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काशी की रंगभरी एकादशी : गौरा को विदा कर कैलाश चले महादेव, नेग में होली खेलने की दी अनुमति, बनारसियों पर छाया होली का उल्लास

Varanasi : सात वार और नौ त्यौहार की खासियत वाले शहर बनारस का हर दिन उत्सवी होता है और जब रंगभरी एकादशी का हो तो पूछना ही क्या? इस खास पर्व पर सोमवार को मौज-मस्ती का एक ही अलग ही रस बना और बनारस उसमे डूबा सा नजर आया।

आमलकी एकादशी पर सोमवार को अपने भोले बाबा का काशीवासियो ने विहल मन से गौना उत्सव मनाया। महंत कुलपति तिवारी के आवास पर सुबह मंगल बेला में रजत प्रतिमा का षोडशोपचार पूजन किया गया। बाबा बोलेनाथ को साज के जतन किये। मां पार्वती का सोलह श्रृंगार किया गया गया।

दोपहर आवास पर दर्शन शुरू हुआ। दूल्हा शंकर और दुल्हन गौरा की अनूठी छवि निरख भक्तों का मन विभोर हुआ। दर्शनार्थियों ने बाबा को मला पहला गुलाल और पाप-ताप से मुक्ति का आशीष लिया।भक्ति के भाव से रीझे औघड़दानी ने रंग-तरंग व होली-हुडदंग का नेग दिया।

सोमवार को ब्रह्म मुहर्त में ही महंत आवास से होते बाबा के गौना बरात का उल्लास मंदिर परिसर में छाने लगा। सपरिवार पालकी में सवार बाबा ने भक्तों को दर्शन दिया। शाम चल रजत प्रतिमाओं का आरती कर गौरा को ससुराल के लिए विदा किया।

काशीवासी बने बाराती और उल्लास हवा में कुछ इस तरह घुले की कई कुंतल गुलाल से वातावरण लाल हो गया। श्रद्धा-भक्ति के दिव्य लोक की झांकी दर्शन को आस्था का समुंद्र इस रंग में रंगता हुआ इस छोर से उस छोर तक बहता चला गया।

काशी की मिजाज से मेल खाते, बाबा और भक्तों को भी भाते इस अनूठे अनुष्ठान में व्यवधान न हो, इसका ध्यान रखते हुए शाम की सप्तऋषि आरती और भोग आरती किया जाएगा।

काशी पुराधिपति के गौने के अवसर महंत आवास पर भक्तिमय, संगीतमय शिवांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें काशी सहित पूर्वांचल के कलाकारों ने विवाह गीत, लोक गीत, गारी गाये।

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