• #Politics : असंभव है EVM से धांधली, हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता ने इस बेस पर किया दावा

    Ajit Mishra

    सौरव तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता इलाहाबाद हाईकोर्ट।

    करीब दो दशक पूर्व ईवीएम से चुनाव कराने के पहले तक मतपत्रों (बैलट पेपर) से चुनाव कराने की परंपरा थी। इस दौरान चुनाव प्रक्रिया में काफी लंबा वक्त लगता था। कहीं-कहीं बैलट पेपर लूटने और जबरन वोटिंग कराने की खबर मिलती रहती थी। चुनावों में बड़े पैमाने पर हिंसा, आगजनी की शिकायतें मिलती थीं। ऐसे में ईवीएम से चुनाव सम्पन्न कराने की प्रक्रिया किसी वरदान से कम नहीं थी। कांग्रेस पार्टी की तत्कालीन केंद्र सरकार ने सभी राजनीतिक पार्टियों के सहयोग से इसे लागू किया।इसकी सफलता ने सबको अविभूत किया। इससे बड़े पैमाने पर हर चुनाव में समय व पैसों की बर्बादी और हिंसा पर बहुत हद तक रोक लग गयी।

    कमियां छुपाने के लिए ऐसा आरोप

    लेकिन 2014 में एक पार्टी की सफलता के बाद से कुछ राजनीतिक पार्टियां ईवीएम पर सवालिया निशान लगा रही हैं। कुछ राजनीतिक दल चाहते हैं कि ईवीएम से चुनाव कराने को बंद कर दुबारा पहले की तरह बैलेट पेपर से ही चुनाव प्रक्रिया सम्पन्न करायी जाय, लेकिन इतने बड़े जनसंख्या वाले देश मे यह अब सम्भव नहीं लगता।हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार ईवीएम में धांधली नहीं के बराबर है। आरोप लगाने वाले लोग अपनी कमियां छुपाने के लिए भी ऐसा आरोप लगा सकते हैं।

    EVM Tempering की अफवाह का सच

    इस बारे में इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सौरव तिवारी कहते हैं कि कुछ लोग अभी से चुनाव परिणाम की प्रतीक्षा किये बगैर EVM Tempering की अफवाह फैला रहे हैं। हालांकि तकनीकी विशेषताओं से लैस EVM पर उंगली उठानें का हमें नैतिक अधिकार बिल्कुल नहीं है। इसके कई प्रमुख कारण गिनाते हुए तिवारी कहते हैं कि पहला कारण वोटिंग के पहले पोलिंग ऐजेंटो के समक्ष 50 माक पोल होंना है। दूसरा, हर मतदान के बाद VVPAT पर्ची निकलती है, फिर भी अगर VVPAT पर्ची पर वोट वेरिफाई नहीं होता तो ऐफिडेविट भरवा के दोबारा मतदान का मौका पीठासीन पदाधिकारी व पोलिंग ऐजेंटो के समक्ष मिलता है। इसके बावजूद अगर वोटर का दावा सही मिला तो EVM को बदला जा सकता है।

    उम्मीद धराशायी हो जाती है

    इसके अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता तिवारी बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार प्रत्येक लोकसभा में मौजूद हर विधानसभा के पांच Random रुप से चुनें हुए बुथ के मतदान व VVPAT पर्ची का मिलान करवाना है, तो फिर India स्तर पर EVM में हेर-फेर संभव हीं नहीं है। सरकारी कर्मचारी तथा पदाधिकारी हर जाति व वर्ग के होते हैं। मतगणना के वक्त से लेकर स्ट्रांग रुम तक मौजूद सभी रहते हैं। इसके बाद तो संशय की उम्मीद धराशायी हो जाती है।

    तबतक कयासों और आरोपों का दौर चलता रहेगा

    जानकारी हो कि अभी 19 तारीख को लोकसभा का चुनाव सम्पन्न हुआ है, इसके बाद हुए एक्जिट पोल में वर्तमान सरकार की पार्टी को बहुमत की संभावना बतायी जा रही है। लेकिन सम्भावित चुनाव परिणामों को स्वीकार करने के बजाय विपक्षी पार्टियां ईवीएम पर ही सवाल उठा रही हैं। अंतिम चुनाव परिणाम 23 मई को होने वाले मतगणना में तय होंगे, तबतक कयासों और आरोपों का दौर चलता रहेगा।

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