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जल्द होगा नीतीश मंत्रिमंडल का विस्तार : कुछ नये चेहरे मंत्री बनेंगे, कुछ पुराने मंत्रियों की हो सकती है छुट्टी!

Ajit Mishra

Bihar : जिस दिन एनडीए से मुकेश सहनी की विदाई हुई है उसी दिन से नीतीश मंत्रिमंडल के विस्तार की संभावना जताई जा रही है।पटना के राजनीतिक गलियारे से खबर मिल रही है कि नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में कई ऐसे मंत्री हैं जो मुख्यमंत्री के उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके हैं और उनकी वजह से सरकार के विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। सरकार के काम काज में गति लाने के साथ-साथ एनडीए के शीर्ष नेतृत्व की नजर आने वाले लोकसभा चुनाव पर भी केंद्रित है इसके मद्देनजर विकास कार्य में तेजी लाकर जनता के बीच ये मैसेज भी देने की तैयारी है कि इस डबल इंजन की जो सरकार बिहार के विकास के नाम पर सत्ता में आई है वह उस काम को तेज़ी से कर भी रही है।

सरकार में नए चेहरों को शामिल कर कार्यकर्ताओं में जोश भरने के साथ-साथ मंत्रिमंडल में नयापन लाने की कोशिश भी सरकार कर रही है। बताया जा रहा है कि मंत्रियों को हटाने में नीतीश सरकार उम्र और सेहत को भी आधार बना सकती है। इसका आंकलन कर लिया गया है और मंत्रिमंडल विस्तार में उनका पत्ता भी कट सकता है और उनकी जगह कई नए चेहरे को मौका मिल सकता है।नए चेहरों में अनुभव के साथ-साथ युवाओं पर ज़्यादा भरोसा जताया जा सकता है। नीतीश कुमार की मंत्रिमंडल का विस्तार होगा तो उसमें जातीय संतुलन भी साधने की पूरी कोशिश की जाएगी।

कैबिनेट में ऐसे इलाके को भी प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है जो फिलहाल मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हैं। बताया जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार में भाजपा की तरफ से ज़्यादा बदलाव देखे जा सकते हैं। कुछ बड़े मंत्रियों को भी हटाया जा सकता है और उन्हें संगठन के काम में लगाया जाएगा। वहीं कुछ मंत्रियों के विभाग में भी बदलाव सम्भावित हैं। जदयू में भी कुछ बदलाव होने की पूरी उम्मीद है लेकिन खबर है कि जदयू में जिसे हटाया जा सकता है उसी जाति से भरपाई भी की जा सकती है। पार्टी के एक बड़े नेता को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। मंत्रिमंडल विस्तार में वीआईपी से बीजेपी में आए तीन विधायकों में से किसी एक को जगह मिल सकती है वहीं जीतन राम मांझी भी लगातार मांग कर रहे हैं कि उन्हें मंत्रिमंडल में एक और सीट दिया जाए, ऐसे में एनडीए इस मांग पर भी गम्भीरता से विचार कर सकता है।

फिलहाल नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में पांच सीटें खाली हैं, जिसे भरा जाना है। पांच सीटें जदयू और भाजपा के कोटे से हैं। राजनीतिक सूत्र बताते हैं कि कई राज्यों में मिली जीत से एनडीए में भारी उत्साह है। बिहार में भी भाजपा अब सदन में सबसे बड़ी पार्टी हो गयी है। इसके मद्देनजर पार्टी भविष्य को साधने के लिए कई स्तर पर व्यापक रणनीति पर काम करेगी। मंत्रिमंडल में सभी जातियों की भगीदारी और मंत्रियों को ठोस टास्क देकर भाजपा विजय की ओर अपने कदम बढ़ाएगी। इसी के साथ अपने सहयोगी जदयू से भी बेहतर तालमेल स्थापित करने को बराबर प्रमुखता देती रहेगी।

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