Varanasi 

पानी में जो न दिखे वो छवि हूं मैं, जी हां! कवि हूं मैं : युवा कवियों के लिए प्रेरणास्त्रोत बनकर उभर रहे हैं अटल नारायण

Varanasi : प्रयागराज के एक सामान्य परिवार से निकल कर लेखन के क्षेत्र में अपना नाम कर इस कवि की कविता प्रदेश के बहुत से युवाओं को लुभा रही है। इसके साथ-साथ इनके द्वारा नवांकुर कवियों के प्रोत्साहन और मंच देने का कार्य भी किया जा रहा है।

बता दें कि अब 200 से अधिक ग्रामों में ‘नव कवि प्रतिभा खोज’ के अंतर्गत कवि गोष्ठियों का आयोजन किया जा चुका है।

इस कवि की एक पुस्तक जो प्रदेश के युवाओं में बहुत प्रचलित है, अज्ञात अंतर्मन। कहीं पे आलोचना, कहीं पे प्रेम और कहीं पर राष्ट्रभक्ति में सराबोर कर देनी वाली कवितायें इस पुस्तक में आपको मिलेंगी ऐसा लेखक का दावा है।


इस पुस्तक को लिखने में अटल नारायण ने, अपने एक सामाजिक कार्यकर्ता रूप में, एक तकनीकी और पी आर-संचार क्षेत्र में पेशेवर के रूप, और सरकार में एक सर्वोच्च पदाधिकारी की प्रशासनिक टीम का नेतृत्वकर्ता के रूप में प्राप्त अनुभव को झोंक दिया है।

लेखक की जीवन यात्रा में आए उतार-चढ़ाव ने उनके विचारों को समृद्ध किया है, उनके दर्शन को आकार दिया है। इस युवा कवि द्वारा लिखी गई कविताओं का संग्रह उनकी प्रकाशित पुस्तक – अज्ञात अंतर्मन में अच्छी तरह से परिलक्षित होता है।

युवा कवि एवं सामजसेवी अटल नारायण से बातचीत के कुछ अंश- आपने कविता लिखना कैसे शुरू किया और आपकी प्रेरणा का स्रोत क्या था? मेरे लिए प्रेरणा के कई स्रोत रहे हैं। मैं प्रकृति के छोटे-छोटे विवरणों, जिन स्थानों पर मैं जाता हूं, जिन लोगों से मिलता हूं, और अपने विविध जीवन के अनुभवों की सुंदरता से अभिभूत हूं।

यह कोई भी हो सकता है, स्मारक, पेड़, गीत, या सूर्य के नीचे कुछ भी। कवि बनने से पहले के बारे में बताएं? जितना की मुझे कविता पे काम करना है, उससे कहीं ज़्यादा उन कवियों के लिए काम करना है, जिनके पास समाज में परिवर्तन लाने की क्षमता है, लेकिन उन्हें उचित मंच नही मिल पा रहा है।

मैंने एक इंजीनियर के रूप में सेवा देना शुरू किया और बाद में कॉर्पोरेट डिजिटल टेलीकॉम विशेषज्ञ के रूप में काम किया है। पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के कार्यालय में, मैं तकनीकी टीम का निरीक्षण करता था और पूरे सोशल मीडिया और व्यक्तिगत कार्यालय के कर्मचारियों का प्रभारी था।

मैंने अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में पांच से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं। आपके लिए कविता का क्या मतलब है? आप क्यों लिखते हैं? मेरे लिए कविता वही है जो शरीर के लिए आत्मा है। अपनी आध्यात्मिक आवश्यकता को पूरा करने के लिए मैं कविताएं पढ़ता और लिखता हूं।

यह मेरी खुशी की जगह, आंतरिक शांति और इस विस्तृत और विविध दुनिया को समझने का मौका देने का मेरा प्रवेश द्वार है।

आज के समाज में कवि की क्या भूमिका है? कवियों ने सहस्राब्दी के लिए एक सामाजिक दर्पण के रूप में कार्य किया है। समाज जैसा है, ठीक वैसा ही प्रतिबिंबित करते हुए, उसके सभी गुणों और दोषों को दिखाया गया है।

कवियों ने सकारात्मक बदलाव लाने के लिए विचार और कर्तव्यनिष्ठा से काम करना जारी रखा है और जारी रखना चाहते हैं। एक कवि को समाज का आलोचक और प्रवक्ता दोनों होना चाहिए, उन लोगों की आवाज बनने का प्रयास करना चाहिए जो खुद के लिए बोल नहीं सकते।

अपनी आगामी पुस्तक परियोजना के बारे में बताएं? वर्तमान में अपनी अगली पुस्तक ‘गुमनाम शहीदो की गाथा’ पर काम कर रहे हैं। जैसा कि नाम से पता चलता है, इसमें उन स्वतंत्रता सेनानियों के विस्तृत विवरण होगा जिन्होंने देश और मातृभूमि के लिए अंतिम बलिदान दिया लेकिन उनके नाम इतिहास के पन्नों में कहीं खो से गए हैं।

उदाहरण के तौर पे बात करें तो जैसे चित्तू पांडे, जयदेव कपूर, मनमथ नाथगुप्त, महावीर सिंह और कई अन्य। रचनात्मक लेखन के नए आयाम निर्यात करने के लिए युवा लेखकों के लिए कोई संदेश? नवोदित कवियों को अपने शिल्प, स्वयं और अपने जीवन की वास्तविकताओं के प्रति ईमानदार होना चाहिए।

इसलिए कविता के लिए अपने प्यार और जुनून को बानाए रखना चाहिए। आपका लेखन ऐसा हो जो देश के काम आए , समाज के काम आए। सबसे बड़ी बात लिखना से ज़्यादा महत्वपूर्ण है लिखते रहना।

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