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रामलीला का 22वां दिन : मेघनाद ने ब्रह्मशक्ति का इस्तेमाल कर लक्ष्मणजी को मूर्छित किया, हनुमानजी लंका से सुषेन वैद्य फिर संजीवनी बूटी युक्त धौलगिरि पर्वत उठा लाए

Sanjay Pandey

Varanasi : रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला के प्रसंग लीलाप्रेमियों को दंग करते हैं, भाव भरते हैं तो प्रसन्न व दुखी भी करते हैं। यह सब लीला के प्रसंगानुसार उनके चेहरे पर झलकता है। ऐसा ही हुआ रामलीला के बाइसवें दिन जब राक्षसों संग युद्ध में मेघनाद के ब्रह्मशक्ति प्रयोग से लक्ष्मणजी मूर्छित हो गए।

इससे प्रभु राम तो दुखी हुए ही लीलाप्रेमियों भी विचलित हो उठे। प्रभु के भाई के प्रति भावों में पगे संवाद और पवनसुत हनुमान के संवादों ने भाव विभोर किया। शुक्रवार को लंका मैदान में चारो फाटक की लड़ाई, लक्ष्मण शक्ति हनुमान द्वारा संजीवनी बूटी ले आने की लीला का मंचन किया गया।

श्रीराम वानर-भालू वीरों के साथ लंका के चारों द्वार घेर लेने का विचार-विमर्श करते हैं। जामवंत, नील को पूर्वी, अंगद को दक्षिणी, हनुमान को उत्तरी और मध्य के प्रवेश द्वार पर श्रीराम-लक्ष्मण व विभीषण को युद्ध की राय देते हैं। युद्ध की भयावहता देख राक्षस प्राण मोह में भागने लगते हैं। रावण के धमकाने पर फिर मैदान में आते हैं।

मेघनाद द्वारा वानर वीरों को मारते देख हनुमान उस पर पहाड़ से हमला करते हैं और उसका रथ नष्ट कर देते हैं। मेघनाद प्रभु राम के पास जाकर दुर्वचन कहते हुए माया रचता है। राम अग्नि बाण से उसकी माया काट देते हैं।

क्रोधित लक्ष्मण मेघनाद से लड़ने आगे बढ़ते हैं। मेघनाद ब्रह्मशक्ति के प्रयोग से लक्ष्मणजी को मूर्छित कर देता है। भाई प्रेम में राम विलाप करते हैं। हनुमानजी उपचार के लिए सुषेन वैद्य को और फिर उनके बताने पर संजीवनी बूटी युक्त धौलगिरि पर्वत भी उठा ले आते हैं।

सुषेन वैद्य बूटी से लक्ष्मणजी की मूर्छा समाप्त करते हैं और उन्हें प्रभु श्रीराम गले से लगा लेते हैं। यहीं पर आरती कर लीला को विश्राम दिया गया।

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