Varanasi धर्म-कर्म 

Vat savitri vrat : Corona पर भारी दिखी पति प्रेम की आस्था, सुहागिन महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत

पूजन करने के लिए सुहागिन महिलाओं का उमड़ा हुजूम

मास्क लगाकर व्रतियों ने किया पूजन

Varanasi : अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए वट सावित्री का व्रत हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या को रखा जाता है। जो इस बार आज यानी 22 मई को है। धार्मिक मान्यता अनुसार जो व्रती सच्चे मन से इस व्रत को करती हैं उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने के साथ उनके पति को लंबी आयु प्राप्त होती है। कई जगह इस व्रत को ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन रखा जाता है। इस व्रत के कुछ नियम हैं जिनका पालन करना काफी अहम माना गया है। प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित लोकनाथ त्रिपाठी ने बताया कि अमावस्या तिथि अमावस्या तिथि 22 मई को रात्रि 11.08 तक है। व्रती महिलाएं पूरे दिन पूजन कर सकती है।

शुक्रवार की सुबह धर्म की नगरी काशी में सुहागिन महिलाओं ने पति दीर्घायु के लिए बरगद के पेड़ के समीप जाकर पूजन किया। इलाके मे मंदिरों के बाहर सुबह से ही सुहगिनों की भीड़ दिख रही। वट वृक्ष के समीप इतनी भीड़ है कि शारीरिक दूरी समाप्त हो गया है। आज का दिन सुहगिनो के लिये विशेष दिन है। पति की लम्बी उम्र के लिये निर्जला व्रत रख कर सावित्री, सत्यवान, यमराज के साथ वट वृक्ष की पूजा कर रही है। इस दौरान महिलाओं में संक्रमण की चिंता नहीं देखी। व्रती महिलाओं ने मॉस्क लगाकर पूजन-अर्चन किया।

मीरघाट स्थित, काशीपुरा भुलेंटन के पास सहित अन्य वट वृक्षों के समीप सुहागिनों ने वट सावित्री का पूजन-अर्चन किया। वट साव‍ि‍त्री की पूजा के दौरान सुहागिन महिलाओं में कोरोना वायरस के संक्रमण का डर नहीं दिखा। इन महिलाओं ने पति के प्रेम में कोरोना के डर को भी मात दे दिया। वट सावित्री पूजा को लेकर शुक्रवार को सुबह-सुबह सुहागिन महिलाएं अपने घरों से निकलकर आसपास में लगे बरगद के पेड़ के नीचे पहुंच गए और विधि-विधान के साथ बेखौफ तरीके से वट सावित्री का पूजा-अर्चना कर पति के लंबी उम्र की मंगल कामना की। परिवार के सुख-समृद्ध के लिए प्रार्थना की।

महत्व

माना जाता है कि वटवृक्ष के नीचे सावित्री ने अपने पति व्रत की प्रभाव से मृत पड़े सत्यवान को पुनः जीवित किया था। तभी से इस व्रत को वट सावित्री नाम से ही जाना जाता है। इसमें वटवृक्ष की श्रद्धा भक्ति के साथ पूजा की जाती है।पुराणों में यह स्पष्ट किया गया है कि वट में ब्रह्मा, विष्णु व महेश तीनों का वास है। मान्यता अनुसार इस व्रत को करने से पति की अकाल मृत्यु टल जाती है। वट अर्थात बरगद का वृक्ष आपकी हर तरह की मन्नत को पूर्ण करने की क्षमता रखता है। पीपल और वट वृक्ष की परिक्रमा का विधान है। इनकी पूजा के भी कई कारण है। आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो वट वृक्ष दीर्घायु व अमरत्व के बोध के नाते भी स्वीकार किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि वट वृक्ष की पूजा लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य देने के साथ ही हर तरह के कलह और संताप मिटाने वाली होती है।

error: Content is protected !!