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नवरात्रि के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी का दर्शन-पूजन : मां के जयकारों से गुंजायमान हुआ मंदिर परिसर, भक्तों के सभी कष्टों को करती हैं दूर

Varanasi : शारदीय नवरात्र का आज दूसरा दिन है। नवरात्र के दूसरे दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने मां ब्रह्मचारिणी के स्वरूप का दर्शन किया। मंगलवार की भोर से ही भक्त लाइन में लगे रहे। घण्टा-घड़ियाल व मां के जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा। महिलाओं ने नारियल-चुनरी के साथ ही साथ देवी को लाल चूड़ी, सिंदूर, आलता आदि भी अर्पित किए। प्रतिवर्ष द्वितीया तिथि पर दर्शन-पूजन करने वाले नेमी रात्रि दो बजे से ही मंदिर पहुंचे लगे थे।

मंदिर खुलने के समय तक भक्तों की कतार सब्जी मंडी पार करते हुए काल भैरव के मंदिर तक जा पहुंची थी। दोपहर तक मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए लंबी कतार थी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। रामघाट स्थित ब्रह्मचारिणी मंदिर में सुबह से श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। लोगों ने शीश नवाकर मां से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। दो वर्षों तक नवरात्र व तीज-त्योहार पर कोरोना का साया रहा। इस बार हालात सामान्य हैं।

ऐसे में नवरात्र में लोगों में उत्साह देखने को मिल रहा है। नवरात्र के प्रथम दिन लोगों ने माता के शैलपुत्री स्वरूप का दर्शन किया। दूसरे दिन ब्रह्मचारी के दर्शन-पूजन के लिए देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। ब्रह्मचारिणी के दर्शन का विशेष लाभ मिलता है। सुबह से ही मां के भक्त कतार में खड़े अपनी बारी का इंतजार करते देखे गए। बुजुर्ग, महिला, बच्चों का उत्साह भी देखते बन रहा था। देश के कोने कोने से पहुंच रहे भक्त विधिवत दर्शन पूजन के बाद निहाल नजर आए।

ये है मान्यता

मान्यता है कि माता ब्रह्मचारिणी के सहयोग से ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि की संरचना की थी। माता के दर्शन-पूजन से भक्तों के सभी पाप व बाधाएं नष्ट हो जाती हैं। ब्रह्मचारिणी मंदिर के महंत पंडित राजेश्वर सागर ने बताया कि आश्विन शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को माता के ब्रह्मचारिणी स्वरूप से दर्शन-पूजन का विधान प्राचीन काल से चला आ रहा है। इनके दर्शन से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। कहा कि देवी की उत्पत्ति के संबंध में ऐसी मान्यता है कि जब भगवान शंकर के आदेश पर ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना शुरू की तो पहली बार में संरचना नहीं हो पा रही थी। इसके बाद ब्रह्मा जी भगवान शिव के पास वापस गए। भगवान शिव ने उन्हें शक्ति की आराधना करने को कहा। इस ब्रह्मा जी ने तपस्या की, तब शक्ति प्रकट हुईं और ब्रह्मदंड प्रदान किया। इसी ब्रह्मदंड से सृष्टि की संरचना हुई। इसकी वजह से उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा। इनकी उपासना करने वालों को धन, धान्य की कभी कमी नहीं होगी। देवी की कृपा सदा बनी रहेगी। भगवती का पंचामृत से षोडषोपचार पूजन और महाआरती की गई। शाम चार बजे अन्न व फलहार का भोग लगेगा। रात्रि में भी पूजन और आरती होगी। बताया कि यदि किसी प्रकार की बाधा आ जाए तो मंगलवार के दिन मंदिर में माता के दर्शन-पूजन और मंत्र का जप करें। इससे बाधाएं टल जाती हैं और सद्बुद्धि आती है। दर्शनार्थी पूनम ने कहा कि मां बहुत दयालु हैं। सभी भक्तों का दुख दूर करती हैं।

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