Health Varanasi 

बदलते मौसम में बरते सावधानी वरना होगी परेशानी : अस्पतालों में बढ़ रहे वायरल संग स्किन एलर्जी के मरीज

Varanasi : वर्तमान समय में दिन और रात के तापमान में करीब दस डिग्री का अंतर है। दिन में गर्मी महसूस होने पर लोग ठंडे पेय पदार्थों का सेवन कर रहे हैं। शाम होने पर तापमान घट जाता है। इससे लोग बीमार हो रहे हैं।

चिकित्सकों का कहना है कि इस मौसम में ठंडे पेय पदार्थों के सेवन से बचाव ही सेहत की रक्षा करना है। दिन गर्म और रात सर्द होने के चलते बुखार, सर्दी और त्वचा संबंधी बीमारी हो रही हैं।

बचाव ही इस मौसम में बीमार होने से बचा सकता है। मौसम के करवट बदलने से वायरल बुखार, सर्दी-खांसी, बदन दर्द और नाक, गला व स्किन से जुड़ी बीमारियों की बाढ़ सी आ गई है। वहीं, बाढ़ उतरने के बाद से मच्छरों के नियंत्रण के व्यापक प्रबंध नहीं होने से डेंगू ने कहर बरपाया हुआ है।

डेंगू मच्छरों का आतंक मानव बस्तियों से लेकर पुलिस महकमा भी सहमा हुआ है। अब तक करीब 155 से अधिक मरीजों में डेंगू की पुष्टि की जा चुकी है।

इन दिनों जिला अस्पताल में लगभग 1900 व मंडलीय अस्पताल में 1600 से अधिक पेशेंट इलाज को ओपीडी में पहुंच रहे हैैं। दोनों अस्पतालों को मिलाकर ओपीडी में 700 से अधिक स्किन बीमारी में फंगल इंफेक्शन, स्कैबिज और चिकन पॉक्स के मामले बढ़ गए है।

ठंड के मौसम में त्वचा रोग के केस बढ़ गए हैैं। साफ-सफाई में लापरवाही व संक्रमण के कारण पांव का फटना, फुंसी-फोड़ा व एक्जीमा, खुजली, दाद आदि के मरीज बढ़े हैं। जिला अस्पताल और मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा की सिर्फ स्किन ओपीडी में पहुंचने वाले कुल 600 से अधिक लोग बीमारियों से जुड़े हैैं। निजी चिकित्सकों के पास भी ऐसे मरीजों की लंबी कतार है।

सावधानी बरतने की जरूरत

ठंड के मौसम में कोशिकाओं में नमी कम हो जाती है, इससे त्वचा सूखने लगती है और फटने की शिकायत शुरू हो जाती है। अधिक लापरवाही से त्वचा की ऊपरी के साथ निचली सतह भी प्रभावित होकर धीरे-धीरे सूखने लगती है। ऐसे में त्वचा की परत बाहर निकलने लगती है। बाद में वातावरण में मौजूद जीवाणुओं व गंदगी की वजह से त्वचा में संक्रमण के कारण फुंसी-फोड़ा, एक्जीमा आदि चर्म रोग हो जाते हैं। प्रदूषण बढ़ने के साथ त्वचा संक्रमण के 20 फीसदी मरीज बढ़ गए हैं। शुष्क त्वचा, खुजली और अलग-अलग एलर्जी के मामले बढ़ रहे हैं। हवा में धूल और प्रदूषण के कण त्वचा को खराब कर रहे हैं। ऐसे में मरीजों को अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

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