• खास योग में मनाई गई नागपंचमी, कहीं दंगल तो कहीं हुआ महुअर, अखाड़े में पहलवानों ने की जोर आजमाइश

    वाराणसी। सनातन धर्म के अद्भुत परंपराओं वाले देश भारत वर्ष में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को नाग पूजन का विधान है। इस पर्व को नाग पंचमी कहते हैं। इस बार नाग पंचमी सोमवार को मनाई गई। पंचमी तिथि चार अगस्त को रात 11.02 बजे लग गई थी जो पांच अगस्त को रात 8.40 बजे तक रहेगी। ज्योतिषाचार्य पंडित लोकनाथ शास्त्री ने बताया कि इस बार की नाग पंचमी सोमवार व सिद्धयोग में मनाई जा रही है जो बेहद खास है। ऐसा योग वर्षों के बाद देखने को मिलता है। आज से 20 साल पहले लोगों ने सावन में सोमवार के दिन नागपंचमी मनाया था।

    अखाड़ों में पहलवान भिड़े

    बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में शेषावतार महर्षि पतंजलि ने कभी अपने गुरु महर्षि पाणिनी के व्याकरण अष्टाध्यायी पर महाभाष्य रचा था। योग सूत्र की रचना उन्होंने कभी इसी नगरी में की थी, वहां नाग पंचमी पर सोमवार को हर साल की तरह मेला भी लगा और शास्त्रार्थ की परंपरा भी जीवंत हुई। अखाड़ों में पहलवान भिड़े। कहीं शारीरिक सौष्ठव का प्रदर्शन करने के लिए दंगल हुआ तो कहीं महुअर का खेल। कहा जाता है कि ‘योगसूत्र’ के रचनाकार महर्षि पतंजलि ने कभी जैतपुरा मोहल्ले में नागकूप पर श्रावण कृष्ण पंचमी को ही अपने गुरु महर्षि पाणिनी के ‘अष्टाध्यायी’ ग्रंथ पर महाभाष्य पूरा किया था। तभी से उस स्थान पर मेला लगता आ रहा है।

    विधि-विधान से पूजन

    महर्षि पाणिनी के व्याकरण अष्टाध्यायी के महाभाष्य के साथ ही योगसूत्र की रचना करने वाले महर्षि पतंजलि की नगरी काशी में सोमवार को नाग देवता की सविधि पूजा की गई। लावा-दूध का भोग लगाया गया। शेषावतार के रूप में काशी में तपस्या करने वाले महर्षि पतंजलि की तपस्थली नागकूप पर मेला भी गुलजार हुआ और शास्त्रार्थ भी हुआ। मेले में बच्चों ने झूले-चर्खियों पर जमकर मस्ती की। घरों में भी लोगों ने विधि-विधान से नाग देवता की पूजा की।

    नागेश्वर महादेव दर्शन को लगी लोगों की भीड़

    नागकूप स्थित नागेश्वर महादेव की मंगला आरती के बाद भोर में चार बजे आम भक्तों के लिए पट खोल दिए गए। इसी के साथ नागेश्वर महादेव के दरबार में लावा-दूध चढ़ाने के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े। पूजा के बाद रुद्राभिषेक किया गया। दर्शन और अभिषेक के लिए भक्तों की लंबी कतार लगी रही। पुजारी ने बताया कि सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र को कभी सर्प ने इसी नागकूप पर ही डंसा था। नाग पंचमी पर नागकूप के दर्शन से काल सर्प दोष का निवारण हो जाता है।

    लगा लावा-दूध का भोग

    नागकूप में छलांग लगाने की भी श्रद्धालुओं में होड़ मची रही। उधर, कूप के पीछे मेला गुलजार रहा। झूले-चर्खियों पर तो बच्चों, महिलाओं ने आनंद लिया ही। तरह-तरह के खिलौने, गुब्बारे और नाग देवता के चित्रों की भी दुकानें सजी रहीं। इसके अलावा नागेश्वर महादेव के अन्य मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने दिन भर लावा-दूध का भोग अर्पित किया।

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