• शक्ति रूपेण संस्थिता : अर्जुन अवॉर्डी प्रशांति की मेहनत से मंजिल ने मान ली पनाह

    राष्ट्रपति ने किया है सम्मानित
    
    अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने के साथ 22 मेडल राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रशांति ने किया है अर्जित
    
    सिंह सिस्टर्स के नाम से मशहूर पांचो बहनें हैं बास्केटबॉल प्लेयर

    Ankit Mishra

    वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र के शिवपुर स्थित परमहंस कॉलोनी की रहने वाली सिंह सिस्टर्स को आज किसी पहचान की जरूरत नहीं है। सिंह सिस्टर्स घराने की पांच बहने क्रमश: प्रियंका, दिव्या, प्रशांति, प्रतिमा और आकांक्षा बास्केटबॉल प्लेयर हैं। उन्होंने बास्केटबॉल में कई उपलब्धियां हासिल की हैं। पांचों में बहनों में तीसरी नंबर की प्रशांति सिंह को खेल जगत में अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। प्रशां‍त‍ि यूपी की पहली और इंडि‍या की तीसरी अर्जुन अववॉर्डी बनी हैं। इनके पहले ये अवॉर्ड 1991 में एस. शर्मा और 2004 में गीतू आना जोश को मिला था।

    इस तरह शुरू हुआ सक्सेस का सफर

    प्रशांति ने अपने सफलता का जिक्र करते हुए बताया कि यूपी कालेज में 7वीं क्लास में थी, तब बड़ी बहनों को खेलता देख बड़ी बहन प्रियंका की ऊंगली पकड़ कर ग्राउंड में गई। बताया, हमने बनारस में उस वक्त बास्केटबाल सीखा जब यहां लड़कियों को खेल में उत्साहित करने वाले कम थे। 1997-98 में हम बहनों ने यूपी कालेज में अभ्यास शुरू किया। उस समय यहां भारतीय खेल प्राधिकरण के कोच अमरजीत सिंह ने हमें बहुत प्रमोट किया।

    हमें देख अन्य लड़किया भी पहुंचने लगीं कोर्ट

    प्रशांति ने बताया की हम बहनों- दिव्या, आकांक्षा व प्रतिमा की देखा-देखी शिवपुर और आसपास की लड़कियां भी कोर्ट पर पहुंचने लगीं। इसी बीच दिव्या ने मिनी नेशनल में यूपी का प्रतिनिधित्व किया। वह हम लोगों की रोल मॉडल बन गयीं। उसके बाद से तो हम लोगों ने अपना अभ्यास और बढ़ा दिया। सभी को नेशनल खेलने का जुनून सवार था। 1998 में मैं मिनी नेशनल खेली। उसके बाद भारत की जूनियर और फिर सीनियर टीम का प्रतिनिधित्व और फिर कप्तानी की।

    बचपन में कट गई थी जीभ 

    प्रशांति ने अपने बचपन का जिक्र करते हुए बताया कि एक बार सोते वक्त बेड से गिर गई और जीभ कट गई। पिता जी के घर आने से पहले मां और बहन के साथ हिम्मत के साथ हॉस्पिटल गई और बोली पापा को न पता चले, ठीक हो जाऊंगी। पिता जी के आने पहले दवाई करवाकर घर आ गई।

    प्रशांति का परिचय

    प्रशांति एकमात्र भारतीय महिला बास्केटबॉल खिलाड़ी है जिन्होंने दो एशियन गेम्स (2010 व 2014) एवं कॉमनवेल्थ गेम्स (2006), सात एशियन चैंपियनशिप खेली है। 2009 में एशियन इनडोर गेम्स में रजत और साउथ एशियन बीच गेम्स में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने वाराणसी से निकल कर 14 वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने के साथ 22 मेडल राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी अर्जित किए। 2016 में उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशांति को रानी लक्ष्मीबाई अवार्ड से सम्मानित किया। इसके बाद 2017 में इन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया।

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