धर्म-कर्म 

300 साल पहले शुरू हुई थी परंपरा, इस बार महंत परिवार की मौजूदगी में माता शीतला की होगी विराट महाआरती, कलाकार इस तरह से लगाएंगे हाजिरी

वाराणसी। काशी की बात मां शीतला के स्मरण के बिन अधूरी रहती है। चंद्राकार गंगा तट के किनारे मां शीतला के दर पर रोज आस्थावानों की भीड़ होती है। इस बार हालात जुदा इस वजह से हैं कि वैश्विक महामारी बन कर उभरे कोरोना के चलते लॉकडाउन लागू के बाद काशी के सभी देवालयों को बंद कर दिया गया है। दरअसल, हर साल चतुर्दशी पर होनी वाली मां शीतला की विराट महाआरती इस वर्ष केवल महंत परिवार के मौजूदगी में होगी।

सोमवार मध्य रात्रि होने वाली इस विराट आरती में इस साल कोरोना संक्रमण के चलते श्रद्धालु माता का दर्शन नहीं पा सकेंगे। मंदिर के महंत पंडित शिवप्रसाद पांडेय ने बताया कि इस महामारी से बचना बेहद जरूरी है। कहा, तीन सौ वर्ष से चली आ रही परंपरा के निर्वहन के लिए इस बार केवल महंत परिवार की मौजूद रहेगा। शीतला महोत्सव का कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है। बताया, आरती 101 दीपदान से और कपूर से होती है। दीप आरती में पांच किलो देशी घी, दो बण्डल बत्ती और 11 किलो कपूर का इस्तमाल होता है। दीपदान का वजन 26 किलो और कपूरदानी का वजन 27 किलो होता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष कलाकार ऑनलाइन वीडियो कॉलिंग व फेसबुक लाइव के माध्यम से माता के समक्ष अपनी हाजिरी लगाएंगे।

शुरुआत

इसकी शुरुआत पूर्व शीतला मंदिर के पुजारी स्व. प. देवीलाल महराज ने की थी। साल भर पर होने वाली इस विराट आरती की एक झलक पाने को भक्तों की भीड़ उमड़ती है। शुरू में आरती केवल 51 दीपो से होती थी मगर समय के साथ-साथ आरती का समग्री बढ़ती चली गयी।

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