एडिटोरियल बड़ी बोल 

बतकहीबाज : कुछ लोगों का सीधापन है, कुछ अपनी अय्यारी है

मन बैरागी, तन अनुरागी, कदम-कदम दुश्वरी है, जीवन जीना सहल न जानो, बहुत बड़ी फनकारी है, औरों जैसे होकर भी हम बाइज्जत हैं बस्ती में, कुछ लोगों का सीधापन है, कुछ अपनी अय्यारी है। दरअसल, पुलिसिया हौसला दिन पर दिन पस्त होता जा रहा है। चाहे कानपुर मसला हो या फिर बनारस प्रकरण, हर जगह किरकिरी पुलिस की हुई। पॉलीटिकल प्रेशर कहिए या फिर अपनों की नजरें इनायत, हर ओर अजीब सा शोर। कॉमन पर्सन की सुरक्षा की जिम्मेदारी कंधे पर उठाए टहल रही पुलिस जब खुद सुरक्षित नहीं तो…?

सियासत शुरू

डिप्टी एसपी सहित आठ पुलिसवालों को मौत की नींद सुलाने के बाद पांच लाख रुपये का इनामी विकास दुबे उज्जैन के महाकाल मंदिर से पकड़ा गया। कानपुर गोलीकांड के मुख्य आरोपी कुख्यात गैंगस्टर दुबे के पकड़े जाने के बाद हमेशा की तरह इस बार भी सियासत शुरू हो गई। कहा जाने लगा कि सरेंडर के इरादे से ही दुबे मंदिर पहुंचा था। उसने वीवीआईपी दर्शन की पर्ची में अपना सही नाम और मोबाइल नंबर लिखवाया। वहीं, आरोपी की उज्जैन से गिरफ्तार होने पर यूपी पुलिस को लोग टारगेट करने लगे। नेतागिरी करने वालों का कहना था कि दुबे की गिरफ्तारी मिलीभगत की ओर इशारा करती है। बात अलग है, मध्यप्रदेश पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। अदालत से रिमांड मिलने के बाद उसे यूपी पुलिस को सौंप दिया जाएगा। उसके दो अन्य साथी भी गिरफ्तार किए गए हैं।

बातों का क्या?

बनारस के लंका थाना क्षेत्र में सुंदरपुर कांड पर पुलिस का सुंदर चित्रण नहीं किया गया। सुंदरपुर से शुरू हुई पंचायत राजधानी लखनऊ तक पहुंची। खेल-तमाशा हुआ। इंस्पेक्टर अश्वनी चतुर्वेदी, दो दरोगा और दो सिपाही घर को गए। लोगों ने बताया इंस्पेक्टर चतुर्वेदी का हाथ लिखा-पढ़ी में कमजोर था। लिखा-पढ़ी में हाथ कमजोर होने की वजह से वह तमाशा भी हुआ जो होना नहीं चाहिए था। खैर, बात है… बातों का क्या?

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