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रामलीला का 21वां दिन : रावण को मंदोदरी की बात अच्छी नहीं लगी, लंका तक पहुंची प्रभु श्रीराम की सेना, अंगद ने प्रहस्त को मार डाला, लंकेश को माफी मांगने की सलाह

Sanjay Pandey

Varanasi : रावण को पटरानी मंदोदरी सहित मंत्रियों की कही हुई सम्पूर्ण राक्षस कुल की हित की बातें अच्छी नहीं लगतीं। वह श्रीराम सहित सारे वानर सेना की खिल्ली उड़ाता है।

रामनगर की रामलीला में इक्कीसवें दिन शनिवार को श्रीराम का सेना सहित सिन्धु पार गमन, सेना वर्णन, सुमेर गिरि विश्राम तथा अंगद विस्तार का मंचन हुआ।

श्रीराम नल व नील द्वारा बनाएं गए सेतु से सेना को सिन्धु के पार जाने की अनुमति देते हैं। श्रीराम की सेना में मौजूद वानर रास्ते में राक्षसों द्वारा रोके जाने पर उनके नाक और कान काट लेते हैं।

यह दृश्य देखकर दूत रावण को सूचना देते हैं। दूतों की बात सुनकर रावण क्रोधित होकर सभी को बांधकर लाने की आज्ञा देता है।

मंदोदरी के समझाने का असर भी रावण पर नहीं होता। अपने पुत्र प्रहस्त द्वारा सीताजी को श्रीराम को लौटाने की बात भी रावण को नागवार लगी। श्रीराम सुमेर पर्वत पर विश्राम करते हुए विभीषण से सलाह करते हैं। जामवंत की सलाह पर श्रीराम अंगद को दूत बनाकर रावण के पास भेजते हैं।

अंगद रावण के सभा में पहुंचकर अपना परिचय देते हैं। रावण पुत्र प्रहस्त ताने देता है। अंगद ने रावण के पुत्र प्रहस्त को मार डाला। अंगद अपनी भुजा जमीन पर पटकते हैं जिससे रावण का मुकुट गिर जाता है। अंगद रावण को चुनौती देते हैं कि अगर वह उसका पैर जमीन से हटा दे तो राम सीता को हारकर वापस चले जाएंगे।

रावण के दरबार के सभी वीरों के हार जाने पर रावण अंगद का पैर हटाने के लिए आता है तो अंगद कहते हैं कि मेरा नहीं श्रीराम का पैर पकड़ो उससे तुम्हारा कल्याण होगा।

रावण लज्जित हो जाता है। अंगद श्रीराम के पास लौट आते हैं। श्रीराम सुमेर पर्वत पर वानर सेना से विचार विमर्श करतें हैं। आरती के बाद लीला का विश्राम होता है।

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