गए मजबूर कोइ इनमें किसी का भाई है, कोई रिश्तेदार किसी का तो कोई है देश का जुझारू मजदूर,

समय के पहिये ने चलना क्या बंद कर दिया एक पल में कर दिया अपनों को अपनों से ही दूर, पर कब तक संग्राम यह चलता जाएगा,

माना समय कठिन है पर, दृढ़ निश्चय न डिगा पाएगा, क्या से क्या तक हो जाएगा, यह तो समय ही बताएगा।

सुना है देश के योद्धाओं ने है मन में ये ठानी समय को अब ना करने देंगे उसकी मनमानी,

खाकी में हो, या फिर सफेद पोशाक में है हर रूप में मौजूद मानवता के प्रहरी कुछ भी कर गुजरने के मंत्र को ध्याने एकजुट एकमत हैं,

जन-जन, ग्रामीण और शहरी कोई वार खाली अब न जाएगा, क्या से क्या तक हो जाएगा यह तो समय ही बताएगा।

त्रासदी है विकट घिर के आई न देखे हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई न परखे अमीर गरीब में अंतर कोई है, समय की यह छाया कैसी छाई माया माया न रही,

जान पर अब बन आई इंसानियत के दुश्मनों का देखे अब क्या से क्या तक हो जाएगा यह तो समय ही बताएगा।

ये भूमि है संतों विद्वानों की, वीरों की विरांगनाओं की यहाँ विचारक,

चिकित्सक, चिंतक भी अनेक हुए जिन्होंने अगणित बार यह साधा है,

कैसी भी परिस्थितियां क्यो न हो, साथ लिए संकट मोचन बनकर सबको उभारा है,

इतिहास गवाह है इन सब कारनामों का जिसने अकेले ही दुर्गम पर्वत को चीर डाला है,

बढे हाथ अब अब एक का नहीं, है करोड़ों मांझी का।निश्चय अब और भी दृढ़ हो चला है,

हम भारतवीरों का क्या से क्या तक हो जाएगा ये समय को, समय से पहले बता दिया जाएगा।

लेखक:- विकास कुमार, सहायक कमांडेंट, 95 बटालियन केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल

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