Breaking Varanasi उत्तर प्रदेश 

Breaking : Diesel Rail Engine Factory has been renamed, Now this name will be identified, Read to know history

Varanasi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में स्थित डीजल रेल इंजन कारखाना (डीरेका) का नाम बदल दिया गया है। रेल मंत्रालय के रेलवे बोर्ड की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक डीरेका का नाम अब बनारस रेल इंजन कारखाना होगा। याद होगा, इससे पहले मंडुआडीह रेलवे स्टेशन का नाम तब्दील कर बनारस रेलवे स्टेशन रखा गया था। कर्मचारी नेता नवीन सिन्हा ने बताया कि पीआरओ ऑफिस की ओर से इस आशय की जानकारी दी गई है।

डीरेका का इतिहास

अगस्त 196 में डीजल विद्युत रेल इंजन निर्माण के लिए एल्को-अमेरिका के सहयोग से इस कारखाने की स्थापना हुई। जनवरी 1964 में प्रथम रेल इंजन का निर्माण कर राष्ट को समर्पित किया गया। जनवरी 1976 निर्यात बाजार में प्रवेश हुआ। पहला रेल इंजन तंजानिया को निर्यात किया गया। इसके बाद दिसंबर 1977 में प्रथम डीजल जनित सेट का कमीशन किया गया। अक्टूबर 1995 में अत्याधुनिक माइक्रोप्रोसेसर नियंत्रित, एसी डीजल इलेक्टिक रेल इंजनों के निर्माण के लिए जनरल माटर्स, अमेरिका के साथ समझौते किया गया। इसके बाद फरवरी 1997 में अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (आईएसओ) 9002 प्रमाण पत्र प्राप्त किया। मार्च 2009 में आईएसओ 14001 प्रमाण पत्र मिला।

GTB श्रेणी के नटराज रेल इंजन का लोकापर्ण हुआ

मार्च 2002 में कारखाने में निर्मित जनरल मोटर्स डिजाइन के माइक्रोप्रोसेसर नियंत्रित 4000 अश्व शक्ति के पहले रेल इंजन का लोकार्पण किया गया। सितम्बर 2005 ओहसास 18001:1999 द्वारा प्रमाणित हुआ। नवम्बर 2006 पहला आईजीबीटी आधारित रेल इंजन का निर्माण किया गया। इसके बाद अगस्त 2007 में तत्कालीन रेल मंत्री द्वारा जीबीटी श्रेणी के नटराज रेल इंजन का लोकापर्ण किया। मार्च 2008 को सर्वाधिक 222 रेल इंजनों का उत्पादन दर्ज हुआ था।

error: Content is protected !!