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आरक्षण के उल्लंघन पर बीएचयू के सेंट्रल ऑफिस का घेराव : पीजी के बाद सीधे पीएचडी कराने की योजना विवादों में, छात्रों की पांच सूत्री मांग

Varanasi : बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में पीजी के बाद सीधे पीएचडी में एडमिशन देने की योजना एनी बेसेंट फेलोशिप अब विवादों में आ गई है। छात्रों का कहना है कि इसमें एससी-एसटी के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं किया गया है। यह फेलोशिप सामाजिक न्याय के खिलाफ है। छात्र इसके विरोध में शनिवार दोपहर विश्वविद्यालय के सेंट्रल ऑफिस पर विरोध-प्रदर्शन करने पहुंचे। बीएचयू-बहुजन इकाई के रविंद्र भारती और छात्र अनुपम की अगुवाई में छात्रों ने प्रदर्शन किया। छात्रों ने कहा, इससे पहले विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन दिया गया था, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। पिछले सप्ताह बीएचयू की ओर से एनी बेसेंट फेलोशिप लांच की गई थी। इसमें उन छात्रों को सीधे पीएचडी में एडमिशन मिलने का विकल्प था। जोकि अपने विभाग के टॉप फाइव मेरिट में होंगे। यानी कि जिन्हें सबसे ज्यादा स्कोर सभी सेमेस्टर में प्राप्त होंगे। इसके लिए आपको नेट या जेआरएफ करने की भी अनिवार्यता नहीं होगी।

छात्रों ने कहा, यहां संविधान और यूजीसी के गाइडलाइंस का उल्लंघन किया जा रहा है। यूजीसी एक्ट 1956 के तहत ये निर्देश है कि देश के सभी सरकारी अनुदान प्राप्त करने वाले विश्वविद्यालयों, संस्थाओं और कॉलेजों में बिना रोक-टोक के आरक्षण की नीति को लागू किया जाए। छात्रों ने बताया, केंद्रीय शिक्षा संस्था (प्रवेश में आरक्षण) अधिनियम 2006 के तहत भी केंद्र सरकार द्वारा स्थापित सभी केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में सभी प्रकार के दाखिले में आरक्षण लागू करने का निर्देश है।

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