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बालू पट्टा के नाम पर धोखाधड़ी और रंगदारी मांगने का आरोप : कोर्ट ने पुलिस की FR निरस्त कर अग्रिम विवेचना का आदेश दिया

Varanasi : बालू पट्टा के नाम पर बिल्डर विनय डिडवानिया औरवऋषि डिडवानिया से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में आरोपित राकेश जायसवाल सहित तीन लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (तृतीय) नितेश कुमार सिन्हा की अदालत ने आरोपित पांडेयपुर निवासी राकेश जायसवाल, औसानगंज मनोज सिंह और ओबरा सोनभद्र निवासी लालबहादुर प्रसाद के खिलाफ भेलूपुर थाने में दर्ज धोखाधड़ी और रंगदारी के मामले में पुलिस की फाइनल रिपोर्ट को निरस्त करते हुए अग्रिम विवेचना का आदेश दिया है। वादी की ओर से अधिवक्ता अनुज यादव, नरेश यादव और विकास सिंह ने पक्ष रखा।

प्रकरण के अनुसार, दुर्गाकुंड भेलूपुर निवासी बिल्डर ऋषि डिडवानिया ने भेलूपुर थाने में 1 अगस्त 2021 को प्राथमिकी दर्ज करायी थी। आरोप था कि आरोपित राकेश जायसवाल वर्ष 2017-18 मे भेलूपुर स्थित उसकी कंपनी के आफिस में मिला। जहां उसके भाई विनय डिडवानिया भी मौजूद थे। इस दौरान राकेश जायसवाल ने बताया कि हमलोगों की एक शिवलिंगा इंटर प्राइज नाम से कंपनी है, जिसमें राकेश जायसवाल, मनोज सिंह, लालबहादुर और आलोक पार्टनर हैं। हम लोगों को 13 से 14 करोड़ रुपये की लागत का एक बालू खनन का पट्टा सोनभद्र में मिला है। जिसमें 50 प्रतिशत हिस्सेदार बनने का आफर दिया। कई बार की मिटिंग के बाद 2 अगस्त 2018 को उनकी कंपनी शिवलिंगा इंटर प्राइजेज के साथ कोलोब्रेशन एग्रीमेंट वादी ने किया था। जिसके बाद कंपनी के खाते से उनके खाते में 6 करोड़ 50 लाख रुपये ट्रांसफर किया था। इस बीच 16 जनवरी 2020 को आरोपितों ने वादी को पैसा देना बंद कर दिया। कई बार तगादा करने पर उनलोगो ने 1 सितम्बर 2020 को इंडिया होटल में बुलाया और एग्रीमेंट देखने के बहाने उसे फाड़ दिया। विरोध करने पर पिस्टल सटाकर जान से मारने की धमकी देने लगे। इस मामलें में विवेचना के बाद पुलिस ने आरोपितों के पक्ष में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी।

वादी पक्ष के अधिवक्ताओं ने पुलिस की फाइनल रिपोर्ट का विरोध करते हुए दलील दी कि आरोपितों का एक संगठित गिरोह है। इन लोगों के खिलाफ पूर्व में भी कई अपराधिक मामले, जिसमें सोनभद्र चेयरमैन इम्तियाज अहमद की हत्या, धमकी, धोखाधड़ी के भेलूपुर और सोनभद्र सहित आदि जगहों पर दर्ज है। बावजूद इसके पुलिस ने आरोपितों से मिलीभगत करके फाइनल रिपोर्ट प्रेषित की है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पत्रावली के अवलोकन से स्पस्ट है कि विपक्षीगण द्वारा कोलोब्रेशन एग्रीमेंट फाड़े जाने और वादी को जान से मारने की धमकी देने का कथन किया है। बावजूद इसके विवेचक द्वारा किस आधार पर बयानों को नजरंदाज किया गया यह स्पष्ट नहीं किया गया है। जो विवेचक के निस्पक्ष विवेचना को संदेहास्पद बनाता है। ऐसे में इस मामले की अग्रिम विवेचना किया जाना आवश्यक है।

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