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@aajexpressdgtl #TopStory : नहीं टूटेगी परम्परा, डीरेका में होगा रावण दहन, इतने फिट ऊंचे दशानन का बनेगा पुतला, यह होगा आयोजन

Sanjay singh

Varanasi : वैश्विक महामारी कोरोना के चलते धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में कई तीज और त्योहार फीके रहे। कोविड की काली छाया के चलते नवरात्र से लेकर रक्षाबंधन, रथयात्रा मेला, सावन मेला, ईद, लोलार्क छठ रक्षाबंधन सहित कई पर्वों पर रौनक नहीं दिखी। अनलॉक लागू होने के बाद से अब धीरे-धीरे रियायतें मिल रही हैं। सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन करते हुए अब पर्वों को मनाने की अनुमति मिल रही है। 17 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र शुरू हो रहा है। इसके साथ त्योहारों की कतार लग जायेगी। नवरात्र, दशहरा, दीपावली, डाला छठ जैसे कई पर्व आने वाले हैं। सरकार ने गाइडलाइन जारी किया है। जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने भी शर्तों के साथ जिले दुर्गापूजा, दशहरा, रामलीला को मनाने की अनुमति दे दी है।

विख्यात डीरेका रावण दहन की तैयारियां भी लीला समिति द्वारा शुरू कर दी गई हैं। लगभग 60 वर्षों से चली आ रही परंपरा कोरोना के चलते स्थगित नहीं होगी। हालांकि, आयोजन उतनी भव्यता और सार्वजनिक नहीं होगा, केवल परंपरा का निर्वहन किया जाएगा। विजयदशमी लीला समिति के निर्देशक एसडी सिंह ने बताया कि सांकेतिक रूप में आयोजन होगा। कोई भव्यता नहीं होगी। 11 दिन तक चलने वाला लीला इस वर्ष नहीं होगा। केवल रावण दहन के परंपरा का निर्वहन होगा।

10-10 फिट का बनेगा पुतला

बताया, गत तीस वर्षों से उनके नेतृत्व में रावण दहन का आयोजन होता चला आ रहा है। कोरोना महामारी के चलते इस वर्ष यह आयोजन सार्वजनिक नहीं होगा। इस वर्ष दशानन, मेघनाद और कुम्भकर्ण के 10-10 फिट के पुतले बनेंगे। लीला मंचन करने वाले छात्रों द्वारा कोविड नियमों का पालन करते हुए आखिरी दिन का मंचन होगा। डीरेका ग्राउंड के बजाए उसके पीछे लीला समिति के कार्यालय के समीप खुले लॉन में पुतला दहन का आयोजन होगा। इस दौरान केवल लीला मंचन करने वाले कलाकार और समिति के लोग मौजूद रहेंगे। अन्य लोगों का प्रवेश वर्जित रहेगा। कुल एक से डेढ़ घंटे का आयोजन होगा।

होती थी लाखों की भीड़

प्रत्येक वर्ष होने वाले डीरेका रावण दहन देखने के लिए डीरेका मैदान में लाखों की भीड़ होती थी। पर इस वर्ष डीरेका मैदान में सन्नाटा पसरा रहेगा। दशहरा पर 75 फीट रावण, 65 फीट कुंभकरण और 60 फीट ऊंचे मेघनाथ के पुतले का दहन किया जाता था, लेकिन इस बार कोविड-19 की वजह से कैंसिल कर दिया गया है। पुतलों का निर्माण एक मुस्लिम कारीगर अपने सहयोगी के साथ करते थे। पुतलों को बनाने में लगभग दो लाख रुपए से ज्यादा का खर्च होता था।

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