एडिटोरियल 

Editorial : दुबे हो या ददुआ, अपराधी समाज के कैंसर है, इन्हें नायक की तरह मत पेश कीजिये

यूपी बिहार में अपराधियों के हौसले इसलिए भी बुलंद होते हैं। क्योंकि यहां अपराधियों की जाति देखकर उसे जस्टिफाई किया जाता है। उसे अपने समाज के नायक की तरह पेश किया जाता है, और तो और अगर वह अपने प्रोटेक्शन के लिए चुनाव लड़ता है तो जितवा कर उसे माननीय बना दिया जाता है। अगर आप यूपी बिहार से हैं तो इस हकीकत को नकार नहीं सकतें। यहाँ राजनीति और अपराध का गठजोड़ हमेसा से चलता रहा है। अपराधी नेताओं का संरक्षण चाहते हैं, और नेता उन्हें अपने विरोधियों को हटाने और ठेके, काम पाने के लिए इस्तेमाल करते हैं।

विकास दुबे…ओह सारी माननीय विकास दुबे.(जैसा कि शिलापट्ट पर अंकित है) के साथ हुए पुलिस मुठभेड़ में हमारे 8 पुलिसकर्मी शहीद हो गयें। बाकी घटनाक्रम सबको पता ही है। बताया जाता है कि सरकार किसी की भी रही हो। कुख्यात विकास को राजनीतिक संरक्षण हर सरकार में मिलता रहा है। चर्चा यह भी रही कि एक सत्ताधारी दल के विधायक से इसकी पटरी नहीं बैठ रही थी। मगर सत्ता के कुछ नेताओं का इसपर वरदहस्त बना रहा। यही कारण है कि यह हार्डकोर अपराधी अब तक बचता चला आ रहा था।

ध्यान रहे, जब तक अपलु पपलू टॉइप के लवंडे श्रीप्रकाश शुक्ला, ददुआ कुर्मी, मोख्तार अंसारी, मुन्ना बजरंगी,बृजेश सिंह जैसे हार्डकोर अपराधियों को नायक की तरह पेश करते रहेंगे। तब तक विकास दुबे टॉइप के अपराधी माननीय बनते रहेंगे। और हां, अपराधीयों को आप भले ही अपनी जाति से जोड़कर उसका महिमामंडन करें।मगर वह शुद्ध अपराधी होता है। विकास दुबे ने कई ब्राम्हणों की हत्या की थी।सन्तोष शुक्ला कल विकास दुबे से मुठभेड़ में शहीद हुए सीओ देवेन्द्र मिश्रा भी ब्राम्हण थें।

विकास दुबे के साथीयों के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की सूचना आ रही है। पुलिस किसी भी हाल में उसे या उसके साथियों को बख्शेगी नहीं। देर सबेर विकास दुबे भी मारा जाएगा। वरना अगर वह जीवित रह गया तो। जाति देखकर जय जय करने वाले उसे विधायक बनाने के लिए आतुर हो जाएंगे।

याद रखिये अपराधी समाज के कैंसर होते हैं। अगर अपराधीयों को नायक की तरह पेश करेंगे तो कल को आपका बेटा आपका भाई भी उसी तरह बनना चाहेगा। और प्रेरक आप होंगे सिर्फ आप।

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