Varanasi धर्म-कर्म 

#छठ_महापर्व : घर के आंगन में उतरेंगी छठ मइया, व्रती महिलाएं आज करेंगी खरना

Varanasi : लोकआस्था का चार दिवसीय महापर्व बुधवार से नहाय-खाय के साथ शुरू हो गए। गुरुवार को व्रती महिलाएं खरना करेंगी और इसके साथ 36 घण्टे का निर्जला व्रत प्रारम्भ हो जाएगा। सुबह से महिलाओं का व्रत प्रारम्भ हुआ। शाम तक उपवास रहेंगी। शाम को चूल्हे को स्थापित कर अक्षत, धूप, दीप व सिंदूर से उसकी पूजा करेंगी। इसके बाद प्रसाद के लिए रखे हुए आटे से फुल्के तथा साठी की खीर बनाएंगी। चौके में ही ‘खरना’ करेंगी। यही रसियाव-रोटी खाने के बाद उनका छठ व्रत शुरू हो जाएगा जो शनिवार को प्रात: कालीन सूर्य को अर्घ्य देने के साथ पूर्ण होगा। सायंकालीन सूर्य को शुक्रवार को अर्घ्य दिया जाएगा।

धार्मिक मान्यता के अनुसार छठ मइया को सूर्य देव की बहन कहा जाता है। महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु, रोग मुक्ति, सुख और समृद्धि व संतान की रक्षा के लिए व्रत रखती हैं। भगवान सूर्य बुद्धि व आरोग्य के देवता हैं। इनकी आराधना से बुद्धि-विवेक और धनधान्य के अलावा कुष्ठ व चर्म रोग सहित अन्य असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है।

बाजार में भी रौनक

छठ महापर्व को लेकर बाजार में रौनक देखने को मिली। आस्था के इस महापर्व के मद्देनजर लोगों ने मिट्टी के बर्तन, कलश, घैला, दीया, ढकना, कोसी एवं डागरा, छैटा, सूपा, सुपली, चगेली, टोकरी, रस्सी व फल खरीदे। कोरोना के चलते छठ पूजा का सामान भी महंगा हो गया है। पिछले साल की अपेक्षा 20 से 25 फीसदी तक दाम बढ़े हैं।

घाटों पर भीड़ न करने की अपील

इस बार कोरोना महामारी के चलते ज्यादातर छठ पूजा समितियां लोगों को अपने घरों या आसपास ही पूजा करने की अपील कर रही है। साथ ही घर से बाहर अर्घ्य के दौरान लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने और मास्क लगाने की हिदायत दी जा रही है। जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने भी घाटों पर भीड़ न करने की लोगों से अपील की है। बताया कि पूजन करने वाले घरों से सीमित लोग ही घाटों और कुंडों पर जाए। सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क अनिवार्य रूप से रखे। भीड़ न जुटाए। हो सके तो घरों से पूजन-अर्चन करें।

घरों पर भी हो रही अर्घ्य देने की तैयारियां

पतालेश्वर बंगालीटोला निवासी भुल्लन पटेल बताते हैं कि हर बार छठ करने के लिए गंगा घाट पर जाते थे, लेकिन कोरोना के कारण इस बार लोग घर पर ही कृत्रिम तालाब का निर्माण कर सूर्यदेव को अघ्र्य देने की तैयारी कर रहे हैं। घर पर गंगा का नजारा तो नहीं मिलेगा, लेकिन कोरोना से पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। ग्रामीण इलाकों में बहुत से लोगों ने छतों पर ईंटों की मेड़ सजाकर उसमें तिरपाल और प्लास्टिक बिछाकर कृत्रिम तालाब का निर्माण किया है। लोगों में इसे लेकर बहुत उत्साह है कि अब अपने घर-आंगन में छठ की पूजा करने जा रहे हैं।

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