#बतकहीबाज : वह आज के दौर में अज्ञानी कहलाता है, नहीं?

व्यंग्य हमेशा की तरह इस दफा भी बात थोड़ी खर्री है। हो सकता है मेरे कई अपने खफा हो जाएं! विश्वास करिए, इस व्यंग्य का आप से कोई सरोकार नहीं है! याद होगा! अपने पिछले व्यंग्य की कड़ी में मैंने लिखा था ‘मिस्ड कॉल! भूत, भविष्य, वर्तमान तीनों काल दोनों भूल जाते थे’। स्पष्ट किया था, एक सज्जन मेरे परिचित हैं, उनको दोस्त नहीं कहूंगा, बस मेरे जानने वाले हैं। पढ़ा होगा आपने! इस दफा आपको अपना मित्र बता रहा हूं। मेरा मित्र होने का मतलब बुझा रहा है न?…

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