Varanasi 

मजबूरियों को गिनाया : एडवोकेट नमिता झा ने कहा- बढ़ती महंगाई ने तोड़ी लोगों की कमर

Varanasi : एडवोकेट नमिता झा का कहना है कि लगातार जरूरत की वस्तुओं के मूल्य में हो रहे बेतहाशा वृद्धि ने आमजन की कमर तोड़ दी है। कोरोना के बाद महंगाई की मार ने आमजन को तंगहाली के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। अक्टूबर 2019 के बाद खुदरा महंगाई केवल एक बार चार फ़ीसदी के स्तर को छुआ है।

बाकी हर महीने में यह न सिर्फ चार फीसदी से ज्यादा रही बल्कि ज्यादातर समय यह उससे भी ऊपर गयी हैं। पिछले सात महीने से लगातार महंगाई दर बढ़ रही है। देश में लगातार खाद पदार्थों, खाद्य तेल पेट्रोल डीजल गैस की कमीतो में बेतहाशा वृद्धि आमजन को कमर तोड़ रही है। पिछले कुछ दिनों में अनाज, दूध, सब्जी, पेट्रोल, घरेलू सिलेंडर, सीएनजी, पीएनजी की कीमतों में वृद्धि हुई है। इसी तरह ज्यादा उपयोग किए जाने वाले मशहूर काफी ब्रांडो एवं चाय पत्ती के दामों में वृद्धि हुई है। 1 अप्रैल से कई जरूरी दवाओं की कीमतें भी बढ़ गई हैं।

चिंता की बात यह है की करोना संकट से उपजे हालत में आय के संकुचन के चलते महंगाई की मार दोहरी नजर आ रही है। यही वजह है कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच पिछले सप्ताह आरबीआई ने 4 सालों में पहली बार अपनी रेपो दर में वृद्धि करने का एलान किया और इसे बढ़ाकर 4.40 प्रतिशत कर दिया। करोना महामारी के बाद घटी आए के बीच आसमान छूती महंगाई से आम आदमी पर चौतरफा मार पड़ी है। बीते एक साल में पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस, दूध, चीनी, दाल से लेकर खाने के तेल की कीमतों में भयंकर उछाल आया है इससे कम आय, नौकरी पेशा और मध्यमवर्गीय की मुश्किलें बढ़ गई है।

उनका कहना है कि बता दें कि पिछले साल 3 नवंबर को केंद्र ने पेट्रोल पर 5 रुपए और डीजल पर 10 रुपए सीमा शुल्क घटा दिया था ताकि पूरे देश में रिटेल कीमतों में कमी की जा सके। इसके बाद तमाम राज्य सरकारों ने वैट को घटा दिया था जिससे लोगों को बढ़ी हुई पेट्रोल डीजल की कीमतों से थोड़ी राहत जरूर मिली थी। लेकिन एक बार फिर पेट्रोल डीजल की कीमतों में उछालने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। महंगाई की मार ऐसे है की गरीब तो गरीब मध्यम वर्ग के लोगों को भी अब चुभने लगी है। लेकिन महागाई एकाएक इतना क्यों बढ़ गया इस सवाल का कोई ठोस जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है।

सरकार उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने में लगी हुई है परंतु इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। महंगाई के खिलाफ विपक्षी पार्टियों के भी स्वर कमजोर पड़ गए है। केंद्र एवं राज्य सरकारों की अति शीघ्र महंगाई को काबू में करने का उपाय करना चाहिए, अन्यथा बेरोजगारी के साथ-साथ महंगाई से त्रस्त देश की जनता लंबे समय तक चुप बैठने वाली नहीं है।

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