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Webinar : Covid-19 को लेकर कई बातें सोशल साइट्स पर आ रहीं, सत्यता जानने के बाद दें प्रतिक्रिया- प्रो. प्रोमिला बतरा

Varanasi : Covid-19 काल में मानसिक स्वास्थ्य की प्रासंगिकता का आयोजन मनोविज्ञान विभाग वसंत महिला महाविद्यालय तथा भारतीय काउंसलिंग साइकोलॉजी एसोसिएशन के संयुक्त प्रयास से किया जा रहा है। राष्ट्रीय वेबीनार के प्रथम दिन गुरुवार को उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय वेबीनार के संयोजक डॉ. वेद प्रकाश रावत (असिस्टेंट प्रोफेसर, मनोविज्ञान विभाग) ने सभी प्रमुख वक्ताओं तथा प्रतिभागियों का सबसे परिचय कराया एवं डॉ. सुभाष मीणा ने राष्ट्रीय वेबीनार के संचालन का कार्यभार संभाला।
उद्घाटन सत्र में महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर अलका सिंह ने मुख्य अतिथि, मुख्य वक्ता तथा संरक्षक एवं सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया और इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के लिए मनोविज्ञान विभाग को ढेर सारी शुभकामनाएं दी।

महाविद्यालय के संरक्षक एस.एन. दुबे ने इस राष्ट्रीय वेबीनार में उपस्थित सभी विद्वानों एवं विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज हम सभी मानसिक स्वास्थ्य विषय पर परिचर्चा करने के लिए एकत्रित हुए हैं। इसलिए मैं सभी लोगों को बधाई देता हूं कि उन्होंने इस कठिन परिस्थिति में भी इस विषय का चुनाव कर इस पर परिचर्चा करना आवश्यक समझा। विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा श्रीवास्तव (एसोसिएट प्रोफेसर, विभागाध्यक्ष मनोविज्ञान विभाग) ने इस राष्ट्रीय वेबीनार के विषय के बारे में बताते हुए इसके उद्देश्यों को स्पष्ट किया। उन्होंने यह भी बताया कि कोरोना काल और लॉकडाउन ने हम सभी के जीवन पर सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों ही प्रकार के प्रभाव डालें हैं, लेकिन नकारात्मक प्रभाव ने मानव जीवन को अधिक कष्टमय बना दिया है और व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य असंतुलित हो गया है और शायद यही कारण है कि इस राष्ट्रीय वेबीनार के लिए हम सभी ने मिलकर इस विषय का चयन किया जिससे कि हम इस पर गहन परिचर्चा करके विभिन्न उपायों को जान सके और इन नकारात्मक प्रभावों से उबर सके।

समाधान भी अवश्य होगा

प्रोफेसर हरिशंकर अस्थाना (विभागाध्यक्ष, मनोविज्ञान विभाग बनारस हिंदू विश्वविद्यालय) ने इस राष्ट्रीय वेबीनार के मुख्य विषय की तरफ ध्यान दिलाते हुए कहा अगर समस्या आई है तो उसका समाधान भी अवश्य होगा इसलिए हमें समस्या के साथ जीना होगा और जब तक उसका समाधान नहीं मिल जाता तब तक उससे जुड़ी मनोवैज्ञानिक चुनौतियों को स्वीकार करना पड़ेगा। अगर हमें कोविड-19 ने यह चुनौती दी है तो हमें उस चुनौती के लिए स्वयं को तैयार रखना होगा, उन्होंने यह भी कहा मानसिक स्वास्थ्य एक ऐसा विषय है जिस पर किसी खास समय पर नहीं वरन हमेशा चर्चा होती रहनी चाहिए, क्योंकि आज भी हम लोग जितनी सहजता से शारीरिक स्वास्थ्य के बारे में बातचीत कर लेते हैं इतनी सहजता से मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बातचीत नहीं कर पाते हैं। अतः हम सबको यह निरंतर प्रयास करना चाहिए कि हम अधिक से अधिक लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूक करते रहें और शायद मानसिक स्वास्थ्य पर आयोजित यह वेबीनार इसमें अपनी अच्छी भूमिका निभाएगा।

हर सिक्के के दो पहलू

कार्यक्रम के अगले चरण में मुख्य अतिथि प्रोफेसर प्रोमिला बतरा (संकाय अध्यक्ष, सामाजिक विज्ञान, महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी, रोहतक हरियाणा, तथा भारतीय काउंसलिंग साइकोलॉजी एसोसिएशन की गवर्निंग बोर्ड मेंबर) ने मानसिक स्वास्थ्य तथा सोशल मीडिया के संबंध में अपना वक्तव्य देते हुए या कहा कि सामाजिक माध्यमों के द्वारा उत्पन्न सूचना अधिकार, भय, नकारात्मकता इत्यादि के प्रचार- प्रसार के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी कहा कि हर सिक्के के 2 पहलू होते हैं। ठीक उसी प्रकार सोशल मीडिया ने भी हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही प्रकार का गहरा प्रभाव डाला है। सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली या बताई जाने वाली हर सूचना के प्रासंगिकता की जांच अवश्य करनी चाहिए की बताई जाने वाली घटना कितनी सत्य या असत्य है। इसके लिए हमें तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए वरन कुछ अन्य स्रोतों से भी सूचनाओं को प्राप्त करना चाहिए और उसका विश्लेषण भी करना चाहिए।

वक्ताओं ने रखे अपने विचार

राष्ट्रीय वेबीनार के प्रथम दिन के द्वितीय सत्र में मुख्य वक्ता डॉ. सत्य गोपाल (एसोसिएट प्रोफेसर, विभागाध्यक्ष, मनोविज्ञान विभाग, डी.ए.वी. पी.जी. कॉलेज) ने मानसिक स्वास्थ्य तथा कोविड-19 विषय पर अपना वक्तव्य दिया और प्रतिभागियों को ज्ञानवर्धक सामग्री उपलब्ध कराई। वेबीनार के द्वितीय सत्र में प्रोफेसर धनंजय कुमार (मनोविज्ञान विभाग, दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर यूनिवर्सिटी, गोरखपुर तथा भारतीय काउंसलिंग साइकोलॉजी एसोसिएशन की गवर्निंग बोर्ड मेंबर) ने लॉकडाउन के कारण उत्पन्न हुए विभिन्न मानसिक मुद्दों तथा उससे पहुंचे आघात एवं संकट विषय पर अपना वक्तव्य दिया और कहा कि आज वर्तमान समय ने हर आयु वर्ग को प्रभावित किया है चाहे वह व्यक्ति वृद्ध, वयस्क, युवा, किशोर, बच्चा, स्त्री हो या पुरुष हो इस लॉकडाउन ने सबको अपने आगोश में लिया है, जिससे सभी आर्थिक, सामाजिक, तथा विभिन्न मनोवैज्ञानिक चुनौतियों का सामना भी कर रहे हैं। इसलिए इन मनोवैज्ञानिक चुनौतियों का सामना करने के लिए व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य अधिक सक्षम होना चाहिए जिससे वह इन चुनौतियों का सामना कर सके और सही तरीके से जीवन यापन कर सकें। उन्होंने यह भी कहा इस समय सभी लोग इस पर चर्चा कर रहे हैं, मैं आप सभी मनोवैज्ञानिकों को जो इस क्षेत्र में कार्य करना चाहते हैं उनको आमंत्रित करता हूं तथा इस विषय के बारे में सोचने के लिए अधिक प्रेरित करना चाहता हूं कि लाक डाउन के बाद हम किस प्रकार मनोवैज्ञानिक अवसर ढूंढ करके लोगों को जागरूक कर सकें।

950 प्रतिभागियों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया

वेबीनार में कुल 60 शोध पत्र प्राप्त हुए तथा लगभग 950 प्रतिभागियों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया लगभग 1000 प्रतिभागियों ने इस राष्ट्रीय वेबीनार को फेसबुक के माध्यम से अपनी उपस्थिति एवं प्रतिभागिता दर्ज कराई और देखा। इसके साथ ही साथ विभिन्न प्रतिभागियों ने अपना शोध पत्र भी प्रस्तुत किया। इस राष्ट्रीय वेबीनार के संयोजक डॉ वेद प्रकाश रावत (असिस्टेंट प्रोफेसर, मनोविज्ञान विभाग) ने राष्ट्रीय वेबीनार में भाग लेने वाले सभी मुख्य अतिथियों तथा वक्ताओं का विशेष ध्यान रखते हुए उन्हें टेक्निकल सपोर्ट प्रदान किया। इस राष्ट्रीय वेबीनार के प्रथम दिन का संचालन सह-संयोजक डॉ सुभाष मीणा (असिस्टेंट प्रोफेसर, मनोविज्ञान विभाग) ने किया तथा विभिन्न प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों को विशेषज्ञों तक पहुंचा कर उनके प्रश्नों का निराकरण करके उनकी जिज्ञासा को शांत भी किया। आयोजन समिति में डॉ. सीमा श्रीवास्तव, डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव, डॉ. ऋचा सिंह, डॉ. आकांक्षी श्रीवास्तव तथा डॉ. विभा रानी ने इस राष्ट्रीय वेबीनार से संबंधित अन्य प्रमुख कार्यों को संभाला तथा उसे साकार रूप देने का प्रयास किया एवं रोजी शांडिल्य, शिवांजलि, कृष्णा व्यास, विराली प्रकाश, तथा मौसम प्रकाश इत्यादि ने विभिन्न प्रतिभागियों को इस राष्ट्रीय वेबीनार से संबंधित सभी सूचनाएं प्रदान की।

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