Deepawali 2020 : उम्मीदों की दीया गढ़ रहीं हौसिला देवी, बना माल न बिकने का फिक्र

Santosh Kumar Gupta

Varanasi : वक्त गुजरने के साथ परम्पराएं भी धीरे-धीरे लीक छोड़ रही हैं। कोरोना काल मे मंहगाई के इस दौर में दीपावली पर अब पहलेवाली बात नहीं दिख रही है। इसका सीधा असर कुम्हार परिवारों के पुस्तैनी धंधे पर पड़ा है। प्लास्टिक व पालीथिन ने धंधे को जहां प्रभावित किया वहीं मिट्टी के बर्तनों की डिमांड घटने की वजह से कुम्हारों का पुस्तैनी धंधा चौपट हुआ है। मंहगाई के इस दौर में दीपावली पर तैयार माल बिकेगा या नहीं, यह चिंता कुम्हारों को सता रहा है।

कबीर का दोहा इस समय और प्रासंगिक है- माटी कहे कुम्हार से तूं क्या रौंदे मोय, एक दिन ऐसा आएगा मैं रौंदूंगी तोय। इसके अर्थ व माटी के बीच पीएम नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर बनने के संदेश से प्रभावित होकर हरहुआ के चक्का गांव की हौसिला देवी दीया, भडे़हर, गुल्लक, घरिया, परई, हांडी और पुरवा बनाने में जुटी हैं। उनका कहना है कि, उधार लेकर महंगी मिट्टी, उपली व पुआल खरीदकर मेहनत कर रही हूं। कोरोना काल मे मंहगाई के दौर में चिंता सता रही है कि बना माल बिकेगा या नहीं। यदि माल बिक गया तो अपनी दिवाली भी मन जाएगी अन्यथा मजदूरी करने को विवश होना पड़ेगा। वैसे उम्मीद पर लोग जीते हैं।

इन लोगों को भी खरीददारों का इंतजार

चक्का गांव के कुम्हार बस्ती में मुन्ना प्रजापति, गुलाब, राधेश्याम, इंद्रजीत, अमरनाथ, देवराज, जड़ावती देवी, प्रभावती, चंदा और मालती देवी दीया के साथ कुल्हड़, परई, हांडी, गुल्लक, भडे़हर और गुल्लक बनाया है। इन्हें भी खरीददारों का इंतजार है।