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Webinar : ‘भारतीय संगीत की परंपरा एवं रचनाओं’ विषय पर हुआ व्याख्यान

Varanasi : बसन्त महिला महाविद्यालय में संगीत गायन विभाग द्वारा आयोजित पांच दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला शुक्रवार से शुरू हुई। पांच दिवसीय कार्यशाला में “भारतीय संगीत की परंपरा एवं रचनाओं” विषय पर देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के विषय-विशेषज्ञ अपना-अपना प्रयोगात्मक व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे। इसी क्रम में पहले दिन के कार्यशाला की विशेषज्ञ प्रोफेसर बास्वी मुखर्जी थी। उन्होंने “डॉ प्रभा अत्रे जी की रचनाओं का एक विश्लेषणात्मक अध्ययन” विषय पर अपना प्रयोगात्मक व्याख्यान प्रस्तुत किया। प्रोफ़ेसर बास्वी मुखर्जी ने इस विषय के अंतर्गत बताया कि डॉ प्रभा अत्रे किराना घराने से जुड़ी होने के कारण उन्होने अपनी बंदिशों में भी किराना घराने की विशेषताओं को ध्यान में रखकर उनकी रचनाएं की।

भक्ति रस प्रधान पदों का उल्लेख करते हुए राग यमन में निबंध रचना विलंबित ख्याल “चित लागू हरि नाम, नित सुमिर मन तू नाम” छोटा ख्याल “लागी- लागी रे हरि संग, प्रीत ये जन्म जन्म की” एवं अंत में तराना भी सुनाया जिसके बोल थे “ओदे तनन दीम तदारे दानी” उन्होंने बताया कि जब तक बंदिश निर्माण करने वाले के अंतर्मन में रस- सौन्दर्य का बोध नहीं होगा अच्छी बंदिशों का निर्माण असंभव है। उन्होंने बताया कि प्रभा अत्रे ने लगभग 500 बंदिशों का निर्माण किया एवं कई नए रागों का भी अविष्कार किया है। जिसमें अपूर्व कल्याण, दरबारी कौश, पटदीप मल्हार, शिवकली, तिलंग-भैरव, रवि भैरव, और मधुर कोश शामिल है। डॉ प्रभा द्वारा रचित बंदिशे ‘स्वरांगिनी’ एवं ‘स्वरंजनी’ नामक पुस्तक में संकलित है।कार्यशाला का संचालन हनुमान प्रसाद गुप्ता ने किया तथा विभागाध्यक्ष डॉ विलंबिता बानीसुधा ने प्रोफेसर बास्वी मुखर्जी का स्वागत एवं परिचय कराया। इस मौके पर महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ अलका सिंह ने कार्यशाला के शुरू होने पर प्रसन्नता जाहिर किया एवं संगीत विभाग को शुभकामनाएं प्रदान किया।

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