Health Varanasi 

2821 क्षय रोगियों को लिया गोद, सुधारेंगे सेहत : बच्चों को दी गई पौष्ठिक आहार की पोषण पोटली, जन जागरूकता रैली निकाली, चला हस्ताक्षर अभियान

Varanasi : विश्व क्षय रोग दिवस पर गुरुवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय सभागार में आयोजित संगोष्ठी हुई। इस दौरान जनपद की स्वयंसेवी संस्थाओं ने कुल 2821 बाल एवं वयस्क क्षय रोगियों को गोद लिया। वाराणसी मण्डल के अपर निदेशक (चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) डॉ. शशिकांत उपाध्याय एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संदीप चौधरी ने गोद लिए गए क्षय रोगियों की सूची इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), रेड क्रॉस सोसाइटी, इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन (आईआईए) एवं ‘एक सोच-युवा अन्स्टोपेबेल’ आदि को प्रदान की। इस मौके पर अपर निदेशक, सीएमओ, जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राहुल सिंह ने गोद लिए गए 16 बच्चों को पोषण पोटली प्रदान की।

इस अवसर पर अपर निदेशक (स्वास्थ्य) डॉ. शशिकांत उपाध्याय ने कहा कि देश को वर्ष 2025 तक क्षय मुक्त बनाने को लेकर प्रधानमंत्री के विजन को पूरा करने के लिए वाराणसी में हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होने कहा कि विश्व क्षय रोग दिवस पर स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा बाल क्षय रोगियों के साथ ही वयस्क क्षयरोगियों को भी गोद लिया गया। गोद लेने वाली संस्था क्षयरोगियों को अपने परिवार के सदस्य के समान डॉट्स के माध्यम से दी जाने वाली औषधियों को बिना दवा बंद किये सम्पू्र्ण उपचार अवधि में खाने के लिए प्रेरित करेंगी। उन्होने बच्चों से कहा कि पोषण पोटली में दिये गए पौष्टिक आहार के साथ दवा भी पूरे समय तक जरूरी रूप से खाना है।

सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी ने कहा कि गोद लिए मरीजों को संस्थाएं हर महीने हर मरीज को पोषण पोटली उपलब्ध कराएंगी तथा उनकी सुख सुविधाओं के साथ सेहत का ख्याल रखेंगी। इसके साथ ही क्षय रोगियों का मनोबल बढ़ाते हुए बताएंगी कि संपूर्ण इलाज के बाद टीबी पूरी तरह से ठीक हो जाती है। यह बेहद जरूरी है कि क्षय रोगियों को प्रोटीन, विटामिन युक्त आहार मिलता रहे, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने में काफी मदद मिलेगी।

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि रेडक्रॉस सोसाइटी, आईएमए, आईआईए एवं ‘एक सोच-युवा अन्स्टोपेबेल’ द्वारा जनपद में गोद लिए गए क्षय रोगियों की कुल संख्या 2821 है। इसमें से ‘एक सोच-युवा अन्स्टोपेबेल’ की ओर से 18 वर्ष तक के 222 बाल क्षय रोगी, आईएमए की ओर से 1241 वयस्क महिला रोगी, रेडक्रॉस सोसाइटी की ओर से 832 एवं आईआईए की ओर से 526 वयस्क पुरुष क्षय रोगी गोद लिए गए हैं। उन्होने बताया कि जिन क्षय रोगियों का उपचार समाप्ता हो जाएगा, उनकी जगह नए क्षय रोगियों को गोद लेकर इस प्रक्रिया को जारी रखा जाएगा। संस्थाओं के द्वारा सभी क्षय रोगियों को गोद लेकर उनका इलाज पूरा होने तक निशुल्क कच्ची खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जायेगी। इसके साथ ही क्षय रोगियों को निक्षय पोषण योजना के तहत हर माह 500 रुपए पोषण भत्ता के रुप में पूर्व की तरह से दिया जाता रहेगा।

परिपूर्ण पोषण पोटली

डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि गोद लेने वाली संस्थाओं द्वारा हर क्षय रोगी को हर माह पोषण पोटली में 1 किलो मूंगफली, 1 किलो भुना चना, 1 किलो गुड़, 1 किलो सत्तू, 1 किलो तिल के लड्डू, 1 किलो अन्य अनुपूरक आहार जैसे हार्लिक्स, बार्नबीटा, कोंपलैन दिया जाएगा। यह पोटली उन्हें तब तक दी जाएगी जब तक वह पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाते। कार्यक्रम के अंत में क्षय उन्मूलन को लेकर शपथ ग्रहण व हस्ताक्षर अभियान चलाया गया जिसमें अपर निदेशक, सीएमओ, जिला क्षय रोग अधिकारी, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके यादव ने भी प्रतिज्ञा ली। चिकित्सालय प्रांगण से जन जागरूकता रैली का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर चिकित्सा अधिकारी व आईएमए वाराणसी के सामाजिक सचिव डॉ. अतुल सिंह, जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी हरिवंश यादव, रेड क्रोस से अमीता आर्य, आईआईए से राजेश भाटिया, चिकित्साधिकारी (टीबी) डॉ. अमित, डीपीसी संजय चौधरी, डीपीपीएमसी नमन गुप्ता, डीपीटीसी विनय मिश्रा, टीबी सुपरवाईजर एवं अन्य संस्था प्रतिनिधि व स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।

शुरू हुआ विशेष अभियान

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत अब हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के जरिये क्षय रोगियों को चिन्हित कर तुरंत उपचार पर रखने के लिए विशेष अभियान गुरुवार से हो गया है। यह अभियान 13 अप्रैल तक चलेगा। जनपद की सम्पूर्ण जनसंख्या के मध्य टीबी रोगी खोज के लिए घर-घर अभियान चलेगा। अभियान में ऐसे क्षेत्र जहां विगत दो वर्षों में अधिक क्षय रोगी या कोविड रोगी चिन्हित हुये हों एवं हेल्थ वेलनेस सेंटर से दूरस्थ क्षेत्रों पर अभियान में अधिक ज़ोर दिया जाएगा। जिले के 115 हेल्थ वेलनेस सेंटर पर नियुक्त सीएचओ के माध्यम से क्षय रोगियों की खोज की जायेगी। एएनएम व आशा घर-घर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग करेंगी। जिले की कुल जनसंख्या के सापेक्ष 21 दिनों में कुल 5532 सम्भावित मरीजों का बलगम परीक्षण करने का लक्ष्य रखा गया है।

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