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BHU के पूर्व कुलपति, रजिस्ट्रार, डीन पर जालसाजी के आरोप : प्रोफेसर समेत दो के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल

Varanasi : काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति, पूर्व रजिस्ट्रार, पूर्व डीन सहित 8 प्रोफेसरों और कर्मचारियों के खिलाफ कूटरचना, धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप लगे हैं। इनमें से पूर्व वीसी और रजिस्ट्रार तो बच निकले, लेकिन 8 अधिकारियों और प्रोफेसर के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। कोर्ट ने अब इन्हें नोटिस भेजी है।

बीएचयू आर्ट फैकल्टी के पत्रकारिता व जनसंपर्क विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ज्ञान प्रकाश मिश्र ने 9 मई 2019 को कला संकाय प्रमुख प्रो. कुमार पंकज और उसके निजी सहायक चंदन बरोई समेत आठ लोगों के खिलाफ लंका थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि प्रो. पंकज ने उनके खिलाफ कूटरचना कर बैकडेट में फर्जी पत्र जारी दिखाकर साजिश के तहत जांच कमेटी गठित करा दी।

हालांकि विवि की ओर से गठित जांच समिति ने इसे फर्जी पाया। कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल होने के बाद पुलिस ने प्रोफेसर कुमार पंकज और चंदन बोराई के यहां समन जारी कराया। मामले में आरोप था कि प्रो. कुमार पंकज ने उनके विरुद्ध कूटरचना कर बैकडेट में फर्जी पत्र जारी दिखाकर षड्यंत्र के तहत जांच कमेटी गठित करा दी थी।

मिथ्या तथ्यों के आधार पर एक पत्र तत्कालीन रजिस्ट्रार डा. नीरज त्रिपाठी को अपने निजी सहायक चंदन बरोई से अंकित कराया। उसका पत्रांक फर्जी तरीके से कूटरचना कर बीच में डलवाया गया। 25 सितंबर 2017 की तिथि अंकित वह पत्र रजिस्ट्रार कार्यालय को एक महीना 11 दिन बाद छह नवंबर 2017 को प्राप्त हुआ और उसी दिन दाखिल दफ्तर भी हो गया लेकिन उसी पत्र के आधार पर जांच कमेटी का गठन हो गया। इस बात का पता चलने पर जब डा. मिश्र ने छानबीन की तो गड़बड़झाला उजागर हुआ। आरटीआई से तत्कालीन कुलपति द्वारा गठित जांच कमेटियों की जानकारी मांगने पर भी उसमें पीड़ि‍त प्राध्यापक का नाम नहीं था।

डा. मिश्र की मांग पर पत्र की जांच के लिए गठित विश्वविद्यालय कर्मचारी अनुशासन समिति ने भी पत्र को फर्जी पाया। इसकी पुष्टि भी समिति के सामने चंदन बरोई ने की। इस मामले के पांचवें विवेचक ने जांच पूरी कर आरोप पत्र एसीजेएम (जूनियर डिवीजन) के न्यायालय में दाखिल कर दिया।

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