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Webinar : Lockdown में Depression के ज्यादा मरीज बढ़े, suicide की टेंनेंसी देखने को मिल रही- डॉ. राजेश भट्ट

Varanasi : वसंत महिला महाविद्यालय तथा भारतीय काउंसलिंग साइकोलॉजी एसोसिएशन के संयुक्त प्रयास से “Covid-19 काल में मानसिक स्वास्थ्य की प्रासंगिकता” विषय पर दो आयोजित राष्ट्रीय वेबीनार के दूसरे दिन शुक्रवार को डॉ आकांक्षी श्रीवास्तव ने वेबीनार के सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा इस राष्ट्रीय वेबीनार के संयोजक डॉ वेद प्रकाश रावत (असिस्टेंट प्रोफेसर, मनोविज्ञान विभाग) ने सभी प्रमुख वक्ताओं तथा प्रतिभागियों का सबसे परिचय कराया। इस राष्ट्रीय वेबीनार के द्वितीय दिन के प्रथम मुख्य वक्ता डॉ राजेश भट्ट (असिस्टेंट प्रोफेसर,मनोविज्ञान विभाग, गढ़वाल यूनिवर्सिटी, श्रीनगर) ने अपना वक्तव्य स्व हानि और आत्महत्या जैसे संवेदनशील विषय पर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि लाकडाउन ने मानव जीवन की मुसीबतों को बढ़ा दिया है इन दिनों डिप्रेशन के भी मरीज ज्यादा बढ़ गए हैं, और हालात यह हैं कि हर 10 मरीज में से 4 मरीजों में सुसाइड की टेंडेंसी देखने को मिल रही है और यह अत्यधिक चिंता का विषय है।

उन्होंने यह भी बताया की आत्महत्या करने वाले व्यक्ति पहले से ही कुछ विशेष संकेत देने लगते हैं। अतः हमें उन संकेतों को पहचानने की आवश्यकता है जिससे कि हम लोगों के जीवन को बचा सकें। इस समय विभिन्न देशों में लगभग 900 से अधिक आत्महत्या रोकथाम केंद्र खोले गए हैं और नए-नए केंद्र खोले भी जा रहे हैं। आत्महत्या का प्रयास करने वाले लोगों को मनोचिकित्सक से या परामर्शक से सलाह अवश्य लेनी चाहिए और यदि वे ऐसा नहीं करते है तो स्थिति बिगड़ने के बाद आत्महत्या भी कर लेते है। इस गंभीर समस्या से बचने के लिए परिवार के लोगों को इसे बहुत ही संवेदनशील होकर समझना चाहिए और जिस प्रकार शारीरिक स्वास्थ्य का इलाज करवाने के लिए डॉक्टर के पास जाते हैं इसके लिए भी विशेषज्ञों से संपर्क स्थापित करना चाहिए।ऐसा करने से वस्तुतः स्थिति पर काफी नियंत्रण किया जा सकता है। आजकल इसके लिए क्राइसिस इंटरवेंशन कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है।

अन्य वक्ताओं का वक्तव्य

दूसरे मुख्य वक्ता डॉ तुषार सिंह (असिस्टेंट प्रोफेसर, मनोविज्ञान विभाग, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय) ने अपना वक्तव्य कोरोना काल में मनोवैज्ञानिक प्राथमिक चिकित्सा जैसे विषय पर दिया जो वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और मानसिक स्वास्थ्य को उन्नत बनाने के लिए आने के लिए इसकी मुख्य भूमिका भी है। तीसरी प्रमुख वक्ता डॉ तूलिका सिंह (असिस्टेंट प्रोफेसर, मनोविज्ञान विभाग, रामदयालु सिंह कॉलेज मुजफ्फरपुर) ने अपना वक्तव्य कोरोना काल में समायोजन विषय पर दिया और स्पष्ट करते हुए कहा कि अभी वर्तमान समय संकट का समय है लेकिन हमें संकट से घबराना नहीं चाहिए। अपितु उसका मुकाबला करके उसके साथ समायोजन स्थापित करना चाहिए। ऐसा करने से हमारा मानसिक स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। इसके लिए उन्होंने विस्तारपूर्वक विभिन्न महत्वपूर्ण व्यवहारों को अपनी दिनचर्या में शामिल करने के लिए कहा। इस राष्ट्रीय वेबीनार के द्वितीय दिवस के दूसरे सत्र में विभिन्न शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र भी प्रस्तुत किए।

अत्यधिक ज्ञानवर्धक एवं रोचक जानकारी प्राप्त हुई

समापन सत्र के मुख्य अतिथि डॉ आशुतोष श्रीवास्तव (National President of Bharatiya Counselling Psychology Association, & Director-Psyuni Institute of Psychology & Allied sciences) ने ने अपना वक्तव्य कोरोना काल में मानसिक स्वास्थ्य को उन्नत बनाने की तकनीकी अथवा व्यपदे विषय पर दिया तथा सभी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा की इस राष्ट्रीय वेबीनार के लिए जिस विषय का चयन किया गया था उस विषय को विभिन्न विशेषज्ञों के द्वारा दिए गए वक्तव्य से अत्यधिक ज्ञानवर्धक एवं रोचक जानकारी हम सभी को प्राप्त हुई है। मैं आशा करता हूं की आने वाले समय में इस तरह के विषयों पर चर्चा होती रहनी चाहिए। जिससे कि मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जो आम लोगों की धारणा एवं भ्रांतियां हैं वह बदल सके। उन्होंने यह भी कहा कि आज तक HIV/AIDS की वैक्सीन नहीं बन पाई लेकिन हम सभी ने उससे उत्पन्न मनोवैज्ञानिक चुनौती को स्वीकार किया और सामान्य जीवन यापन करने लगे, ठीक उसी प्रकार कोरोना वायरस की वैक्सीन पर काम किया जा रहा है कब तक बनकर तैयार होगा कुछ तय नहीं है, तो हमें इस कोरोना वायरस की मनोवैज्ञानिक चुनौती को भी स्वीकार करना होगा और उसके साथ जुड़ी सावधानियों को ध्यान में रखकर अपना जीवन यापन कर रहा होगा। अंत में मैं एक बार फ़िर इस वेबीनार के संयोजक डॉ वेदप्रकाश रावत को धन्यवाद देना चाहूंगा, कि उन्होंने वर्तमान समय की प्रासंगिकता को देखते हुए ऐसे विषय को चुना और मानसिक स्वास्थ्य के लिए सब को जागरूक किया।

60 शोध प्राप्त हुआ

इस राष्ट्रीय वेबीनार में कुल 60 शोध पत्र प्राप्त हुए तथा लगभग 950 प्रतिभागियों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया। इस राष्ट्रीय वेबीनार में देश के प्रमुख राज्यों उड़ीसा, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, भोपाल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र दिल्ली, उत्तराखंड, बिहार, कोलकाता, झारखंड, गुजरात, राजस्थान एवं पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों के विभिन्न हिस्सों से अपनी प्रतिभागिता दर्ज कराई।, इस राष्ट्रीय वेबीनार को लगभग 6754 प्रतिभागियों ने फेसबुक तथा युटुब के माध्यम से देखा और अपनी उपस्थिति एवं प्रतिभागिता दर्ज कराई। इस राष्ट्रीय वेबीनार के द्वितीय दिन का संचालन आयोजन समिति सचिव डॉ आकांक्षी श्रीवास्तव ने किया तथा वेबीनार के सभी मुख्य वक्ताओं, अतिथियों का परिचय प्रतिभागियों से कराया एवं विभिन्न प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों को विशेषज्ञों तक पहुंचा कर उनके प्रश्नों का निराकरण करके उनकी जिज्ञासा को शांत भी किया।

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