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Top News : दुर्दांत विकास की तरह दुस्साहसी था बनारस का बदमाश रोहित सिंह सनी

श्रीप्रकाश शुक्ला के नक्शे कदम पर चल रहा था सनी

जुलाई 2015 में एसटीएफ ने कबीरचौरा जिला महिला अस्पताल परिसर में किया था ढेर

वाराणसी, जौनपुर, आजमगढ़, गाजीपुर, चंदौली, मिर्जापुर सहित बिहार तक फैला चुका था साम्राज्य

Special correspondent

Varanasi: बात 90 के दशक की है। यूपी में भाजपा की सत्ता थी। मुख्यमंत्री कल्याण सिंह थें, अपराध और अपराधियों का सत्ता के गलियारे में बैठे सफेद कालरवालों से गठजोड़ भी शुरु हो चुका था। फिर एक दिन पता चला कि उस वक्त सीएम रहे कल्याण सिंह को मारने के लिए माफिया श्रीप्रकाश शुक्ला ने छह करोड़ रुपये में सुपारी ली है। हर रोज श्रीप्रकाश के नाम सुर्खियों में रहने से पुलिस हैरान-परेशान रहती थी। उधर, डॉन श्रीप्रकाश के द्वारा मुख्यमंत्री की सुपारी लेने की बात जब सत्ता के गलियारे में फैली तो सबके हाथ-पैर फूल गए। 4 मई 1998 को यूपी पुलिस के तत्कालीन एडीजी अजयराज शर्मा ने राज्य पुलिस के बेहतरीन 50 जवानों को छांटकर स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) का गठन किया। फोर्स का पहला टास्क था श्रीप्रकाश शुक्ला जिंदा या मुर्दा। और अंततः यूपी एसटीएफ ने अपने गठन से 5 माह बाद श्रीप्रकाश शुक्ला को गाजियाबाद में हुए मुठभेड़ में ढेर कर दिया। 4 मई 1998 के बाद से एसटीएफ का अलग रुतबा जो बना वो अबतक उत्तर प्रदेश पुलिस में कायम है। यह भी कहा जा सकता है कि जब मामला थाने की पुलिस से नहीं संभलता है तो एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) सब ठीक करने आती है। बात 90 के दशक के सबसे बड़े डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला की हो या फिर कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या करने वाले विकास दुबे की, यूपी एसटीएफ अपने टारगेट को पूरा करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ती। उज्जैन के महाकाल मंदिर से गिरफ्तार पांच लाख रुपये के इनामी विकास दुबे को भी एसटीएफ ने कानपुर नगर भौंती के पास शुक्रवार की सुबह मार गिराया।

भाग रहा था विकास

डिप्टी एसपी सहित आठ पुलिसकर्मियों की हत्या तरने वाले विकास दुबे को उज्जैन, मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा 9 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस व यूपी एसटीएफ टीम विकास को लेकर दस जुलाई की सुबह कानपुर लौट रही थी। कानपुर नगर भौंती के पास पुलिस कार दुर्घटना ग्रस्त होकर पलट गई। कार पलटने के बाद विकास पुलिसकर्मी की पिस्टल छीन कर भागने लगा। एसटीएफ की टीम ने उसका पीछा किया और विकास को आत्मसमर्पण करने लिए कहा, लेकिन आठ पुलिसकर्मियों की हत्या करने वाला विकास फायरिंग करने लगा। जवाबी कार्रवाई करते हुए एसटीएफ की टीम ने विकास दुबे को मुठभेड़ में ढेर कर दिया। विकास के मुठभेड़ के बाद से उत्तर प्रदेश की राजनीत गरमा गई है। सपा मुखिया व यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यीदव ने कहा है कि यदि विकास जिंदा रहता तो मौजूदा प्रदेश सरकार उसे संरक्षण देने के मामले में खुद कटघरे में खड़ी हो जाती। उधर, बसपा सुप्रिमो मायावती ने कहा है कि विकास दुबे के द्वारा आठ पुलिसकर्मियों की हत्या किए जाने से लेकर उसके मौत तक की जांच होनी चाहिए।

एसटीएफ का गठन

1998 में सत्ता के गलियारों से लेकर हर छोटे-बड़े माफिया के बीच एक ही नाम की चर्चा थी। वह नाम था डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला का। पढ़ने-लिखने वाला साधारण सा लड़का देखते ही देखते यूपी पुलिस का सिरदर्द बन गया। रंगदारी, किडनैपिंग, सुपारी किलिंग, डकैती और पूरब से लेकर पश्चिम तक रेलवे के ठेके पर श्रीप्रकाश का एकछत्र राज हो चुका था। जो भी श्रीप्रकाश शुक्ला के सामने आया उसे अपनी जान से हाथ धोना पड़ा चाहे वह पुलिसकर्मी रहा हो या फिर नेता। श्रीप्रकाश को खत्म करने के लिए ही यूपी एसटीएफ का गठन किया गया। यूपी एसटीएफ ने लखनऊ, गाजियाबाद, बिहार, कलकत्ता, जयपुर तक छानबीन कर श्रीप्रकाश शुक्ला की तस्वीर हासिल किया। इधर, एसटीएफ श्रीप्रकाश की खाक छान रही थी और उधर श्रीप्रकाश शुक्ला अपने कैरियर की सबसे बड़ी वारदात को अंजाम देने यूपी से निकल कर पटना पहुंच चुका था। स्पेशल टास्क फोर्स श्रीप्रकाश के मोबाइल नंबर को लगातार सर्विलांस पर लिए हुए थी। पता चला कि श्रीप्रकाश गाजियाबाद के इंदिरापुरम इलाके में स्थित पीसीओ से कॉल कर अपनी गर्ल फ्रेंड से बात कर रहा है। समय न बरबाद करते हुए यूपी एसटीएफ की टीम फौरन दिल्ली के लिए रवाना हुई। 23 सितंबर 1998 को एसटीएफ के प्रभारी अरुण कुमार ने अपनी टीम के साथ आतंक का पर्याय बन चुके श्रीप्रकाश को मुठभेड़ में ढेर कर दिया।

ढूंढ कर किया इनकाउंटर

श्रीप्रकाश शुक्ला के नक्शे कदम पर ही बनारस का एक नवयुवक रोहित सिंह उर्फ सनी चल दिया था। पढ़ाई में गोल्ड मेडलिस्ट सनी सिंह यूं तो सौखिया बदमाश बना था, लेकिन चंद दिनों में ही पढ़ाई छोड़ सनी सिंह पूर्वांचल में आतंक का पर्याय बन गया। कुख्यात रोहित सिंह उर्फ सनी महज 27 वर्ष की उम्र में वाराणसी, जौनपुर, आजमगढ़, गाजीपुर, चंदौली, मिर्जापुर सहित बिहार तक अपना साम्राज्य फैला चुका था। सनी के गैंग में कई शूटर थें। लूट, डकैती, रंगदारी, हत्या, जमीन कब्जा करना सनी गैंग का मुख्य पेशा था। जब पुलिस 50 हजार के इनामी सनी को पकड़ने में सफल नहीं हो पाई तब ये टास्क एसटीएफ को दिया गया। जुलाई 2015 की रात एसटीएफ ने कबीरचौरा स्थित जिला महिला अस्पताल के परिसर में मुठभेड़ मेें सनी को ढेर कर दिया। बदमाशों की फायरिंग में एसटीएफ के सिपाही आलोक राय भी जख्मी हुए थें। हालांकि मुठभेड़ में सनी के दो साथी मौके से भागने में सफल रहे। जबकि दो को एसटीएफ की टीम ने पकड़ लिया था।

शिक्षा माफियाओं पर भी नकेल

2018 में उत्तर प्रदेश पुलिस परीक्षा में नकल का भंडाफोड़ करते हुए एसटीएफ ने सॉल्वर गैंग के 22 सदस्यों और छात्रों को गिरफ्तार किया था। सभी सॉल्वर हरियाणा के थें और परीक्षार्थी पश्चिम उत्तर प्रदेश के रहने वाले थें। सॉल्वर गिरोह ने एक परीक्षार्थी से नकल के नाम पर चार से पांच लाख रुपये वसूला था। गिरफ्तार अभियुक्तों के पास से एसटीएफ की टीम ने 26 मोबाइल, 10 लाख रुपये, प्रिंटर, लैपटॉप और भारी मात्रा में छात्रों के दस्तावेज बरामद किया था। एसटीएफ ने इस मामले में गैंग के मास्टरमाइंड और यूपी पुलिस में कॉस्टेबल बागपत निवासी शकील को भी गिरफ्तार किया था। इसी तरह एसटीएफ ने टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) में नकल कराने के मामले का भी खुलासा करते हुए एक बड़े सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश किया था। प्रयागराज में एसटीएफ ने कार्रवाई करते हुए सॉल्वर गैंग से जुड़े सात सदस्यों को गिरफ्तार किया। 25 सरकारी स्कूलों में फर्जी तरीके से एक साथ नौकरी कर 13 महीने में एक करोड़ रुपए की कमाई करने वाली शिक्षिका अनामिका शुक्ला का मामला प्रकाश में आने के बाद यूूपी एसटीएम ने बड़ा खुलासा किया था। स्पेशल टास्क फोर्स की टीम ने 26 और ‘अनामिकाएं’ ढूंढ निकाला। जो अयोग्य होने के बाद भी फर्जी तरीके से डिग्री का इस्तेमाल कर भारी भरकम वेतन कमा रही थीं। एसटीएफ टीम यूपी में कई ऐसे भी शिक्षा माफियाओं को गिरफ्तार कर चुकी है जो सत्ता के गलियारे में अपनी ऊंची पैठ रखते हैं।

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