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Editorial : स्त्री संवाद का अब बदलेगा रूप

छोटी मुँह बड़ी बात…! अब देखिए ना भारत के कुल इतने ( 21.54% )प्रतिशत आबादी में,इतनी प्रतिशत (60%) जनसंख्या महिलाओं की है। कहते है महिला- समूह आज से ही नही अपितु पौराणिक काल से ही पूजनीय है। कहा जाता है कि हर स्त्री में देवी का वास है। शायद इसीलिए स्त्री बेह्द खास है। अब वो चाहें घरेलू हो या कामकाजी मगर कार्य दोनों के सामान्य होते है।शारीरिक ,मानसिक रूप से कार्य करने वाली ये स्त्रियां पूरे घर को ही नही अपितु पूरे देश को ही संभाले हुई हैं। पुराने रीति रिवाज को बांध कर चलना बेह्द मुश्किल सफर लगता है। लेकिन क्या है ना स्त्री है तो रीति-रिवाज ,धर्म-कार्य,आचरण ये हर भारतीय स्त्री के भीतर पैदाइशी शामिल होता हैं। जिसे हम कह सकते है ” जैनेटिक गुण”। ये वो गुण है जो हर स्त्री अपने बेटी को भी देती हैं। समय के चक्र में भले ही कुछ गुण कम हो जाये मगर माँ की दी हुई ये जेनेटिक गुण में एक भूल चुक भी नही होती। दूसरे तरफ देखें तो एक समय था जब स्त्रियां घर के भीतर घर के कार्यो को सम्पन्न किया करती थी। तब उस दौर में पुरुषवाद हावी था। हर स्त्री घर के भीतर कार्य भी करती ओर अत्याचार भी सहती। वक़्त बदला…वक़्त के साथ नई सोच ने जन्म लिया और फिर क्या बन गयी हर स्त्री रानी लक्ष्मीबाई कूद पड़ी मैदान में मिटा दी पुरुषवाद को ,हर क्षेत्र में कार्य करके। हर क्षेत्र में पुरूष के साथ कदम से कदम मिलाकर और वक़्त के साथ पुरुषवाद का नेमप्लेट हट कर भारत में स्त्रीवाद का नेमप्लेट शामिल हो गया। विकास और भौतिकवादी,रूढ़िवादी युग मे स्त्रीवाद शामिल हुआ। इस सफर में हर स्त्री सम्मान के काबिलेतारीफ है। पूछिए क्यों क्योंकि वक़्त के पहिए में सबकुछ बदला मगर माँ की दी हुई जेनेटिक गुण आज भी हर स्त्री में शामिल है रीति-रिवाज, संस्कृति, आचरण सबकुछ। लेकिन शायद पुरुषवाद की सोच की सुई अभी भी वही टंगी है स्त्री को अबला समझ कर।

अरे ओह्ह पुरुषवाद समाज, जिस स्त्री को तुम अबला और बेबस समझने की भूल करते हो वही स्त्री ने तुम्हे नौ मेज अपने कोख में रखकर सींचा है। जिस स्त्री के साथ तुम आए दिन सामूहिक दुष्कर्म-बलात्कार ,रेप ,छेड़छाड़ जैसे अनेको कुकर्म करते हो उसी स्त्री ने सींच कर तुम्हे बड़ा किया है। पौरुष दिखाने वाले ये पुरूष भूल जाते है कि अगर तुम मर्द हो तो वो भी कोई अबला बेबस नारी नही। अपितु नारी अगर अपने पर आ गयी तो समस्त पौरुष दिखाने वाले पुरुषों का अंत होगा। एक ऐसा अंत जो शायद सृष्टि पर इतिहास बन जाएं। ज्यादा दूर नही जाऊंगी कुछ ही दिन में नौ दिन देवी शक्ति आदिभावनी जगदम्बा का दिन शुरू होना है। घर घर देबि का आगमन होगा। धूमधाम से देवी मूर्ति स्थापित होगी। धूमधाम से हर घर- घर मे कन्या पूजी जाएंगी।लेकिन यहाँ एक बड़ा सवाल मेरे मन मे कौंध रहा कि क्या वाकई में देवी सिर्फ नौ दिन के लिए ही है?क्या वाक़ई में एक कन्या जिसकी घर-घर पूजा होती है उसी कन्या के साथ फिर ये आए दिन दुष्कर्म कैसे?

“तू ही दुर्गा,तू ही काली है तू कर खड़ंगखप्परधारी”

ये उस कन्या की बात कि जा रही जिसकी पूजा समस्त संसार करता है। देश मे देवी का आगमन होता है क्यों?नही पता सोचिएगा या ना सोच सकिए तो जरा इतिहास को पलट कर देख लीजिएगा, याद आ जाएगा। उस कन्या का चेहरा जिसने दुष्ट महिषासुर का मर्दन किया। ये वही कन्या है जिसकी पूजा घर घर में कई जाती है। ये वही कन्या है जिसने मातृशक्ति को जन्म दिया। ये वही कन्या है जिसने आज के बदलते युग मे स्त्रीवाद को जन्म दिया।आज के बर्बर दुनिया मे मानवता की रखवाली का नाश हो चुका है। आज हर पौरुष दिखाने वाला मर्द महिसासुर हो चुका है, तो भूलिए मत जो नारी अबला है वो मर्दन करने वाली भी। मैं पूछना चाहती हूं देश मे पनपने वाले उस कीड़े से जिसका नाम समाज है। एक ऐसा वायरस जो घर घर मे अपना अड्डा जमाए बैठा है।जिसे ये तो दिखता है कि किसकी बेटी- किसकी बहू क्या कर रही। लेकिन इसी सीसीटीवी वाले समाज को ये नही दिखता की पुरुष वर्ग क्या कर रहा?या दिखते हुए भी ये उस फुटेज को कैप्चर करने में असहाय हो जाते है। देश मे नारी सशक्तिकरण का जुमला चरम सीमा पर तैनात है। हर कोई नारायण बन कर नारी पर हो रहे अत्याचार पर लाखों के क्लब,आए दिन डिबेट व भाषणबाजी में खर्च हो रहा। यहां तक ये कहा जा रहा कि इक्कसवीं सदी महिलाओं का सदी है तो मैं उसी सदी से पूछती हूँ, क्या महिला सदी में पुरूष प्रधान समाज खुद को बदलने के लिए तैयार हुआ?कितना हुआ?पूरा देश दुर्गा पूजा का उत्सव बड़ी ही श्रद्धा से करेंगे लेकिन उन्होंने मूर्ति के अलावा कभी औरतो और लड़कियों का सम्मान किया?चुप क्यों है?है कोई जवाब ,नही ना..तो फिर ये नौ दिन का दिखावा क्यों?क्यों है इतना दिखावा? असल में तो सम्मान तब पूर्ण होगा जिस दिन असल मे दुर्गा को पूजा जाएगा। सम्मान तब पूर्ण होगा जिस दिन महिलाओं पर अत्याचार का जुर्म बन्द हो जाएगा। सम्मान तब पूर्ण होगा जिस दिन लड़कियों के साथ होने वाले दुष्कर्म ,रेप,छेड़छाड़ बन्द हो जाएगा। अरे सम्मान तब पूर्ण होगा जिस दिन घर घर मे पूजनीय कन्या को नरभक्षी भक्षना छोड़ देगा। उसी दिन भारत मे असल नवरात्र मनाया जाएगा।

लेखिका- अकांक्षा श्रीवास्तव (स्वतंत्र पत्रकार)

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