Varanasi उत्तर प्रदेश धर्म-कर्म 

Annakoot Festival : काशी के देवालयों में सजा छप्पन भोग, कहीं बने लड्डुओं के शिवालय तो कही दीवारें ही सज गई मिठाइयों से

Varanasi : दीपोत्सव के दीपावली के अगले दिन रविवार को अन्नकूट महोत्सव मनाया धूमधाम से मनाया गया। धर्म की नगरी काशी के देवालयों में भगवान के समक्ष 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया और मिष्ठानों से भव्य सजावट की गई। इस अलौकिक दृश्य को देखने के लिए भक्तों उमड़ी रही। काशी विश्वनाथ दरबार में मंदिर गर्भगृह के बाहर लड्डुओं का शिवालय बनाया गया था।वहीं मां अन्नपूर्णा मंदिर को लड्डूयों से इस तरह सजाया गया, मानो पूरा मंदिर लड्डू से ही बनाया गया हो। इसके अलावा यहां के देवालयों में अन्‍नकूट की झांकी भी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रही। देवालयों में 101 क्‍विंटल का छप्‍पन भोग लगाया गया।

सभी देवालयों में मंगला आरती के बाद अन्नकूट सजावट के दर्शन के लिए पट खोल दिया गया था। झांकी दर्शन के लिए लंबी कतार लगी रही। काशी विश्वनाथ, माता अन्नपूर्णा, दुर्गा मंदिर और स्वामी नारायण मंदिर में छप्पन भोग के अलावा मेवा, मिश्री, पकवान का भोग अर्पित किया गया।अन्नपूर्णा मंदिर में 80 कुंतल वजन की मेवा, फल और खोवा, छेना से बनी मिठाइयों का अन्नकूट सजाया गया। 11 कुंतल कच्चे भोग यानी चावल, दाल, तरह-तरह की सब्जियां, चटनी, अचार, पापड़ के रूप में अन्न का पहाड़ सजाया गया।

यहां दो हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने अन्नकूट का भोग-प्रसाद मंदिर परिसर के अन्नक्षेत्र में ग्रहण किया। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में 6 कुंतल 51 किलो मिठाइयों सहित कुल 56 प्रकार के व्यंजनों से बाबा को भोग लगाया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं द्वारा लगाए जा रहे जयकारे से पूरा मंदिर परिसर शिवमय हो गया था।

पंच बदन प्रतिमा का हुआ श्रृंगार

प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी अन्नकूट पर्व पर बाबा श्री काशी विश्वनाथ के पंच बदन प्रतिमा की भव्य झांकी सजाई गई। श्रृंगार भोग आरती में बाबा की चल रजत प्रतिमा को स्थापित कर भव्य पूजन अर्चन किया गया। परंपरागत आयोजन के दौरान मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल, जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा, मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनील कुमार वर्मा, विशेष कार्याधिकारी उमेश सिंह और अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी निखिलेश मिश्रा सहित बड़ी संख्या में अधिकारी कार्यक्रम में पहुंचे और सभी बाबा श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के इस अन्नकूट महोत्सव के परंपरागत उत्सव में शामिल हुए। आरती के बाद कमिश्नर द्वारा मंदिर में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनील कुमार वर्मा ने बताया कि पिछले कई दशक से चली आ रही मंदिर की परंपरा का विधिविधान से निर्वहन किया गया। महंत परिवार द्वारा लाई गई परंपरागत प्रतिमा की वैदिक रीतिरिवाज से पूजन अर्चन किया गया।

बोले अन्नपूर्णा मंदिर के उपमहंत

उपमहंत शंकरपुरी ने बताया की अन्नपूर्णा मंदिर से जुड़ी एक प्राचीन कथा यहां बेहद चर्चित है। कहते हैं एक बार काशी में अकाल पड़ गया था, चारों तरफ तबाही मची हुई थी और लोग भूखों मर रहे थे। उस समय महादेव को भी समझ नहीं आ रहा था कि अब वे क्‍या करें। ऐसे में समस्‍या का हल तलाशने के लिए वे ध्‍यानमग्‍न हो गए, तब उन्हें एक राह दिखी कि मां अन्नपूर्णा ही उनकी नगरी को बचा सकती हैं। इस कार्य की सिद्धि के लिए भगवान शिव ने खुद मां अन्नपूर्णा के पास जाकर भिक्षा मांगी। उसी क्षण मां ने भोलेनाथ को वचन दिया कि आज के बाद काशी में कोई भूखा नहीं रहेगा और उनका खजाना पाते ही लोगों के दुख दूर हो जाएंगे। तभी से अन्‍नकूट के दिन उनके दर्शनों के समय खजाना भी बांटा जोता है। जिसके बारे में प्रसिद्ध है कि इस खजाने का पाने वाला कभी आभाव में नहीं रहता।

इन मंदिरों में सजाया गया अन्नकूट

काशी विश्वनाथ और मां अन्नपूर्णा सहित शनि मंदिर, कैलाश मंदिर, अक्षयवट हनुमान मंदिर, दुर्गा मंदिर, सीतला मंदिर, शाक्षी विनायक मंदिर, विशालाक्षी मंदिर में अन्नकूट महोत्सव मनाया गया।

Photos- Aaj Express Team

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में अन्नकूट झांकी का दर्शन करते श्रद्धालु।
श्रीकाशी विश्वनाथ दरबार में लड्डुओं से बना शिवालय।
माता अन्नपूर्णा को लगा छप्पन भोग।
अन्नपूर्णा दरबार में सजाया गया अन्नकूट महोत्सव।
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के समीप अक्षयवट हनुमान मंदिर।
विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र स्थित कैलाश मंदिर।
दशाश्वमेध घाट स्थित सीतला मंदिर।
शनिदेव मंदिर, काशी।
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