एडिटोरियल 

Editorial : आतंकी उनके रहनुमा, सुरक्षा बल के जवान दुश्मन-ए-जां

प्राकृतिक संपदा से समृद्ध कश्मीर की खूबसूरत फिजाओं में अपने ही देश और सुरक्षा बलों के प्रति नफ़रत की जड़ें इतनी गहरी हैं की वहां अमन, चैन,।शांति जैसी बातें निरर्थक हो जाती हैं। हाल यह है की सुरक्षा बल कश्मीरियों के हाथ में अपना कलेजा भी निकाल कर दें तो वह तब उनसे उतनी ही शिद्दत से नफरत करेंगे, जैसे हम दुश्मनों से करते हैं। उनकी नजर में आतंकी उनके रहनुमा और सुरक्षा बल के जवान “दुश्मन ए जहांन” होते हैं। ऐसा आजादी के बाद से ही होता आ रहा है। क्योंकि पाकिस्तान परस्त अलगाववादीयों ने उनका ब्रेनवॉश कर उनके मन मस्तिष्क में सेना और देश के प्रति नफ़रतें और पाकिस्तान के प्रति प्रेम भरा है। और जो बातें बहुत लंबे समय तक दिमाग में भर दी जाती हैं। इंसान उसी को सच मनाता है। चाहे वह सच हो या झूठ,नफरत हो या प्रेम।

खैर, कश्मीर के सोपोर में आतंकियों द्वारा सीआरपीएफ पर हमले के दरम्यान एक 65 वर्षीय बुजुर्ग बशीर अहमद नाम के व्यक्ति को उस वक्त मौत के घाट उतार दिया गया जब वह अपने तीन वर्षीय पोते के साथ कहीं जा रहा था। सीआरपीएफ के एक जवान पवन चौबे द्वारा मारे गए बुजुर्ग के पोते को बचा लिया गया। जिसकी प्रशंसा हर तरफ़ हो रही है। मगर जैसा कि होता आया है कि हर एनकाउंटर के बाद कश्मीरी एनकाउंटर पर सवाल उठाते हैं। आतंकियों को सामान्य नागरिक और एनकाउंटर को फर्जी बताते हैं। वह एक बार फिर देखने को मिला जब मारे गए बुजुर्ग के परिवार वाले बच्चे को बचाने की एवज में बजाय सीआरपीएफ का कृतज्ञ होने की वह अब सीआरपीएफ पर ही दोषारोपण कर रहे हैं और बुजुर्ग को गोली मारने का आरोप सीआरपीएफ पर ही मढ़ रहे हैं। सीआरपीएफ के लिए ऐसे आरोप लगना कोई नई बात नहीं है। जबकि सीआरपीएफ कश्मीर औऱ कश्मीरियों की रक्षा करने में सबसे ज्यादा शहादत देते हैं।

हाल ही में मैंने एक वीडियो देखा था, जिसमें कश्मीरी अलगाववादी झुंड बनाकर सीआरपीएफ जवानों से भरी एक बस पर जमकर पथराव करते हैं। जवान बस में ही चुपचाप पड़े होते हैं। मगर जब अलगाववादी बस में आग लगाने की कोशिश करते हैं। तब जवान बस से उतर के उन्हें जी भरके की पिटते हैं। आपके मन में यह सवाल जरूर आया होगा कि सीआरपीएफ उनकी पत्थरबाजी क्यों उतने देर तक झेलती रही। तो यह जान लीजिए सीआरपीएफ अधिकारी आतंकी हमलें पर तुरंत जवाबी कार्यवाही करते हैं। मगर आम कश्मीरीयों के प्रति नर्मरुख रखते हैं। कश्मीर में कई एंटी टेररिस्ट ऑपरेशन को सफलता पूर्वक अंजाम दे चुके एक सीआरपीएफ अधिकारी बताते हैं कि वहां की अवाम के दिलों में सैन्यबलों औऱ देश के प्रति जो नफ़रत भर दिया गया है। उस नफरत को मिटाने और कश्मीरियों को देश और सैन्यबलों के प्रति प्रेम पैदा करने में वक्त तो लगेगा। उनका यह भी कहना है कि पाकिस्तान को न तो कश्मीरियों से प्रेम है न ही कश्मीर से, पाकिस्तान को सिर्फ और सिर्फ उस पानी से प्रेम है जो कश्मीर से होकर पाकिस्तान जाती है। उनका यह भी कहना है कि देश में कश्मीरी नागरिको के साथ भेदभाव या दुर्व्यवहार की घटनाएं नहीं होना चाहिए। बल्कि उनके साथ प्रेम से पेश आना चाहिए। क्योंकि नफरत को नफरत से नहीं जीता जा सकता। दुर्व्यवहार पर वह कश्मीर जाकर यह नहीं कहते की दिल्ली या मुम्बई या फला जगह मेरे साथ यह हुआ बल्कि वह कहते हैं कि भारत में हमारे साथ यह व्यहवार हुआ।

खैर जो भी हो चितकबरी वर्दी वालों को कश्मीर में शहादत देकर आरोप सहने की आदत हो गयी है। मगर जोश और जज्बा हमेसा हाई ही रहता है।

जय हिंद,जय हिंद की सेना

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