धर्म-कर्म 

आदिशक्ति मां महामाई मंदिर : मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व कराया पुष्पाधिवास, बुधवार को गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा

Jaunpur : सवंशा गांव में करीब ढाई वर्षों से निर्माणाधीन आदिशक्ति मां महामाई मंदिर का कार्य पूर्ण होने के बाद मन्दिर में मुर्तियों के प्राण-प्रतिष्ठा के महापुजन कार्यक्रम में चल रहे मूर्ति स्थापना समारोह के तीसरे दिन सोमवार को फलाधिवास, पुष्पाधिवास, वस्त्राधिवास आदि कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इससे पूर्व रविवार को द्वितीय दिवस पर यजमान गणेश चंद्रशेखर उपाध्याय और उनकी धर्मपत्नी वैशाली उपाध्याय द्वारा जलाधिवास, अन्नाधिवास, मिष्ठाधिवास पूजन पूर्ण विधि विधान से हुआ था। मंगलवार को नगर भ्रमण और शोभा यात्रा के साथ गांव की परिक्रमा के बाद बुधवार को प्राण प्रतिष्ठा कर मूर्ति को गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा।

अयोध्या से पधारे इस महापूजा के मुख्य आचार्य जगदम्बा प्रसाद मिश्र के बताया कि सनातन धर्म में देव उपासना के लिए प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान में विशेष पूजा की जाती है। मूर्ति को स्थापित करने से पहले सर्वतोभद्र, षोडश मातृका, नवग्रह पीठ स्थापित कर गणेश पूजन और कलश स्थापना के साथ विधिवत पूजन किया जाता है।

पीठ पर अधिष्ठित आह्वाहित देवताओं के पूजन के बाद पहले दिन देव प्रतिमाओं का जलधिवास कराया जाता है। जिसके तहत मूर्तियों को जल से भरे हुए विशाल पात्रों में शयन कराया जाता है। दूसरे दिन गेहूं चावल आदि अन्न के भंडार में ढ़ककर अन्नाधिवास होता है। फलाधिवास, घृत में आवास, शय्याधिवास का क्रम पूरा करने के बाद नेत्र उद्घाटन के लिए मंत्र पाठ करने के बाद अभिषेक पूर्वक षोडशोपचार पूजन संपन्न कर देव प्रतिमाओं को यथा स्थान प्रतिष्ठित कर दिया जाता है।

आचार्य जगदम्बा मिश्र ने बताया कि मूर्तियों में मंत्रों की शक्ति से जब प्राण प्रतिष्ठा होती है तो उनमें देवत्व का प्रवेश होता है जो विधिवत पूजा से फलदायी होती हैं। मां महामाई मन्दिर निर्माण समिति के प्रतिनिधि गौरव शुक्ला ने बताया कि मंगलावर को शाम 4 बजे मूर्तियों की शोभा यात्रा में नगर भ्रमण के बाद बुधवार को मूर्ति स्थापना और शिखर स्नान और शिखर स्थापना के बाद पूर्णाहुति कर महापूजा सम्पन्न कराई जाएगी। गुरुवार को महाभण्डारे के दौरान प्रसाद वितरण कार्यक्रम सम्पन्न कराया जाएगा। महापूजा में रोज सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित हों रहे है।

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