Varanasi धर्म-कर्म 

#छठ_महापर्व : खरना के साथ 36 घण्टे का निर्जला व्रत शुरू, शुक्रवार को अस्ताचलगामी सूर्य को दिया जाएगा पहला अर्घ्य

Varanasi : महापर्व छठ पूजा के दूसरे दिन गुरुवार को व्रतियों ने पूरे दिन उपवास रहने के बाद शाम में खरना किया। इससे पहले महिलाओं ने कोरोना से बचाव को ध्यान में रखते हुए घरों में ही स्नान किया और प्रसाद बनाईं। खरना का मतलब है पूरे दिन का उपवास, व्रती व्‍यक्ति इस दिन जल की एक बूंद तक ग्रहण नहीं करते। शाम होने पर गन्ने का जूस या गुड़ के चावल या गुड़ की खीर का प्रसाद बनाकर व्रतियों ने ग्रहण किया और प्रसाद स्वरूप वितरण किया। इसके साथ ही 36 घण्टे का निर्जला व्रत प्रारम्भ हो गया। दूसरी ओर जो इस पर्व पर सिर्फ डाला चढ़ाते हैं, उन लोगों ने मौसमी फल, नारियल, डलिया, सूप, माला-फूल व पूजन सामग्री की खरीदारी की।

शुक्रवार यानी 20 नवंबर की शाम अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। सूर्य षष्ठी को छठ पूजा का तीसरा दिन होता है। शाम के अर्घ्य के बाद रात में छठ माता के गीत गाये जाएंगे। वहीं 21 नवंबर काे सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। सुबह सूर्य निकलने से पहले ही व्रती घाट पर पहुंचेंगे और उगते सूर्य को अर्घ्य देंगे। अर्घ्य देने के बाद घाट पर छठ माता से संतान रक्षा और घर परिवार की सुख शांति की कामना करती हैं। इस पूजन के बाद सभी में प्रसाद बांट कर फिर व्रती खुद भी प्रसाद खाकर व्रत खोलेंगी। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तक चार दिनों तक यह पर्व होता है।

बैरिकेडिंग का कार्य पूर्ण

अपर नगर आयुक्त देवीदयाल वर्मा ने बताया कि छठ पूजा के मद्देनजर बैरिकेडिंग का कार्य पूर्ण हो चुका है। अस्थाई चेंजिंग रूम का कार्य अंतिम चरण में है। सफाई कार्य जारी है। घाटों पर अर्पण कलश लगाया गया है।

घाटों और सरोवरों पर होंगे पूजा

डीएम कौशल राज शर्मा की ओर से मीडि‍या में बयान जारी कि‍या गया कि‍ काशी के सभी घाटों और सरोवरों पर शुक्रवार शाम और शनि‍वार सुबह छठ पूजा का आयोजन पूरी परंपरा के साथ नि‍भाया जाएगा। इसके लि‍ये वाराणसी जि‍ला प्रशासन, पुलि‍स वि‍भाग और एनडीआरएफ की टीम तैयारी कर चुकी है।

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