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Webinar : गोपाल नायक ने ध्रुपद के पहले पद कि रचना की थी : डॉ. विशाल जैन

Varanasi : वसंत महिला महाविद्यालय के संगीत गायन विभाग द्वारा आयोजित पांच दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला के दूसरे दिन रविवार का संचालन हनुमान प्रसाद गुप्ता ने किया तथा विभागाध्यक्ष डॉ बिलंबिता बानीसुधा ने विशेषज्ञ डॉ विशाल जैन का स्वागत एवं परिचय कराया। डॉ विशाल जैन ने डागर बानी के विशेष संदर्भ में ध्रुपद के पद विषय पर अपना प्रयोगात्मक व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने सबसे पहले भरतमुनि कृत नाट्यशास्त्र के श्लोक “स्वर ताल पदात्मकम इति गांधर्वम” से शुरुआत की तथा पद का महत्व बताया। इसके बाद उन्होंने बानियों के बारे में बात की तथा अलग-अलग बानियों के लक्षण बताएं। उन्होंने बताया कि गोपाल नायक ने ध्रुपद के पहले पद कि रचना की। जिसमें उन्होंने अपने राजा की प्रशंसा की थी।

डागर बानी का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया की यह बानी आलापचारी के लिए बहुत प्रसिद्ध है, तथा इसमें रूद्र वीणा को बहुत महत्व दिया जाता है। डागर बानी के पदों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बैजू बावरा द्वारा रचित पद “वंशीधर पिनाक” गाया। इसके बाद उन्होंने राग भुपाली में “तेरो मन में कितनो गुण है” पद गाया। भक्ति रस प्रधान पदों का उल्लेख करते हुए उन्होंने “पूजो रे गणेश” पद गाया जिसकी रचना नायक बक्षु द्वारा की गई है। धमार की बात करते हुए उन्होंने राग बिहाग में “कहां से तुम मद पी आए हो” पद गाया। ऐसे उन्होंने और कई पद प्रस्तुत किए जिसमें से एक पद राग वृंदावनी सारंग तथा ताल सुलताल में था तथा उसकी रचना तानसेन ने की थी। अंत में महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ अलका सिंह ने अपनी प्रसन्नता जाहिर करने के साथ सब को साधुवाद भी दिया और डॉ बिलंबिता बानीसुधा ने डॉ विशाल जैन जी का आभार प्रकट करते हुए सभी श्रोता गणों का धन्यवाद ज्ञापन किया।

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