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31 दिन होती है विश्व प्रसिद्ध रामलीला : मुख्य पात्रों की कोर्ट विदाई की रस्म निभाई गई, भरतजी को प्रभु श्रीराम ने संत और असंत के विषय में दी जानकार

Sanjay Pandey

Varanasi : रामनगर किले में रामलीला के मुख्य पात्रों की कोट विदाई की परंपरा निभाई गई। काशीराज परिवार की तरफ से कुंवर अनंत नारायण सिंह ने उनको दुर्ग में आमंत्रित कर उनका राजसी आतिथ्य सत्कार किया।

हाथी गेट के पास आयोजित कोट विदाई की रस्म में उन्होंने पात्रों को आसन पर बैठा कर उनके चरण पखारने के पश्चात अपने हाथों से जलपान परोस कर भोग लगाने का अनुरोध किया। रामायणियों रामचरितमानस के उत्तर कांड के शेष बचे दोहों का गायन शुरू किया। भगवान को भोजन ग्रहण करने के बाद कुंवर ने माला पहनाकर उनकी आरती की।

विदाई प्राप्त कर मुख्य स्वरुप हाथियों पर सवार होकर दुर्ग से वापस अयोध्या राम लीला मैदान पहुंचें। यहां पर रामायणियों ने उत्तरकांड के शेष बचे दोहों का गायन समाप्त किया। उसकी समाप्ति के बाद मुख्य पात्रों की आरती के साथ रामलीला का औपचारिक समापन हो गया।

इस अंतिम आरती में राजपरिवार का कोई भी सदस्य नहीं उपस्थित नहीं रहता है। इसके साथ ही एक महिना तक चली रामनगर की रामलीला का समापन हो गया। नम आंखों से लीला प्रेमियों ने एक-दूसरे से विदा ली। लेकिन इस वादे के साथ कि अगर प्रभु चाहेंगे तो अगले साल फिर मिलना होगा।

हालांकि यह आयोजन रामलीला का हिस्सा नहीं होता लेकिन भगवान श्री राम की विदाई बाबा विश्वनाथ के प्रतिनिधि काशीराज द्वारा करते हुए देखना दुर्लभ क्षण होता है। लिहाजा लोग इसे भी रामलीला ही मान कर चलते हैं।

इसके पूर्व रामलीला के इकतीसवें दिन उपवन विहार, सनक सनंदन की लीला सम्पन्न हुई। चारों भाई हनुमान के साथ हाथी पर सवार होकर उपवन विहार के लिए रामबाग पहुंचते हैं। यहां सनक, सनातन और सनंदन पहुंच कर श्रीराम की महिमा का वर्णन करते हैं।

भरत जी, श्रीराम जी से संत और असंत के भेद के बारे पूछते हैं। श्रीराम उन्हें इस भेद के बारे में विस्तार से वर्णन करते हैं। इसके बाद गुरु वशिष्ठ, श्रीराम की महिमा का वर्णन करते हैं। देवर्षि नारदजी भी पहुंच कर श्रीराम की स्तुति करते हैं।

श्रीराम की स्तुति करने के बाद नारदजी ब्रम्हालोक चले जाते हैं। इसके बाद चारों भाई वापस अयोध्या आते हैं। इसके साथ ही रामलीला के प्रसंगों का मंचन समाप्त हो जाता है।

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