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दास्तान-ए-लाचारी : चोटिल तो यहां हर परिंदा है, फिर से उड़ सका वही जो जिंदा है

एनीमेशन मूवी सवारने वाले इंजीनियर प्रदीप लाचारी में कर रहे मनरेगा के तहत मजदूरी

बनी बनाई फिल्मों को थ्रीडी में कन्वर्ट करने का काम करती है कंपनी

Varanasi : चोटिल तो यहां हर परिंदा है, फिर से उड़ सका वही जो जिंदा है। असल में, कोरोना की वजह से खराब हुए आर्थिक हालात के दौर में परदेस से वापस लौटने वाले कम पढ़े लिखे लोग काम के लिए परेशान हैं। दूसरी ओर, कंप्यूटर के क्षेत्र में पारंगत युवा भी लौटकर जिंदगी जीने के लिए काम ढूंढ रहे हैं। वक्ति हालत ये हैं कि जो हाथ कभी कंप्यूटर के कीबोर्ड और माउस के सहारे बेहतरीन काम से फिल्म उद्योग में स्थापित थें, वे भी अब काम न होने के चलते मनरेगा में माटी खनने और सड़क पाटने को लाचार हैं। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के मार्टीनगंज तहसील भादों गांव के एनीमेशन आर्टिस्ट प्रदीप राजभर की दास्तान भी कुछ ऐसी ही है। लाचारी में वह गांव में मनरेगा के तहत मजदूरी कर रहे हैं। 

दो बार मिला बेस्ट परफार्मर ऑफ द ईयर का अवार्ड

कहानी यूं है, मार्टीनगंज से प्राइमरी शिक्षा पूरी होने के बाद प्रदीप ने अजमेर से कप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की। काम सीखने के बाद 2016 में उन्होंने चंडीगढ़ के मोहाली में देश की एक बड़ी कंपनी में करियर शुरू किया। यह कंपनी बनी बनाई फिल्मों को थ्रीडी में कन्वर्ट करने का काम करती है। कंपनी में प्रदीप एनीमेशन आर्टिस्ट थें। गुजरते वक्त के साथ वह विजुअल इफेक्ट, थ्रीडी कनवर्जन, एनीमेशन सर्विसेज के क्षेत्र में पारंगत होते गए। अपने काम के बदौलत ही दो बार बेस्ट परफार्मर ऑफ द ईयर का अवार्ड भी जीते। लेकिन लॉकडाउन ने उनकी रफ्तार पर लगाम लगा दिया। देश में हुई तालाबंदी के बाद जब तक प्रोजेक्ट रहा तब तक कंपनी के पास काम था। मुंबई फिल्म इंडस्ट्री पर तालाबंदी का कंपनी पर भी असर पड़ा। लिहाजा, न चाहते हुए भी प्रदीप को गांव आना पड़ा। 

अवतार और स्पाइडरमैन पर किया काम

प्रदीप राजभर के पिता दिल्ली में ड्राइवर हैं। छोटे भाई मुंबई में इलेक्ट्रिशियन थें। सभी गांव लौट आए। प्रदीप की मां शोभावती का जॉबकार्ड बना है। मौजूदा समय में गांव में बाहा (नहर से खेतों तक पानी पहुंचाने का रास्ता) सफाई का काम चल रहा है। प्रदीप भी इन दिनों इसमें काम कर रहे हैं। जॉबकार्ड न होने के चलते मां के जॉबकार्ड पर वह बाहा की सफाई में लगे हैं। जिस कंपनी में प्रदीप काम करते हैं वह काफी बडे स्तर पर काम करती है। दुनियाभर में अरबों-करोड रुपये कमाने वाली मूवी अवतार और स्पाइडरमैन पर भी प्रदीप के हाथों ने काम किया है।

बेरोजगारी पर सीएमआईई की रिपोर्ट

कोरोना संकट और लॉकडाउन की वजह से लोगों के रोजगार में जबरदस्त कमी आई। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के मुताबिक, 3 मई को खत्म हफ्ते में बेरोजगारी दर बढ़कर 27.11 फीसदी थी, यानी हर चार में से एक व्यक्ति बेरोजगार था। यह अब तक की सबसे ज्यादा बेरोजगारी की दर है। सीएमआईई की रिपोर्ट के अनुसार, बेरोजगारी की दर शहरी क्षेत्रों में सबसे अधिक 29.22 फीसदी रही, जहां कोरोना के संक्रमण के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों की वजह से रेड जोन की संख्या सबसे अधिक है। देहात क्षेत्रों में बेरोजगारी की दर 26.69 फीसदी थी।

यूपी में वापस लौटे तकरीबन 30 लाख लोग!

बाहर कमाने के लिए गए तकरीबन 30 लाख से ज्यादा लोग काम बंद होने के कारण दूसरे राज्यों से उत्तर प्रदेश लौटे हैं! योगी सरकार ने अन्य राज्यों से लौटने वालों के लिए रोजगार उपलब्ध कराने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। जिन क्षेत्रों में रोजगार दिया जाएगा, उसमें रेडीमेड गारमेंट, खाद्य प्रसंस्करण, गो आधारित उत्पाद, फूलों की खेती और फूलों से बनने वाले उत्पादों से जुड़े उद्योग शामिल हैं। सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं में भी रोजगार देने के लिए कार्ययोजना और काम शुरू हो चुका है। ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी को रेडीमेड गारमेंट का हब बनाने को कहा है।

हर हाथ को काम मिले की नीति

बड़ी आबादी प्रभावित है। इनमें प्रवासी कामगार व श्रमिकों की संख्या काफी ज्यादा है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने लौटे सभी लोगों को रोजगार देने की मुहिम छेड़ रखी है। सीएम योगी की योजना सभी को उनकी कार्य क्षमता के मुताबिक रोजगार देने की है। परेशान लोगों की बड़ी मदद करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने जोरदार कदम बढ़ाया है। सरकार इस कठिन दौर में ‘हर हाथ को काम मिले की नीति’ पर काम कर रही है।

जब कुछ नहीं है तो करना ही पड़ेगा। अपनी विशेषज्ञता का काम मिलता तो ज्यादा संतुष्टि मिलती। कंप्यूटर की बजाय फावड़ा रास नहीं आ रहा है। एक-एक फ्रेम पर साफ्टवेयर पर काम कर उसे थ्री डाइमेंशनल बनाया जाता है। तकनीकी और अंगुलियों के पारंगत इंजीनियर ही इस बेहद बारीक काम को अंजाम दे पाते हैं। लॉकडाउन के चलते मुंबई ही नहीं दूसरे देशों के फिल्म उद्योगों पर भी ताला लगा है। अभी छह महीने तक काम शुरू होने की उम्मीद नहीं नजर आ रही है। 

प्रदीप राजभर, एनीमेशन आर्टिस्ट

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