मेहमान लेखक 

Guest Writer : अल्फाज नहीं हासिल बेवफा तेरी जानिब़, फरेब़ तेरा मैं क्यों झुठला रहा हूं

Banke Banarasi Pankaj मैं तुम्हें ना कुछ बता रहा हूं ना कुछ छुपा रहा हूं, दरअसल दिल को ज़रा बहला फुसला रहा हूं। जानता हूं बेशक हर राज ए जमाना फिर भी, अश्कों से हकीकत ए दिल छुपाए जा रहा हूं। वाकिफ हूं हर हाल ए मुफलिसी से फिर भी, पसीने में सनी रोटी घर लेके आ रहा हूं। खयालों में मेरे शामिल हैं जिसकी शोखियां, उनकी यादों को हिचकीयां मैं फिर लौटा रहा हूं। अल्फाज नहीं हासिल बेवफा तेरी जानिब़, ‘बांके’ फरेब़ तेरा मैं क्यों झुठला रहा हूं। Disclaimer…

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मेहमान लेखक 

Guest Writer : है गुजारिश ये ही हर अज़ीम इंसान से, तुम हरएक ग़म को भुलाकर मुस्कुराना सीख लो

कुछ ना आए बेश़क रिश्ते निभाना सीख लो, हर मुट्ठी में नमक है यहां जख़्म छुपाना सीख लो। तुम से भी ज्यादा कहीं मौजूद हुनरमंद हैं, तुम सिरफ अपना हुनर पेश़ करना सीख लो। तुम से येही जिक्र होगा तुम यहां कमजोर हो, तुम हरइक ठोकर के बाद उठके चलना सीख लो। सबको यही फिक्र है कोई हमसे ज्यादा ना बढ़े, तुम अलग मंजिल चुनो आगे बढ़ना सीख लो। है गुजारिश ये ही ‘बांके’ हर अज़ीम इंसान से, तुम हरएक ग़म को भुलाकर मुस्कुराना सीख लो। Disclaime Guest writer कॉलम…

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मेहमान लेखक 

Guest Writer : श़कलें बदल-बदल के थक सा गया हूं मैं, बेअकल के हाथों में क्या किताब दूं

टेढ़े सवालों का क्यों सीधा जवाब दूं, शब ए गम के मारो को क्या गुलाब दूं। फलसफा बुनता हूं चरागों के धुंए से, मदहोश के हाथों में क्या शराब दूं। जिनका दिया हर दर्द आदत सा बन गया है, क्या गुस्ताखीयों पे उनकी कोई ख़िताब दूं। श़कलें बदल-बदल के थक सा गया हूं मैं, बेअकल के हाथों में क्या किताब दूं। ‘बांके’ तेरी हसरत तुझी को मुबारक, किस्मत की बेरुखी का क्या हिसाब दूं। Disclaime Guest writer कॉलम के जरिए आप भी अपनी बात, शेर-ओ-शायरी, कहानी और रचनाएं लोगों तक…

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मेहमान लेखक 

Guest Writer : रिश्तो की वफादारी में है दर्द तो बहुत लेकिन, बेशक झेलने वाले को कह दो

कह दो ख्याल मुझको जो चाहे लिख दो, अल्फाजों कुछ तो हाल ए दिल कह दो। इतनी फुर्सत नहीं मुझे की बहक जाऊं बार-2, कोई गुस्ताखी हुई हो तो शिकवा कह दो। दर्द देने को हजार जख्म है हाजिर, अश्कों बह जाओ ऐ नजर कह दो। कुछ तो वजह होगी वो खामोश है क्या यूंही, वो बेजुबां नहीं है ये तो ज़ुबां कह दो। रिश्तो की वफादारी में है दर्द तो बहुत लेकिन, बेशक झेलने वाले को ‘बांके’ कह दो। Disclaimer Guest writer कॉलम के जरिए आप भी अपनी बात,…

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बड़ी बोल मेहमान लेखक 

Guest Writer : उम्मीदों का सफीना तो बढ़ाओ, समंदर से अभी दूर बहुत है तूफां

अश्कों छोड़ दो मेरे दस्त ए मिज़गां, हाल ए दिल कहभी सकती नहीं जुबां। एक ही दामन तार-2 बार-2 करते हो, क्या आदत है हकीकत कर सकते नहीं बयां। ज्यूं इश्क की सियाही जिंदगी रंग सकती है, हाफिज़ तेरी कलम से होगा नहीं अयाॅं। चाहत ने बदल डाला है आलम ए निज़ाम, तेरी सोहबत में चहकती है मौज ए रवां। ‘बांके’ उम्मीदों का सफीना तो बढ़ाओ, समंदर से अभी दूर बहुत है तूफां। Disclaimer Guest writer कॉलम के जरिए आप भी अपनी बात, शेर-ओ-शायरी, कहानी और रचनाएं लोगों तक पहुंचा…

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बड़ी बोल मेहमान लेखक 

Guest Writer : करीब रख़्खो सफर में दूर के चर्चे, आने वाले मौसमों के बीज बोने दो

दिल की बातों का असर दिल पे ज़रा होने दो, दिल हल्का हो जाएगा नज़र रोने दो। ख्वाब है बेश़क हकीकत से ज़ुदा लेकिन, मैं तो ख्वाबों के भरोसे हूं मुझे सोने दो। मैं वक्त की कलम से तकदीर नहीं लिखता, जो होना था हो रहा है उसे होने दो। करीब रख़्खो सफर में दूर के चर्चे, आने वाले मौसमों के बीज बोने दो। बुला के काफ़िर मुझे लोगों मुस्कुरा लो जरा, और ‘बांके’ को तकल्लुफ उठा लेने दो। Disclaime नोट- Guest writer कॉलम के जरिए आप भी अपनी बात,…

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बड़ी बोल मेहमान लेखक 

Guest Writer : शिकायत मैं नहीं करता वो तो हालात कहते हैं, हासिल तेरी सांसो को हम एहसास कहते हैं

रहूं खामोश भी तेरे साथ तो हर बात हो जाती है, तुममें तुमसे तुमपे ही पूरी कायनात हो जाती है। शिकायत मैं नहीं करता वो तो हालात कहते हैं, हासिल तेरी सांसो को हम एहसास कहते हैं, नहीं मुमकिन तेरी सोहबत मगर तू दूर कहां है, फिक्र में तेरी जाने कब दिन-रात हो जाती है। ठहर जा मैं नहीं कहता किसी लम्हे से कभी भी, तेरी दूरी हर लम्हा सताती है अभी भी, मौजूद हर हालात भी मायूस हैं बहुत, हर ज़िक्र में शामिल तेरी खुशबू हो जाती है। लिखते…

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बड़ी बोल मेहमान लेखक 

Guest Writer : किस्मत की बात है मैं किस्मत के भरोसे नहीं, कीमिया नहीं यहां मर्ज है बहुत

किसी का शक किसी का सच, किसी को ताज्जुब है बहुत, किसी का झूठ उम्दा है, कोई खुदगर्ज है बहुत। आराम तलबी में फना है जिंदगी यूंहि, सुकूं के जिक्र भरको है जिंदा जिंदगी यूंहि, सफर की बात रस्ते में साये से क्यों करूं, मयनोशी से बहकने में यहां हर्ज है बहुत। रहा खामोश तो सुना खुद के लिए मग़रूर, हां अस्मत के जिक्र पर चीखूंगा भी जरूर, जो साफगोई से रखते हैं बहुत दूरी, उनके कचहरी में किस्से दर्ज़ हैं बहुत। मरासिम के मायने किसने कितने समझे हैं, सुदो…

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बड़ी बोल मेहमान लेखक 

Guest Writer : और उनको खुशकिस्मत कैसे कह दूं मैं, जिनके चिराग में गैरों का लहू जलता है

रंगे जूनून कभी-कभी रंगे सुकून लगता है, बिस्तर पर पड़ा जिस्म सारी रात जगता है। परवाह बेपरवाह की अक्सर वोहि करते हैं, जिन्हें खुद का साया बोझ बड़ा लगता है। और उनको खुशकिस्मत कैसे कह दूं मैं, जिनके चिराग में गैरों का लहू जलता है। आ फिर से आईने तुझे तोड़कर बिखेर दूं, मुझे आज अपना चेहरा फिर से तन्हा लगता है। उसके घर का पता मैं भूल भी गया तो क्या, वो ‘बांके’ है वो सबकी खबर रखता है। Disclaimer Guest writer कॉलम के जरिए आप भी अपनी बात,…

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बड़ी बोल मेहमान लेखक 

Guest writer : वह रोटी हैं, कपड़ा हैं, हैं मकान, बस चाहें मान-सम्मान, पिता होते हैं महान

वह रोटी हैं, कपड़ा हैं, हैं मकान, वह नन्हे से परिंदे का बड़ा आसमान, उनसे मां की चूड़ी, बिंदी और सुहाग है, वह हैं तो बच्चों के सारे सपने हैं, वो हैं तो बाजार में सारे खिलौने हैं। उनके आगे धरती पर सब बौने हैं। बस चाहें मान-सम्मान, पिता होते हैं महान। कोमल से शरीर पर नया सा कपड़ा पहना कर, आपने खूब हंसाया है। मेरी हर जिद को सीने से लगाया, नन्हे से कदमों को चलना सिखाया।जब गिरता था ठोकरों से तो चलना सम्भलना बताया। बस चाहें मान सम्मान,…

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